हर गांव की सांस्कृतिक पहचान होगी दर्ज, तैयार होगा समृद्ध सामाजिक – सांस्कृतिक डेटा: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
गांव-गांव की विरासत को मिलेगा दस्तावेजी रूप, लोक संस्कृति से लेकर पारंपरिक ज्ञान तक होगा संरक्षण
जिले के हर गांव की अपनी पहचान अब होगी डिजिटल दस्तावेज में दर्ज
लुप्त होती लोक परंपराओं और विरासत को सहेजने की पहल, विभाग मिलकर करेंगे व्यापक सर्वेक्षण
BOL PANIPAT , 31 अगस्त। जिले के प्रत्येक गांव की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके तहत जिले के हर गांव में सामाजिक-सांस्कृतिक सर्वेक्षण करवाकर वहां की भाषा-बोली, लोकगीत, लोकनृत्य, परंपराएं, त्योहार, मेले, खान-पान, पारंपरिक खेल, हस्तशिल्प, व्यवसाय, कृषि एवं पशुपालन से जुड़े पारंपरिक ज्ञान तथा ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को दस्तावेज के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस कार्य के माध्यम से जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार होगा, ताकि आने वाली पीढिय़ों को अपनी जड़ों और स्थानीय पहचान से जोड़ा जा सके।
इस संबंध में उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने सोमवार को जिला सचिवालय सभागार में विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़े एकत्र करने का कार्य नहीं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक ज्ञान और विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने विभाग से संबंधित जानकारी को प्रमाणित रूप में उपलब्ध करवाएं और फील्ड स्तर पर सर्वेक्षण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
उपायुक्त डॉ. हरीश ने कहा कि प्रत्येक गांव की अपनी अलग पहचान, इतिहास, लोक परंपरा और सामाजिक विरासत होती है। कई बार बुजुर्गों के पास ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं जो किसी लिखित रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए सर्वेक्षण के दौरान बुजुर्गों, सामुदायिक ज्ञानधारकों, किसानों, कारीगरों, लोक कलाकारों, शिक्षकों, इतिहासकारों, महिलाओं तथा युवाओं से जानकारी लेकर उसे प्रमाणित साक्ष्यों के साथ दर्ज किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गांवों में प्रचलित स्थानीय भाषा एवं बोलियों, विशिष्ट शब्दों और कहावतों के साथ-साथ लोकगीतों, लोककथाओं, मौखिक इतिहास, स्थानीय वीरों से जुड़ी स्मृतियों और किसी स्थान विशेष से जुड़ी कथाओं को भी गंभीरता से दर्ज किया जाए। इसी प्रकार पारंपरिक व्यंजन, खाद्य संरक्षण की विधियां, महिलाओं द्वारा संरक्षित ज्ञान, पारंपरिक व्यवसाय एवं हस्तशिल्प, पुराने औजार, कृषि एवं पशुपालन संबंधी पारंपरिक ज्ञान तथा पारंपरिक खेलों की जानकारी भी सर्वेक्षण का हिस्सा बनाई जाए।
डॉ. वशिष्ठ ने कहा कि गांवों में स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत की भी पहचान की जाए। मस्जिद, दरगाह, मजार, प्राचीन संरचनाएं, कुएं, बावडिय़ां, तालाब, पवित्र वृक्ष, पुराने रास्ते, प्राचीन बसावट और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की स्थिति, महत्व, संरक्षण की आवश्यकता तथा उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे इस कार्य में विशेष रुचि लेते हुए आपसी समन्वय से कार्य करें। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां फोटो, वीडियो, दस्तावेज, मानचित्र, जियो-टैग तथा अन्य प्रमाणित साक्ष्य भी एकत्र किए जाएं, ताकि तैयार किया जाने वाला रिकॉर्ड विश्वसनीय और उपयोगी हो।
उपायुक्त ने अपील करते हुए कहा कि जिले के लोग भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें। जिन लोगों के पास गांव के इतिहास, पुरानी तस्वीरें, दस्तावेज, वंशावलियां, पारंपरिक कला, लोकगीत, लोककथाएं, पुराने औजार या अन्य महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सामग्री से जुड़ी जानकारी है, वे उसे प्रशासन के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की सहभागिता से ही जिले की वास्तविक सांस्कृतिक तस्वीर सामने आ सकती है।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान युवाओं की रुचि और संभावनाओं को भी चिन्हित किया जाए, ताकि पारंपरिक कला, शिल्प, लोक संगीत, सांस्कृतिक आयोजन, पर्यटन, स्थानीय उत्पाद, कृषि एवं पशुपालन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण, रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकें। साथ ही यह भी देखा जाए कि कौन-सी परंपराएं विलुप्त होने के कगार पर हैं और उनके संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
बैठक में एडीसी अंकित चौकसे, पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह, एसडीएम मनदीप कुमार, सीईओ डॉ. किरण, नगराधीश टीनू पोसवाल, डीडीपीओ राजेश शर्मा, तहसीलदार वीरेंद्र, मनोज, जसवीर, विनीता, बीडीपीओ शीतल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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