मानसिक परेशानी को नजरअंदाज न करें, समय पर मदद लेना साहस की निशानी: प्राचार्य डी.बी.जी. कॉलेज
डी.बी.जी. कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम. आत्महत्या रोकथाम के उपायों पर हुई चर्चा.
BOL PANIPAT , 14 अगस्त। स्थानीय डी.बी.जी. राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा आत्महत्या की रोकथाम को लेकर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय टास्क फोर्स (एनटीएफ) के दिशा-निर्देशों पर आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और विद्यार्थियों को उचित सहयोग उपलब्ध कराने के लिए सक्षम बनाना रहा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य सुभाष चंद्र ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उनके मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत विकास का भी अभिन्न हिस्सा है।
प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को सकारात्मक, सुरक्षित एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उनकी पहचान कर उचित सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं सहायता संबंधी गतिविधियां भविष्य में भी जारी रहेंगी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक कल्याण, तनाव एवं भावनात्मक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता (पीएफए), प्रभावी संवाद तथा आवश्यकता पडऩे पर उचित रेफरल की प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इसके साथ ही आत्महत्या की रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी स्टाफ को जागरूक किया गया।
स्टाफ सदस्यों को विद्यार्थियों के व्यवहार एवं भावनात्मक स्थिति में होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया गया। उन्हें बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानी की स्थिति में सहायता लेना कमजोरी नहीं, बल्कि जागरूकता और साहस का प्रतीक है। महाविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यक्रम को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों को समय पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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