Friday, April 17, 2026
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आर्य कॉलेज में अर्थशास्त्रियों का महामंथन: टैरिफ की बाधाएं पार कर ही बनेगा विकसित भारत

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 4, 2026 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT – शनिवार 4 अप्रैल 2026: आर्य पी.जी. कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग और आईक्यूएसी के तत्वावधान में “टैरिफ चुनौतियों के बीच विकसित भारत की ओर भारत का मार्ग” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। इस बौद्धिक समागम में देश के प्रख्यात अर्थशास्त्रियों ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की राह में आने वाली व्यापारिक बाधाओं और संभावनाओं पर गहरा मंथन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज प्रबंधक समिति के उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंगला, प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता और उप  प्राचार्य   डॉ. अनुराधा सिंह द्वारा मुख्य वक्ताओं के स्वागत के साथ हुआ।
वीरेंद्र सिंगला (उपाध्यक्ष, प्रबंधक समिति) इस तरह के सेमिनार न केवल छात्रों का ज्ञानवर्धन करते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नीतियों में अकादमिक जगत के योगदान को भी सुनिश्चित करते हैं।
प्रातः कालीन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. सुरेंद्र कुमार ने टैरिफ और व्यापार नीति के जटिल समीकरणों को सुलझाते हुए कहा कि “विक्सित भारत” का मार्ग वैश्विक बाजार में हमारी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति पर निर्भर करता है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे उच्च टैरिफ दीवारें कच्चे माल की लागत बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारत को एक ‘संतुलित व्यापार नीति’ की आवश्यकता है, जहाँ हम अपने स्थानीय उद्योगों को संरक्षण भी दें और वैश्विक सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा भी बनें।
की-नोट स्पीकर के रूप में मौजूद रहे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. अशोक कुमार चौहान ने अपने संबोधन में भारत की आर्थिक रणनीतियों पर गहन विचार प्रस्तुत किए, जिसमें शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण भी शामिल था। उन्होंने कहा जब तक हमारी गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं होगी, तब तक टैरिफ में छूट का भी पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा।
सायं कालीन सत्र: नवाचार और रीब्रांडिंग पर जोर
सायं कालीन सत्र में डॉ. सुमनजीत ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमइ) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “हमें आरएनडी (अनुसंधान और विकास) में निवेश बढ़ाना होगा। बिना तकनीक अपनाए हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक सकते।” उन्होंने पर्यटन क्षेत्र की ‘रीब्रांडिंग’ पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं, जो विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाकर व्यापार घाटे को कम करने में मदद कर सकती हैं।
डॉ. नवीन जौहर ने अपने वक्तव्य में वैश्विक भू-राजनीति और व्यापार युद्ध के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमें द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों को रणनीतिक रूप से मजबूत करना होगा। टैरिफ चुनौतियों के बीच भारतीय उत्पादों की लागत कम करना ही एकमात्र विकल्प है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हमारी धाक जम सके।
प्राचार्य प्रो. डॉ. जगदीश गुप्ता ने सेमिनार के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक नीतियों पर सार्थक विमर्श करना भी है।
डॉ. रमेश शिंगला (अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग) अर्थशास्त्र विभाग का लक्ष्य छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक आर्थिक परिदृश्य से रूबरू कराना है। आज के विचार निश्चित रूप से नीतिगत बदलावों के लिए प्रेरणा बनेंगे। उन्होंने कार्यक्रम के विषय में विस्तार से बताया कि हुए तकनीकी सत्रों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि तकनीकी सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन अनुभवी शिक्षाविदों एवं समन्वयकों के मार्गदर्शन में किया गया। कुल चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिन्हें दो भागों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सत्र के लिए अध्यक्ष, सह-अध्यक्ष एवं तकनीकी समन्वयक नियुक्त किए गए थे।
तकनीकी सत्र 1 एवं 2
तकनीकी सत्र 1 एवं 2 की अध्यक्षता प्रो. डॉ. सुमनजीत सिंह द्वारा की गई, जबकि डॉ. नवीन जोहर ने सह-अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इन सत्रों का समन्वय डॉ. गरिमा द्वारा किया गया। इन सत्रों में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अध्यक्ष ने सत्रों का संचालन सुचारु रूप से करते हुए समय का उचित प्रबंधन किया तथा सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया। सह-अध्यक्ष ने प्रस्तुतियों के मूल्यांकन एवं संवाद को संचालित करने में सहयोग दिया, जबकि समन्वयक ने सभी तकनीकी एवं व्यवस्थागत कार्यों को प्रभावी ढंग से संभाला।
तकनीकी सत्र 3 एवं 4:
तकनीकी सत्र 3 एवं 4 की अध्यक्षता प्रो. डॉ. सोनू मदान द्वारा की गई, जबकि डॉ. नरेश कुमार ने सह-अध्यक्ष के रूप में सहयोग प्रदान किया। इन सत्रों का समन्वय डॉ. अंजू द्वारा किया गया। ये सत्र भी अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहे, जिनमें विभिन्न शोध प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। अध्यक्ष ने सत्रों का कुशल संचालन करते हुए प्रतिभागियों को अपने विचार साझा करने हेतु प्रेरित किया। सह-अध्यक्ष ने सत्र प्रबंधन एवं मूल्यांकन में सहयोग किया, जबकि समन्वयक ने सत्रों के सफल आयोजन को सुनिश्चित किया।
डॉ. रजनी शर्मा (सेमिनार सचिव) कार्यक्रम के सफल संचालन के अंत में डॉ. रजनी शर्मा ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के ये विचार शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने बताया कि सभी चार तकनीकी सत्र सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिनमें ज्ञान-विनिमय एवं शैक्षणिक संवाद को बढ़ावा मिला। अध्यक्षों, सह-अध्यक्षों एवं समन्वयकों के संयुक्त प्रयासों से सत्र अत्यंत सफल रहे। प्रतिभागियों को उपयोगी जानकारी एवं रचनात्मक सुझाव प्राप्त हुए।
सेमिनार में कॉलेज के प्रो. पंकज चौधरी डॉ. वर्षा, डॉ. अंजू मलिक, डॉ. गरिमा समेत विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और भारी संख्या में छात्र मौजूद रहे। मंच का संचालन अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रवक्ताओं द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।

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