बिजली विभाग हरियाणा बना महिला सशक्तिकरण का मंच: पीके दास अतिरिक्त मुख्य सचिव
–एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा’ कार्यशाला का छठा दिन
–स्त्री श्रम की आजादी में बिजली उपकरणों की ऐतिहासिक भूमिका: एके रहेजा, मुख्य अभियंता
BOL PANIPAT :8 मार्च, 2022 शक्ति भवन पंचकूला, बिजली विभाग हरियाणा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विविध अभियान चला रहा है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सपने को साकार करते हुए ‘बेटी बचाओं बेटी पढाओ’ अभियान को जीवंत करते हुए सरदार पटेल पुस्तकालय श्रृंखला की स्थापना मील का पत्थर साबित हो रहीहै. विदित रहेकि स्थापित हो रहे इन पुस्तकालयों की लाईब्रेरियन के रूप में जिम्मेदारी का निर्वहन सम्बंधित गांव की बेटियां ही निभा रही हैं. अंतर्राष्ट्रीयमहिला दिवस परनेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के सानिध्य में और बिजली विभाग हरियाणा सरकार के सहयोगएसडी पीजी कॉलेज में जारी मासिक नाटी कार्यशाला के छठे दिन को महिलाओं को समर्पित किया गया तथा बिजली विभाग हरिया के इस दिशा में उठाये गए प्रयासों को याद किया गया.
पीके दास अतिरिक्त मुख्य सचिव बिजली विभाग ने बतायाकी बिजली विभाग हरियाणा महिला सशक्तिकरण का सबसे मजबूत मंचबनकर उभरा है. उन्होनें बताया कि पुस्तकालयों में बेटियों की पढ़ाई के लिए विशेष वातावरण का निर्माण किया गया है. शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जा रहा है. उन्होनेंबताया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के साथ मिल कर पानीपत जिले के एसडी पीजी कालेज में एकमहीने की ‘‘वीर रस की प्रसिद्ध कविता“हल्दी घाटी” पर नाट्य प्रस्तुति कार्यशाला संयोजित कर रही है. इस कार्यशाला में आईटीआई पानीपत की छात्राएं अभिनय, संवाद, वस्त्र-सज्जा, मेकअप, सेट डिजाईनिंग का कार्य खुद निभा रही हैं. महिला दिवस का इस बार का थीम ‘स्थाई और समान कल के लिए समाज में लैंगिक समानता जरुरी’ हैजो इस कार्यशाला में स्पष्ट देखा जा सकता है.
डा साकेतप्रबंध निदेशकउत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने बताया कीआधुनिक समय में रंगमंच सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है. उन्होने कहा कि पानीपत के 2गांवोंमें सरदार पटेल पुस्तकालय की स्थापना की जा रही है जो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी.
एके रहेजा मुख्य अभियंता आप्रेशन रोहतक परिमंडल ने बताया कि स्त्री श्रम की आजादी में बिजली उपकरणों ने क्रान्तिकारी भूमिका निभाई है. महिला दिवस के अवसर पर रंगमंच में बेटियों की हिस्सेदारी सुखद आश्चर्यकी तरह है.

प्राचार्य डा अनुपम अरोडा ने कहा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यशाला आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर एकमहत्वपूर्ण घटना है. रंगमंच में महिलाओं के आने से दुनिया भर में चल रहे आंदोलनों और प्रतिरोध के सहारे स्त्रियों के अपने मुद्दे उठाए जाने मेंकाफीवृद्धि हुई है. स्त्री संघर्ष को जबखुद स्त्रियों ने नाटकके सहारे अभिव्यक्त करना शुरू किया तो इसकीएक अलग छाप समाज पर पड़ी है.
शिविर निदेशक लोकेन्द्र त्रिवेदी ने कहा हरियाणा की रागनी और शान भारतीय रंगमंच के परम्परा शील नाट्य स्रोत हैं. उन्होने कहा कि यह कार्यशाला हरियाणा में रंगकर्म की नई पीढ़ी का सृजन कर रही है.

कार्यशाला के समन्वयक राजीव रंजन ने कहा कि सांस्कृतिक विमर्श मनुष्य को सार्थक दृष्टि प्रदान करते हैं. यह कार्यशाला लैंगिक समानता का जीवंत उदाहरण है. रंगमंच भारतीय आध्यात्म परम्परा और संस्कृति का जीवंत साक्षात्कार कराती है.
कार्यशाला के संयोजन एवं सुचारू संचालन में शिविर के सहनिदेशक सतेन्द्र मलिक आईटीआई के वरिष्ठ शिक्षक रमेश कुमार और शुरूआत समिति की सचिव रीता राय जीवंत भूमिका निभा रहे हैं.

Comments