Wednesday, April 29, 2026
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सम्राट मिहिर भोज  की हिन्दुस्तान पर किए गए अरब आक्रमणों को रोकने में रही थी प्रमुख भूमिका – कर्णसिहं पसीना

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at September 6, 2024 Tags: , , , ,

-जिला स्तरीय गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की जयंति पर हुआ कार्यक्रम

BOL PANIPAT : बापौली, 6 सितंबर: ऊझा रोड स्थित गुर्जर भवन में जिला स्तरीय गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की जयंति पर धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान जिलें भर से गुर्जर समाज के गणमान्य लोगों ने बढ चढ कर भाग लिया। इस दौरान गुर्जर सभा पानीपत के जिला प्रधान व पूर्व पार्षद कर्णसिहं पसीना ने कहा कि गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने हमेशा गरीब व असहाय की मदद की है। उन्होने कहा कि उनके द्वारा किए गए कार्याे को भुलाया नही जा सकता है। पसीना ने कहा कि गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज का नाम आज हिन्दुस्तान ही नही बल्कि विश्व के अंदर मान सम्मान के साथ लिया जाता है। भोज का शासनकाल भारतीय इतिहास के मध्यकाल का वह दौर है जिसे तीन साम्राज्यों के युग के नाम से जाना जाता है। यह वह काल था जब पश्चिम-उत्तर भारत (इसमें वर्तमान पाकिस्तान के भी हिस्से शामिल हैं) क्षेत्र में गुर्जर-प्रतिहारों का वर्चस्व था। गुर्जर सभा प्रधान कर्णसिहं पसीना ने कहा कि गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी हिस्से में लगभग 49 वर्षों तक शासन किया और इनकी राजधानी कन्नौज (वर्तमान में उत्तर प्रदेश में) थी। इनके राज्य का विस्तार नर्मदा के उत्तर में और हिमालय की तराई तक, पूर्व में वर्तमान बंगाल की सीमा तक माना जाता है। भोज को प्रतिहार वंश का सबसे महान शासक माना जाता है और अरब आक्रमणों को रोकने में इनकी प्रमुख भूमिका रही थी। बताया जाता है कि मिहिर भोज अश्वसेना उस समय की सर्वाधिक प्रबल सेना थी। इस मौके पर गुर्जर समाज के जिले भर से गणमान्य लोग मौजूद थे।

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