किसी भी त्यौहार को लेकर भ्रम फैलाना समाज के लिए घातक : संजय
BOL PANIPAT : अभिभावक अपने बच्चों को भ्रमित ना करें यह संदेश सबको रोशनी फाउंडेशन के कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक संजय ने दिया उन्होंने कहा की त्यौहार सब के सम्मानित हैं किंतु किसी भी त्यौहार को लेकर भ्रम फैलाना समाज के लिए घातक है क्रिसमस के दिवस पर मां-बाप वह अभिभावक बच्चों को यह कहकर भ्रमित कर रहे हैं की रात को सांता क्लॉस गिफ्ट रख रहा है भविष्य में इस बात के बहुत अधिक नुकसान हैं विद्यार्थी जब बड़े होकर संघर्ष कल से गुजरते हैं तो उसे संकट की घड़ी में उन्हें अपने इष्ट देव ना नजर आकर कुछ और ही नजर आता है
हिमालयन पब्लिक स्कूल कूटानी रोड पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा यदि उन्हें झूठ या स्वार्थ सिखाया जाए, तो बड़े होकर वे समाज और परिवार दोनों के लिए समस्या बन सकते हैं। इसके विपरीत, अच्छे संस्कार जैसे सत्य, अनुशासन, सम्मान और करुणा बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। इसलिए माता-पिता और समाज का कर्तव्य है कि बच्चों को सही दिशा और नैतिक शिक्षा दें, ताकि भविष्य सुखद और सुरक्षित हो।
सबको रोशनी फाउंडेशन के अध्यक्ष सतबीर गोयल एवं कार्यक्रम संयोजक संजय बंसल ने कहा
बच्चों को दिए गए गलत संस्कार आगे चलकर हमें ही दुख देते हैं। बचपन में जो आदतें और मूल्य बच्चों के मन में डाले जाते हैं, वही उनके व्यक्तित्व की नींव बनते हैं। कार्यक्रम में बोलते हुए हिमालयन पब्लिक स्कूल के संचालक अनिल जताना मनीष गोयल एवं कृष्ण नारंग ने कहा आजकल लोग क्रिसमस पर प्लास्टिक के पेड़ लगाते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। प्लास्टिक न तो सड़ता है और न ही जीवन देता है। इसके स्थान पर हमें तुलसी जैसे पवित्र और जीवित पौधों की पूजा करनी चाहिए। तुलसी न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वातावरण को शुद्ध करती है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
सबको रोशनी फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक विकास गोयल ने बताया कि कई वर्षों से हिंदू धर्म की अलख जगाने के लिए संस्था कार्यरत है.बात यह है कि बच्चों को शुरू से ही सच और कल्पना के बीच का अंतर समझाना उनके मानसिक विकास के लिए ज़रूरी है। कहानियां, परी कथाएं और कल्पनाएँ बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट बताया जाना चाहिए कि ये केवल कहानियाँ हैं, सच्चाई नहीं। अगर हम सांता क्लॉज़ को एक कहानी या प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करें, तो बच्चे आनंद भी लेंगे और भ्रम में भी नहीं रहेंगे

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