Friday, April 17, 2026
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जीवन में अंगदान करने वाला हर व्यक्ति ईश्वर तुल्य है: डॉ एसएन गुप्ता सीनियर सर्जन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at November 22, 2022 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन

प्रशिक्षण शिविर इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी हरियाणा स्टेट ब्रांच चंडीगढ़ द्वारा प्रायोजित

स्वच्छता डेंगू से बचने का सबसे मजबूत मन्त्र है:डॉ सुनील संडूजा डिप्टी सीएमओ सिविल हस्पताल पानीपत

क़ानून और न्यायपालिका की तीसरी आँख है फॉरेंसिक साइंस: डॉ नीलम आर्य, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी मधुबन करनाल

BOL PANIPAT , 22 नवम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर का आज दूसरा दिन रहा जिसमे बतौर मुख्य वक्ताडॉ सुनील संडूजा डिप्टी सीएमओ सिविल हस्पताल पानीपत,सीनियर शल्य चिकित्सक एवं पूर्व-प्रधान एसडी पीजी कॉलेज डॉ एसएन गुप्ता, डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारीफॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल और बलवान कौशिकयोग प्रशिक्षक पानीपत ने अपने अनुभव और ज्ञान को एनएसएस एवं वाईआरसी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ साझा किया.पांच  दिवसीय शिविर डिप्टी कमिश्नर पानीपत सुशील सारवान आईएएस के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है जो की रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत के प्रधान भी है. मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान पवन गोयल,प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज में एनएसएस एवं वाईआरसी प्रभारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और डॉ एसके वर्मा ने तुलसी-रोपित गमले भेंट कर किया. भोजन उपरान्त दूसरे सत्र में गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. आज के दिन की ख़ास विशेषता एनएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा डेंगू की रोकथाम हेतु चलाई गई विशेष ड्राइव रही.

पांच दिवसीय कैंप में एसडी कॉलेज, आर्य कॉलेज, आईबी कॉलेज, राजकीय महाविधालय इसराना, बापौली, मतलौडा एवं पानीपत, वैश कन्या महाविधालय एवं जीए कॉलेज समालखा, चौधरी देवी लाल मेमोरियल कॉलेज सिवाह, पाइट एवं पाइट एनसीआर समालखा के लगभग 110 कार्यकर्ता और उनके काउंसलरस भाग ले रहे है.

डॉ सुनील संडूजा डिप्टी सीएमओ सिविल हस्पताल पानीपत ने‘डेंगू और मलेरिया: इनके फैलने के कारण और बचाव’ विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होनें बताया कि डेंगू केलक्षण अचानक तेज बुखार, सीर में दर्द, आँखों के पीछे दर्द और मांसपेशियों एवं बदन में दर्द का होना है और इसमें प्लेटलेट्स की संख्या अचानक घटने लगती है. मलेरिया में रोगी को सर्दी लगती है और प्यास, उल्टी और बैचैनी होने लगती है. डेंगू से बचने के लिए हमें पूरे बाजू के कपडे (खास तौर पर दिन में), मोज़े-जूते पहनने चाहिए. जमा पानी को साफ़ कर देना चाहिए और रात को सोते समय ओडोमास जैसीचीजों का प्रयोग करना चाहिए. डेंगू हो जाने पर हमें मसालेदार और बाहरी भोजन से बिलकुल परहेज करना चाहिए. उचित आराम और समुचित मात्रा में तरल पेय के माध्यम से हम जल्द डेंगू के प्रकोप से बाहर निकल सकते है.

डॉ एसएन गुप्ता सीनियर शल्य चिकित्सक ने कहा कि हम सभी मरने के बाद भी किसी इंसान को नया जीवन दे सकते हैं और उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान ला सकते हैं. हम फिर से किसी को यह दुनिया दिखा सकते हैं. अंगदान करने से हम में एक महान शक्ति पैदा होती है और यह अदभुत होती है. इस तरह की उदारता मन की महानता की धोतक हैजो न केवल हमको बल्कि दूसरों को भी खुशी देती है. भारत में हर वर्ष लगभग 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हैं. प्रत्यारोपण की संख्या और अंग उपलब्ध होने की संख्या के बीच आज भी एक बड़ा फासला है. अंगदान ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अंगदाता अंगग्राही को अंगदान करता है. दाता जीवित या मृत दोनों हो सकते है. दान किए जा सकने वाले अंग गुर्दे, फेफड़े, दिल, आंख, यकृत, पैनक्रियस, कॉर्निया, छोटी आंत, त्वचा के ऊतक, हड्डी के ऊतक, हृदय वाल्व और नसे हैं.इस तरह देखा जाए तो एक व्यक्ति कई व्यक्तियों की जान बचा सकता है. अंगदान जीवन के लिए अमूल्य उपहार है और अंगदान उन व्यक्तियों को किया जाता हैजिनकी बीमारियाँ अंतिम अवस्था में होती हैं तथा जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की शीघ्र आवश्यकता होती है. भारत में दो लाख व्यक्ति लीवर की बीमारी और पचास हजार व्यक्ति हृदय की बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. इसके अलावालगभग एक लाख पचास हजार व्यक्ति गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हैंजिनमें से केवल पांच हजार व्यक्तियों को ही गुर्दा प्रत्यारोपण का लाभ प्राप्त होता है. अंगदान की बड़ी संख्या में जरूरत होते हुए भी भारत में हर दस लाख में सिर्फ 0.08 डोनर ही अपना अंगदान करते हैं. भारत के मुकाबले अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी में 10 लाख में 30 डोनर और सिंगापुर, स्पेन में हर 10 लाख में 40 डोनर अंगदान करते हैं. इस मामले में दुनिया के कई देशों के मुकाबले भारत काफी पीछे है और इसकी बड़ी वजह जागरूकता का न होना है. लाखों व्यक्ति अपने शरीर के किसी अंग के खराब हो जाने पर उसकी जगह किसी के दान किये अंग का इन्तजार करते रह जाते हैं. ऐसे व्यक्ति अभी भी जीना चाहते हैं लेकिन उनके शरीर का कोई अंग अवरूद्ध हो जाने से उनकी जिन्दगी खतरे में आ जाती है. अंग प्रतिरोपित व्यक्ति के जीवन में अंगदान करने वाला व्यक्ति एक ईश्वर की भूमिका निभाता है. अपने अच्छे क्रियाशील अंगों को दान करने के द्वारा कोई अंगदाता 8 से ज्यादा लोगों के जीवन को बचा सकता है. उन्होनें हर एनएसएस एवं वाईआरसी कार्यकर्ताओं को कहा कि वे अपने जीवन में आगे बढ़े और अपने बहुमूल्य अंगों को दान देने का संकल्प लें.

डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल नेकहा कि फॉरेंसिक साइंस क़ानून और न्यायपालिका की तीसरी आंख है.फॉरेंसिक साइंस अपराध से जुड़ा विज्ञान है और इसमें अपराध का पतालगाने के लिए शरीर के तरल पदार्थो की जांच की जाती है. फॉरेंसिक रिपोर्ट कोअदालत भी अहम साक्ष्य मानती है. देश-विदेश में बढ रही आतंकी घटनाओं औरअपराधों ने आज फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढा दी है. आपराधिक वारदातों के सूत्रधारोंकी धर-पकड़के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत आज समाज और समय कीमांग है. इस साइंस का जानकार अपराध से जुडे लोगों को पकड़वाने में काफीमददगार होता है. आतंकवादी गुत्थियाँहों या रहस्यमय मौत, इन्हें सुलझाने मेंफॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका होती है. फॉरेंसिक साइंस अब विदेश में ही नहीं देशमें भी लोकप्रिय होती जा रही है. इस क्षेत्र में बढती नौकरियों ने विद्यार्थियों कोफॉरेंसिक साइंस का कोर्स करने के लिए प्रेरित किया है. इसकी पढाई करने वालों केलिए नौकरियों के कई विकल्प हैं. इसमें डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी करने वालोंके लिए हर स्तर पर नौकरी के अवसर है. एक अच्छे फॉरेंसिक एक्सपर्ट का स्वभावजिज्ञासु, उसकी कानून-व्यवस्था पर आस्था, उसमे सटीकता का गुण, तार्किक,व्यावहारिक, व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा उसमे वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता होनीचाहिए. फॉरेंसिक साइंस में प्राप्त शिक्षा के आधार पर हम अध्यापक, फॉरेंसिकइंजीनियर, जेनेटिक एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फॉरेंसिकइंवेस्टिगेटर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक कंसलटेंट, डिटेक्टिव आदि महत्वपूर्ण पदोंपर नौकरियां पा सकते है. एनएसएस कार्यकर्ताओं को इस की जानकारी गाँव में रहनेवाले युवाओं तक पहुंचानी चाहिए ताकि वे भी इसमें उपलब्ध रोजगार के अवसरों काफायदा उठा सके.

बलवान कौशिक योग प्रशिक्षक पानीपत ने अपना व्याख्यान एवं प्रशिक्षण ‘योग और ध्यान: वाईआरसी कार्यकर्ताओं के लिए आवश्यक’ विषय पर दिया. उन्होनें योग और ध्यान के शारीरिक लाभ सभी प्रतिभागियों को बताएं. योग और ध्यान चिंता एवं तनाव को कम करने में सहायक है. यदि किसी को तीव्र दर्द, डिप्रेशन और सिरदर्द की समस्या है तो उन्हें ध्यान और योग की मदद लेनी चाहिए. दिल की बीमारियों, उच्च रक्तचाप और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या में भी ये रामबाण है. नींद की समस्या और अनिद्रा से बचाने में योग और ध्यान का कोई विकल्प नहीं है. शांत चित्त, अच्छी एकाग्रता, बेहतर स्पष्टता एवं संवाद और मस्तिष्क एवं शरीर के कायाकल्प में ध्यान का बहुत बड़ा योगदान होता है. एनएसएस कार्यकर्ताओं को चूँकि धरातल पर रह कर विभिन्न समस्याओं से जूझना होता है ऐसे में ध्यान और योग को सीखना और करना उनके लिए नितांत आवश्यक है. ॐ शब्द का उच्चारण, कपालभातीजैसे आसन और नियमित प्राणायाम से हर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है. उन्होनें गुदगुदाते चुटकुलों के माध्यम से सभी को सिखाया की जीवन को खुश रह कर ही जीना चाहिए.

डॉ अनुपम अरोड़ा ने पांच दिवसीय रेड क्रॉस कैंप की परिकल्पना की सराहना करते हुए इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी हरियाणा स्टेट ब्रांच चंडीगढ़ की तारीफ़ की. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह समुदाय में ही अपना अस्तित्व बचा सकता है. छात्र-छात्राएं एक साथ मिलकर कितने कार्य करपायेंगे इसका बोध उन्हें समुदायवाद की भावना विकसित होने के बाद ही होगा.

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