आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग से पराली का प्रबंधन करें किसान
-1200 रुपए प्रति एकड़ दी जा रही प्रोत्साहन राशि
-पराली न जलाने बारे किसानों को किया जा रहा प्रेरित
BOL PANIPAT, 6 नवंबर। हरियाणा सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए सीआरएम स्कीम लागू की हुई है। इस योजना में पराली न जलाने व इसका प्रबंधन करने वाले किसानों को 1200 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। डीसी डॉक्टर वीरेन्द्र कुमार दहिया के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करने व प्रोत्साहन राशि की प्रक्रिया के लिए नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा बताया कि पराली का प्रबंधन करने के लिए किसानों के पास विकल्प मौजूद है। किसान सुपर सीडर, रिर्वसीबल एमबी प्लॉव, जीरो टिल सीड ड्रील, रोटावेटर व हैरो आदि की सहायता से धान की फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाएं। उन्होंने बताया कि पराली को जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है व मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है। मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं।
उन्होने किसानों से आह्वान किया कि कोई भी किसान खेतों में पराली न जलाए व इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करे। खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है जिससे सांस व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती है। खेतों में आग लगाने से खेतों में छोटे-छोटे कणों से पी.एम. 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिर दर्द व सांस लेने में तकलीफ होती है।
सुपरसीडर व जीरो टील सीड ड्रिल से गेहूं की सीधी बिजाई करें किसान
कृषि विकास अधिकारी (कृषि यंत्र) ने रबी सीजन में गेहूं की बिजाई करने वाले किसानों से सुपर सीडर, जीरो टील सीड ड्रिल तकनीक अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धान की कटाई और बिजाई के बीच उचित प्रबंधन से फसल की बेहतर स्थापना होती है और पराली प्रबंधन भी सुचारु रूप से किया जा सकता है। सुपर सीडर, जीरो टील सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बिजाई करने से समय के साथ-साथ किसान की पैसों की भी बचत होती है व पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है और पैदावार में भी इजाफा होता है।

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