हार से जीत का नाम ही गीता: सांसद संजय भाटिया
सेमिनार में वक्ताओं ने कहा आज भी गीता की प्रासंगितकता बरकरार.
BOL PANIPAT , 3 दिसंबर। जिला प्रशासन और सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग की ओर से गीता महोत्सव के तहत दूसरे दिन आर्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में जिले के स्कूली बच्चों के लिए गीता पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने गीता की महत्त्वता पर रोशनी डाली। फल कर्म का आधार है , फल कर्म को निर्धारित करता है व कर्म पर मनुष्य का अधिकार है इत्यादि बातों को लेकर चर्चा की गई।
लोकसभा सांसद संजय भाटिया ने सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचकर स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के साथ जीवन का सच जुड़ा है। गीता के प्रति श्रद्धा चाहिये। गीता के समान ऊंचा प्रेरणा परक कोई ग्रंथ नही है। गीता प्रेरणा देती है और असहाय जीवन में जान फूंकती है। यह किसी मजहब का नही मानव जीवन का सारांश है।
गीता विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर डॉ. विकास ने कहा कि हारे का सहारा गीता है। हर काल खंड व धर्म से परे है गीता। एक प्रकार से हमारे जीवन का स्टेयरिंग गीता है। उन्होंने जीवन प्रबंधन को गीता के साथ जोडक़र अदभूत सारांश प्रस्तुत किया।
सेमिनार में अपोलो इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती रजनी शर्मा ने कहा कि समय में भले ही बदलाव आया हो लेकिन गीता की प्रासांगिकता कम नहीं हुई है। दुविधा से छुटने का नाम गीता है। सभी प्रकार की जिज्ञासाओं का समाधान गीता है। उन्होंने अनेक उदाहरण देकर गीता के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गीता में विपरित परिस्थितियों में जीना सिखाती है और जीवन के थपेड़ों में आगे बढऩा सिखाती है।
गीता विश्वविद्यालय की डीन डॉ. प्रेरणा डागर ने कहा निराशा में पार निकालने वाला ग्रंथ ही गीता है। गीता हमें कर्म करने का संदेश देती है। आलस्य त्यागने का संदेश देती है। अकर्मनता को त्याग कर कर्म करने से जीवन स्वस्थ होता है। लोगों को गीता के उपदेशों को अपने आचरण में ढालना चाहिये। उन्होंने स्रोताओं के साथ अनेक अनुभव साझा किये। गीता को समझने के लिए परमात्मा में विश्वास जरूरी होना चाहिये। उन्होंने स्कूली छात्राओं से नियमित अभ्यास करने व मैडिटेशन करने का आह्वान किया।
सेमिनार में निर्माता निर्देशक संजीव लखनपाल ने कहा कि गीता का ज्ञान गोपनीय ज्ञान है। गीता में धर्म और अध्यात्म का सार है। यही उन्ही लोगों को समझा में आता है जो जिज्ञासु होते हैं। गीता में श्री कृष्ण ने कहा है कि सही मार्गदर्शन किया जाए तो गीता विश्व सभी प्रकार की बीमारी का समाधान दे सकती है। उन्होंने कहा कि गीता में ही शांति है। इससे मनुष्य को पूर्ण संतुष्टि मिलती है। गीता को समझने के लिए कर्म में योग करना होगा। गीता जीवन की नैय्ïया पार उतारने वाला ग्रंथ है। हमें इसे घर में आवश्यक रूप से पढऩा चाहिये।
इसराना महाविद्यालय के संस्कृत के सहायक प्राध्यापक प्रो राजपाल कौशिक ने कहा कि मनुष्य के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं आज का मानव चारों और से चुनौतियों और द्वंदो से घिरा है। उसका इस स्थिति में मार्गदर्शन गीता कर सकती है। गीता को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गीता का सार कर्मके प्रति प्ररित करना है। गीता में सभी संस्कृतियों का जीवन है। इस मौके पर अध्यापक गुलाब पांचाल ने गीता से जुड़ी अपनी कविता भी प्रस्तुत की।
इस मौके पर उपायुक्त सुशील सारवान ने लोकसभा सांसद संजय भाटिया को चद्ïदर व पटका ओढाकर सम्मानित किया तथा गीता की प्रति भेंट की। सेमिनार में संजीव लखनपाल, रजनी शर्मा, डॉ. प्रेरणा डावर, प्रो. राजपाल डा. विकास को भी गीता व पटका भेट कर सम्मानित किया गया। सेमिनार में उपायुक्त सुशील सारवान, अतिरिक्त उपायुक्त वीना हुड्डा, जिला परिषद के सीईओ विवेक चौधरी के अलावा नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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