Thursday, April 23, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का शानदार समापन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 21, 2024 Tags: , , , ,

-‘चापसिंह सोमवती’ सांग का भावपूर्ण एवं ह्रदय स्पर्शी प्रदर्शन
-अंतिम दिन सांग देखने कॉलेज में उमड़ा ग्रामीणों और युवाओं का सैलाब
-हरियाणवी संस्कृति को जीवंत रखने में सबसे बड़ी भूमिका सांग परंपरा की: प्रेम सिंह देहाती

BOL PANIPAT, 21 मार्च. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र प्रायोजित चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का आज अंतिम दिन रहा जिसमे एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की मेजबान की टीम ने ‘चाप सिंह सोमवती’ सांग की ह्रदय स्पर्शी प्रस्तुति दी । समापन समारोह के अतिविशिष्ट अतिथि प्रख्यात लोक संस्कृति कलाकार एवं संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत, हरियाणा राज्य गीत के रचियता एवं मेहर सिंह सम्मान से सम्मानित डॉ बाल किशन शर्मा रहे । विशिष्ट उपस्थिति में डॉ. संजू अब्रोल, प्राचार्या, राजकीय महाविद्यालय, पानीपत, जगमेंद्र सरोहा, मनीष, अनूप कुमार, प्रधान, श्री एस.डी. एजुकेशन सोसाइटी, पानीपत, ने सांग का लुत्फ़ लिया । मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । सांग के समापन पर सनातन धर्म कॉलेज पानीपत की प्रतिभागी टीम को 35 हज़ार रुपये का पुरस्कार दिया गया । मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता ने किया । आज के आयोजन का आकर्षण सांग निर्देशक उस्मान और डांस डायरेक्टर प्रकाश मलिक को सम्मानित किया जाना रहा ।
सांग महोत्सव ने दूर-दराज के गावों जैसे शाहपुर, डाहर, बडोली, सिवाह, निम्ब्री, कवि, उझा आदि के ग्रामीणों को अपनी तरफ खिंचा । अम्बाला, टोहाना, सोनीपत, जींद, करनाल, समालखा, मतलौडा, घरौंडा, नौल्था, इसराना आदि से आये बुजुगों और हरियाणवी बोली को समझने वाले दर्शक भी खुद को एसडी कॉलेज आने से नहीं रोक पाए और अंतिम दिन तो वे भारी संख्या में कॉलेज प्रांगण पहुंचे । चाय की चुस्कियों के साथ उन्होनें पूरे सांग का बड़े चाव के साथ लुत्फ़ लिया । उन्होनें एसडी कॉलेज और कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के इस कदम को एतिहासिक और दूर-दृष्टि पूर्ण उठाया गया कदम बताया । ग्रामीण अंचलो से आये हुए लोग सांग को देख कर संतुष्ट नज़र आये और उन्होनें कहा कि हरियाणा की इस सर्वप्रचलित कला को पुनः जीवित करना अपने आप में एक सराहनीय कदम है ।
डॉ बाल किशन शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र प्रायोजित चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का आयोजन करने पर उन्हें बहुत प्रसनंता का अनुभव हुआ है । रागनी अब स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है और इसकी मदद से ही सांगो का निर्माण किया जाता है । उन्हें पूरी उम्मीद है की इस आयोजन के बाद छात्र-छात्राएं अपने जीवन में हरियाणवी संस्कृति और इसके मूल्यों पर गर्व का अनुभव करेंगे ।
प्रेम देहाती ने कहा कि कॉलेज के छात्रों द्वारा किये गए सांग को देखकर उन्हें विश्वास हो गया है की हरियाणवी संस्कृति अब युवा पीढ़ी के सुरक्षित हाथों में है । हरियाणवी सांग परंपरा बहुत पुरानी है और इसी विधा में असली मायने में हरियाणवी संस्कृति के दर्शन और हरियाणवी जन-जीवन की झलक मिलती है । हरियाणवी संस्कृति को जीवंत रखने में सबसे बड़ी भूमिका सांग परंपरा ही निभा सकती है ।
दिनेश गोयल ने कहा कि सांग ने न सिर्फ उन्हें मनोरंजन दिया बल्कि इन चार दिनों में सांग हरियाणवी संस्कृति के संवाहक के तौर पर नज़र आया । हरियाणवी कला का इतना अदभुत और शानदार प्रदर्शन उन्होनें पहले कभी अपने जीवन में नहीं देखा था । सभी टीमों के कलाकर बधाई के पात्र है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पानीपत की जनता और गावों से आये लोगो विशेष तौर पर महिलाओं का धन्यवाद किया । उन्होनें कहा कि उन के आने से छात्र-छात्राओं को भी सांगो को देखने-समझने को प्रेरित किया है । आज मनुष्य विषम परिस्थितियो में जी रहा है और उसका जीवन ज्यादातर दुःखो से भरा रहता है । गीत, नृत्य और सांग ही उसे कुछ समय के लिए इन दुखो से बाहर ला सकते है । इनसे भी इंसान बहुत कुछ सीख सकते है क्यूंकि सांग के रचनाकारों ने अपने जीवन का सारा सार इनमें उड़ेल रखा है । सांग विधा अपने आप में अनूठी एवं आकर्षक विधा है ।
छात्रा छवि रानी ने कहा कि पहले उन्हें हरियाणवी भाषा बोलने में शर्म और झिझक का अनुभव होता था । परन्तु अब इन सांगो को सुनकर उनके मन में भी हरियाणवी भाषा और हरियाणवी संस्कृति के प्रति आदर का भाव जगा है ।
नारायणा गाँव से आए श्री ईश्वर सिंह ने कि बेशक युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आ रही है परन्तु जीवन में कामयाबी और सच्ची ख़ुशी उन्हें अपने ही लोक साहित्य और संस्कृति से मिलेगी ।
चौधरी धर्मपाल ने आज के सांग को देख कर गदगद नज़र आये और उन्होनें कहा की इतनी उच्च कोटि की कहानी और ऐसी पेशकश उन्होनें अपने पूरे जीवन में नहीं देखी है. कॉलेज के ये कलाकार मझे हुए कलाकारों से किसी भी मायने में कम नहीं है.

रामधारी सिंह नौल्था ने कहा की कॉलेज के छात्रों द्वारा किये गए सांग को देखकर उन्हें विश्वास हो गया है की हरियाणवी संस्कृति अब युवा पीढ़ी के सुरक्षित हाथों में है.
आज की प्रस्तुति में एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के कलाकारों ने ‘चाप सिंह सोमवती’ सांग पेश किया । इसकी कहानी उस समय की है जब शाहजहाँ दिल्ली के बादशाह थे । उनकी सेना की एक टुकड़ी के सेनापति चाप सिंह और दूसरी टुकड़ी के सेनापति शेरखान थे । चाप सिंह का विवाह बुंदेलखंड में रहने वाले जसवंत सिंह की बेटी सोमवती से हो जाता है । विवाह के कुछ वर्षो बाद चाप सिंह को गौने का संदेश आता है तो चाप सिंह बादशाह से छह मास की छुट्टी मागता है । बादशाह छुट्टी देने के लिए शेरखान से पूछते है कि यदि वह सेना की दूसरी टुकड़ी की जिम्मेदारी सम्भाल लेंगे तो ही चाप सिंह को इतने समय की छुट्टी मिलेगी । शेरखान जिम्मेदारी संभालने को तैयार हो जाता है और चाप सिंह सोमवती को लेने निकल पड़ता है । ससुराल में पाच मास बिताने के बाद चापसिंह सोमवती को लेकर दिल्ली के लिए निकल पड़ता है लेकिन बादशाह द्वारा दिए गए समय पर दरबार में हाजिर नहीं हो पाता है । शेरखान चाप सिंह पर पत्नीमोह के कारण अपने फर्ज से मुंह मोड़ने का इल्जाम लगा देता है और बादशाह से चाप सिंह को फासी लगाने की सलाह देता है । चाप सिंह कहता है कि उसके देरी से आने कारण पत्‍‌नी मोह नहीं अपितु कुछ ओर है । वह कहता है कि उसका विवाह एक पतिव्रता स्त्री से हुआ है जो उसका लम्बे समय तक इंतज़ार कर सकती है । तब शेरखान चापसिंह के इस दावे को गलत बताकर बादशाह सलामत से सोमवती की पवित्रता आजमाने के लिए कुछ समय की मोहलत मागता है । सोमवती अपनी असलियत बता देती है और चापसिंह को फांसी से बचाकर शेरखान को सजा दिलाती है ।
इस अवसर पर डॉ संगीता गुप्ता, डॉ मुकेश पूनिया, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो बलजिंदर सिंह, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, प्रो सतीश अरोड़ा, दीपक मित्तल, समेत अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे.

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