यदि समाज में क्रान्ति लानी है और आदमी में शान्ति तो कथाओं के स्वरूप को बदलना होगा: स्वामी दिव्यानंद जी महाराज
BOL PANIPAT : कथाओं में आने वाले चरित्रों को बड़ी गंभीरता से लेना चाहिए तभी जीवन में उत्कर्ष के द्वार खुलेंगे। यह प्रवचन श्री सनातन धर्म महाबीर दल संकटमोचन हनुमान मंदिर पानीपत द्वारा हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित वार्षिकोत्सव में तपोवन हरिद्वार से पधारे पूज्य गीता व्यास डा. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने चार दिवसीय कथा के तीसरे दिवस पर कही। उन्होंने कहा कि रोज-2 उन्हीं धार्मिक बातों को सुनते रहना ही कथा सुन लेना नहीं। शायद इसी कारण से विशेष चरित्र साधारण लगने लग गए हैं। जैसे हनुमान जी जिनका अवतार ही राम काज के लिए हुआ है। ‘‘राम काज लगि तव अवतारा’’ और राम जी का कार्य है आदर्श राम राज्य के रूप में धर्म की प्रतिष्ठा करना और आसुरी प्रवृत्ति का नाश करना। ऐसे में हनुमान जी एक सेवक के रूप में दास्य भक्ति का मूर्त रूप हुये, अतुलित बलशाली, कुशल वक्ता, निष्ठावान, पूर्ण ज्ञानी, समर्पित ही अच्छा सेवक हो सकता है न कि कोई भी सेवक हो जाये। महाराज श्री ने कहा कि यदि समाज में क्रान्ति लानी है और आदमी में शान्ति तो कथाओं के स्वरूप को बदलना होगा। लोगों की समस्याओं का समाधान करना होगा। इसके लिए केवल पुराने युगों को ही नहीं वर्तमान को भी पढ़ना होगा।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि सुरेन्द्र रेवड़ी समाजसेवी ने कार्यक्रम का शुभारभ दीप जलाकर किया इस अवसर पर विशेष रूप से कृष्ण रेवड़ी अध्यक्ष श्री सनातन धर्म संगठन, हेमंत लखीना, महेश जुनेजा, कैलाश नारंग, पंकज सेठी, श्रवण लखीना, चन्द्र रेवड़ी, अजय बत्रा,गुलशन नारंग, वेद सेठी, अशोक जुनेजा, किशोर जुनेजा, महेन्द्र जुनेजा, जोगेन्द्र कमल आदि उपस्थित थे।

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