पराली जलाने से रोकने के लिए गांव स्तर पर बढ़ाएं जागरूकता, किसानों को बताएं भूमि और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव: उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ
धान की पराली प्रबंधन और खरीद सीजन की तैयारियों को लेकर उपायुक्त ने ली समीक्षा बैठक
पंजीकृत किसानों को ही जारी हों गेट पास, मंडियों में पानी, तिरपाल, नमी मापक यंत्र और उठान की व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश
किसानों को मंडियों में किसी तरह की परेशानी न हो, सभी अधिकारी अपने क्षेत्रों की मंडियों का नियमित निरीक्षण करें
BOL PANIPAT , 16 सितंबर। धान की कटाई के बाद अब धान का मंडियों में आना शुरू हो गया है। धान की कटाई के दौरान फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक करने के साथ-साथ आगामी धान खरीद सीजन की तैयारियों को लेकर उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बुधवार को जिला सचिवालय सभागार में विभिन्न विभागों, खरीद एजेंसियों, तहसीलदारों, सभी उपमंडल अधिकारियों तथा मार्केट कमेटी सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली प्रबंधन को लेकर गांव स्तर तक प्रभावी जागरूकता अभियान चलाया जाए और किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा उसके उचित प्रबंधन से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जाए। उपायुक्त डॉ हरीश ने कहा कि धान की खरीद शुरू होने से पहले ही प्रशासन की तैयारियां पूरी होनी चाहिए। किसानों को यह समझाना जरूरी है कि फसल अवशेष जलाने से केवल पर्यावरण ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पराली को खेत में ही मिलाने अथवा उसे एकत्रित कर उपयोग में लाने के उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी दें और कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए भी प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि गांवों में गठित कमेटियों और नियुक्त नोडल अधिकारियों को सक्रिय किया जाए तथा प्रत्येक गांव में किसानों से निरंतर संपर्क रखा जाए। जागरूकता शिविरों, किसान बैठकों, मुनादी और अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए प्रेरित किया जाए। उपायुक्त डॉ. हरीश ने स्पष्ट किया कि किसानों को जागरूक करना प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
उपायुक्त ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां शुरू की जा रही हैं। गांव, खंड और जिला स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित करना सुनिश्चित करें। स्कूलों में भी विद्यार्थियों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करें। आगामी दिनों में जागरूकता वाहन, कृषि सूचना रथ तथा किसान जागरूकता गतिविधियों को और तेज किया जाए। बैठक में धान खरीद सीजन की तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले की सभी मंडियों में किसानों की सुविधा के लिए पर्याप्त पानी, तिरपाल तथा अन्य मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। बाहर से आने वाले धान की जांच और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों का पंजीकरण हो चुका है, उन्हें ही नियमानुसार गेट पास जारी किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र की मंडियों का निरीक्षण करें और जहां भी कोई कमी दिखाई दे, उसे धान खरीद शुरू होने से पहले दूर किया जाए। मंडियों में धान के ढेर लगने के बाद किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की खरीद के बाद समय पर उठान हो तथा किसानों को भुगतान में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने मंडियों में नमी मापक यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि धान की गुणवत्ता जांच और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित हो, इसके लिए खरीद एजेंसियां और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
बैठक में पराली प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। जिले में धान के अवशेषों के प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों के उपयोग, पराली को एकत्रित कर चारे तथा अन्य उपयोगों में लाने और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की संभावनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उपलब्ध कृषि मशीनरी का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए और किसानों को मशीनरी उपलब्ध करवाने की व्यवस्था प्रभावी रखी जाए।
उपायुक्त ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन केवल प्रशासन का अभियान नहीं, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों और आमजन की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसानों को यह बताया जाए कि पराली को जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करने से खेत की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक गांव में जिम्मेदारी तय करते हुए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपग्रह आधारित सक्रिय अग्नि स्थानों की निगरानी, गांव स्तर पर सूचना तंत्र और क्षेत्रीय निरीक्षण के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जाए। संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी करें तथा किसी भी घटना की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को जागरूकता, मशीनरी और उचित प्रबंधन के माध्यम से पराली जलाने से रोका जाए। साथ ही धान खरीद के दौरान किसानों को सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त किया जाए। बैठक में एसडीएम मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, नगराधीश टीनू पोसवाल, डीडीपीओ राजेश शर्मा, डीएसपी विकास चहल, डीडीए बलवंत सहारण, एसडीओ राजेश भारद्वाज, देवेंद्र कुहाड़, राधेश्याम, सुधीर सहित विभिन्न खरीद एजेंसियों और विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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