एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विद्यार्थियों के लिए इन्डक्शन प्रोग्राम का आयोजन
–उद्यमिता प्रोत्साहन माह के अंतर्गत विद्यार्थियों को कौशल विकास के अवसरों के बारे में विस्तार से बताया गया
–प्राचार्य, विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्रोफेसर्स ने किया छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन
–कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक और स्नातकोत्तर विषयों में लागू की गई है नई शिक्षा नीति
-नई शिक्षा नीति युवा पीढ़ी की शिक्षा को सरल करेगी और उन्हें ज्यादा कौशल युक्त और हुनरमंद बनाएगी: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 11 अगस्त.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विज्ञान, वाणिज्य, बीबीए और बीसीए प्रथम वर्ष में प्रवेश लिए नए विद्यार्थियों के लिए इन्डक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया जिसमे प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्रोफेसर्स के साथ मिलकर छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उन्हें मौजूदा सत्र में कॉलेज में होने वाली विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं खेल-कूद की गतिविधियों, लाइब्रेरी, क्रीडा क्षेत्र, कैंटीन, सेमिनार हाल और कॉलेज में अनुशासन रखने सम्बन्धी विस्तृत जानकारी दी. इस अवसर पर मुख्य अतिथि कपिल मदान राज्य समन्वयक स्वावलंबी भारत अभियान ने उद्यमिता प्रौत्साहन माह के अंतर्गत विद्यार्थियों को कौशल विकास के अवसरों के बारे विस्तार से बताया और उनके बेहतर भविष्य एवं आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने का भरोसा उन्हें दिलाया. इस वर्ष का सबसे बड़ा आकर्षण कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) में नई शिक्षा नीति लागू कर देश का एक अग्रणी विश्वविधालय बन जाना है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी और दूरगामी बदलाव हासिल होंगे. अब यूजी के सभी विषयों और पीजी के एक विषय में नई शिक्षा नीति लागू के अनुसार पढ़ाई होगी. कॉलेज परिसर में इसी सत्र में हजारों विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा. नई शिक्षा नीति में युवा पीढ़ी के लिए शिक्षा को सरल करने के साथ-साथ उन्हें कुशल और हुनरमंद बनाने का प्रावधान किया गया है. विभिन्न विभागाध्यक्षों में प्रो राकेश सिंगला, डॉ नवीन गोयल, डॉ प्रवीन कत्याल, प्रो प्रवीण खेरडे, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि कुमार, डॉ मुकेश पुनिया सहित विभिन्न विषयों के प्रोफेसर्स शामिल थे. इन्डक्शन प्रोग्राम के आयोजन का मकसद छात्र-छात्राओं को नई शिक्षा नीति और कॉलेज के माहौल से अवगत कराना था ताकि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास जागृत हो और वे कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर और कौशल से भरपूर बन सके.
कपिल मदान राज्य समन्वयक स्वावलंबी भारत अभियान ने कहा कि भारत की प्रमुख रूप से युवा जनसंख्या देश की वृद्धि और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसीलिए युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है ताकि वे कुछ कौशल खुद में विकसित कर सकें और देश की प्रगति के लिए काम कर सकें. भारत सरकार आज के युवाओं की इस क्षमता का उपयोग करना चाहती है. चूंकि देश की आबादी का 65% युवाओं का है इसलिए वे ही औद्योगिक क्षेत्र में राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. आज भारत सरकार ने देश के युवाओं को कौशल वृद्धि और विकास कार्यक्रम प्रदान करने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की स्थापना की है जिसका फायदा कॉलेज में पढने वाले हर विद्यार्थी को मिलेगा.
पवन गोयल प्रधान एसडी पीजी कॉलेज ने कहा कि प्राचीन समय से ही शिक्षक सही दिशा में विद्यार्थियों को प्रोत्साहित तथा मार्गदर्शित करते आ रहे हैं. वे न केवल सही कैरियर चयन में हमारी सहायता करते हैं बल्कि एक अच्छा इंसान बनने की शिक्षा भी देते हैं. वे विद्यार्थियों को अनुशासित करने के साथ-साथ शिक्षा के माध्यम से उनका मार्गदर्शन करते हैं. विद्यार्थी कैरियर, कोर्सेज हेतू विस्तृत सलाह केवल अपने शिक्षकों से ले सकते है और इसी उद्देश्य हेतु इस इन्डक्शन प्रोग्राम को आयोजित किया गया है. यह प्रोग्राम विद्यार्थियों को उचित निर्णय लेने में और नई शिक्षा नीति को समझाने में सहायक सिद्ध होगा ऐसी उन्हें आशा है.

डॉ अनुपम अरोड़ा ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस सत्र से नई शिक्षा नीति को नए पाठ्यक्रम के अनुसार लागु कर दिया गया है. इस शिक्षा नीति के तहत दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अपनी मनपसंद के विषय चुनने की आजादी है और इसके लिए गठित समितियों की ओर से मल्टीपल च्वाईस के कई एक्टिविटी एवं स्किल्ड कोर्स तैयार किए गए हैं. इसके लिए प्रथम सत्र में पर्यावरण, संस्कृति, मानव मूल्य, महिला नैतिकता, संचार कौशल और कंप्यूटर की शुरुआती पढ़ाई इत्यादि को शामिल किया गया है. प्राचार्य ने विद्यार्थियों को कॉलेज में होने वाली विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं खेल-कूद की गतिविधियों में हिस्सा लेने को प्रेरित किया. उन्होनें विद्यार्थियों को यह भी जानकारी दी कि टीचर-मेंटर के माध्यम से वे अपनी किसी भी शिकायत या परेशानी का निवारण कर सकते है. उन्होनें विद्यार्थियों को एसडी पीजी कॉलेज में दाखिला लेने पर बधाई दी और कहा कि उन्हें यहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी जिसमे उनमें मूल्यों और संस्कारों का भी समावेश होगा. उन्होनें कहा कि छात्राओं को कॉलेज कैंपस में पूर्ण सुरक्षा मिलेगी और किसी भी अनुशासनहीनता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. देश के विख्यात सभी वैज्ञानिक ग्रामीण और अभावयुक्त पृष्ठभूमि से आये है और ऐसे में हर छात्र को इस बात पर फक्र होना चाहिए कि उसे शहर के एक कॉलेज में पढने का अवसर मिला है. जिस छात्र को खुद पर यकीन है उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है. शिक्षा का अर्थ मात्र पैसा कमाना नहीं होता है बल्कि शिक्षा हमें सही-गलत का फर्क करना सिखाती है. शिक्षा हमें एक अच्छा और नेक इंसान बनाती है. संस्कारयुक्त शिक्षा के परिणाम और अधिक सुन्दर होते है. उन्होनें छात्र-छात्राओं को धर्म और जाती से ऊपर उठकर कर खुद को इस देश का नागरिक मानने का आह्वान किया. कॉलेज के लिए हर छात्र-छात्र समान है और सारी सुविधाए सभी के लिए है. उन्होनें वाणिज्य एवं विज्ञान में छुपी अपार संभावनाओं से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया और कि उन्होनें किसी ऐसे कोर्स या पाठ्यक्रम को भी चुनना है जिसकी औद्योगिक नगरी पानीपत में मांग है. मेंटर की भूमिका और उपयोगिता पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि अपने सपनों को पूरा करने तथा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक सलाहकार का होना नितांत आवश्यक है और यह एक भाई, बहन, अध्यापक या मित्र कोई भी हो सकता है. यही कार्य एक मेंटर करता है. मेंटर हमें सही मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन देता है. वह हमारी क्षमताओं की सीमाओं को एक नए तरीके से आगे बढाता है तथा हमारे लक्ष्यों को पूर्ण करने की ओर पहला कदम उठाता है. वह लगातार हमें प्रोत्साहित करके हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता रहता है जिससे हमारा सर्वोत्तम प्रदर्शन सामने आ पाता है. मेंटर-टीचर विद्यार्थियों के पथ में उनको सही मार्गदर्शन तथा सहायता प्रदान करता है.
प्रो राकेश सिंगला ने कहा कि सभी अल्पकालिक प्रशिक्षण योजनाओं और पहलों का उद्देश्य युवाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण की आवश्यकता को प्रोत्साहित करना और बढ़ावा देना है.
डॉ नविन गोयल ने कहा कि लंबी अवधि की प्रशिक्षण योजनाएं और पहल डीजीटी के तहत काम करती हैं और सभी मौजूदा प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान करती हैं. ये योजनाएं युवाओं के बीच कौशल वृद्धि के मानकीकृत मानदंड स्थापित करना चाहती हैं.
इस अवसर पर विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्रोफेसर्स ने विद्यार्थियों के साथ बातचीत की और उनके मन में व्याप्त जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों के उत्तर दिए जिनमे प्रो पवन सिंगला, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ रेखा रानी, डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ प्रवीण कुमारी, डॉ पवन कुमार, डॉ दीपा वर्मा, डॉ दीपिका अरोड़ा मदान, डॉ मुकेश गुप्ता, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो संजय चोपड़ा, दीपक मित्तल शामिल रहे.

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