एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस (इंटरनेशनल बायो-डाईवर्सिटी डे) का जैव विविधता को संजोने के प्रण के साथ समापन
–इंसान जैव विविधता का समाधान बने, मुसीबत नहीं: पवन गोयल, प्रधान
अंधाधुंध शहरीकरण, वनों का कटाव, वैश्विक तापमान में वृद्धि एवं प्लास्टिक प्रदूषण जैव-विविधता पर संकट के मुख्य कारण: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन आज पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमे बीएससी और एमएससी के लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने पूरी तन्मयता के साथ हिस्सा लिया और ‘जितनी भिन्नता उतना अच्छा समाज’, ‘अच्छे भविष्य के लिए प्रकृति को बचाए’, ‘समाधान बने मुसीबत नहीं’, ‘जागो इंसानों तुम्हारा अस्तित्व भी खतरे में है’, ‘जैव-विविधता का संरक्षण, क्या यह ग्रह हम सबका नहीं?’, ‘जैव-विविधता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत’, ‘जैव-विविधता और भावी पीढियां’ जैसे विषयों पर रंग-बिरंगे पोस्टर बनाये. पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ रवि कुमार, प्राणी शास्त्र की विभागाध्यक्षा डॉ प्रियंका चांदना और डॉ राहुल जैन ने किया. विदित रहे की वर्ष 2022 की जैव विविधता का थीम ‘सभी के लिए साझे भविष्य का निर्माण’ है. प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने पर बधाई दी. तत्पश्चात छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और पलाकार्ड्स लेकर रैली निकाली और जैव-विविधता और पर्यावरण को बचाने और संजोने के सन्देश समाज को दिए. कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सभी विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को वन्य प्राणियों विशेषकर पूजनीय गाय और वनस्पति एवं वृक्षों को बचाने और लगाने की शपथ दिलाई.

पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में गीतिका ने प्रथम, ऋतिक और इशिका ने संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया. अनामिका और तनु को सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुए. प्राचार्य अनुपम अरोड़ा ने विजेताओं को नकद राशि और प्रशस्ति पत्र से नवाजा.
प्रधान पवन गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि किसी भी क्षेत्र में जैव विविधता के लिए सर्वाधिक वर्षा एवं उच्च तापमान की अत्यंत आवश्यकता होती है. जाहिर सी बात है कि जिस क्षेत्र में वर्षा अधिक होगी तथा तापमान अधिक होगा उस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे उग आएंगे. अत्यधिक पेड़-पौधों के उगने से वहां पर जीव-जंतुओं का भी विकास होगा और इस प्रकार उस क्षेत्र में जैव विविधता अधिकतम होगी. तभी हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और हरियाली बढानी चाहिए. हमें जैव विविधता का समाधान बनना है मुसीबत नहीं.

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि जैव विविधता अर्थात बायो डाईवर्सिटी दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है – बायो और डाई वर्सिटी जिसका अर्थ क्रमश: है – जीवित वस्तुएँ तथा विभिन्न प्रजातियाँ. जीवो की विभिन्न प्रजातियों का एक ही स्थान पर पाया जाना ही जैव विविधता कहलाता है. जैव विविधता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन 1985 में डब्ल्यूजी रोजेन ने किया था और इसे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 22 मई को मनाना शुरू किया गया. असल में जैव विविधता जीन में अन्तर के कारण होती है. यह एक ही प्रजाति के सदस्यों में पायी जाती है और इसको नस्ल और उपजाति से प्रदर्शित किया जाता है. विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों की संख्या को जातीय जैव विविधता कहा जाता है. इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र के कारण उत्पन्न विविधता को पारिस्थितिक जैव विविधता कहते हैं. जैव विविधता का कई महत्व है जैसे यह औषधि का स्रोत होता है, यह आय का स्रोत होता है, यह पौधों का समूह होता है और इसलिए वर्षा कराने में सहायक होता है. जैव विविधता के कारण ही कार्बन उत्सर्जन का स्तर कम रहता है. परन्तु मानव निर्मित कई कारणों से अब जैव विविधता पर खतरा मंडराने लगा है. अंधाधुंध शहरीकरण, वनों का कटाव, वैश्विक तापमान में बृद्धि, प्लास्टिक प्रदूषण और वनों में आग लगने आदि के कारण जैव विविधता नाजुक दौर में पहुँच चुकी है. यदि जैव विविधता ही न रहेगी तो इन्सान का भी विलुप्त होना तय है. अब उम्मीद आज की युवा पीढ़ी से ही बची है.
डॉ रवि रघुवंशी विभागाध्यक्ष वनस्पति शास्त्र ने जैव विविधता संरक्षण के उपायो पर बात करते हुए कहा कि स्वस्थाने संरक्षण विधि में जीव-जंतु तथा पेड़-पौधों को उनके निवास स्थान पर ही संरक्षण दिया जाता है जैसे की राष्ट्रीय पार्क, वन्य-जीव अभ्यारण, जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र इत्यादि. दूसरी तरफ बाह्यस्थाने संरक्षण विधि में जीव-जंतुओं तथा पेड़-पौधों को उसके निवास स्थान से अलग कर किसी दूसरे स्थान पर संरक्षण प्रदान किया जाता है जैसे की चिड़ियाघर या पार्कों में.
इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो इंदु पुनिया, प्रो नरेंद्र कौशिक, प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मोनिका खुराना, प्रो लक्षिता कपूर, प्रो दीप्ति, प्रो सुरभि, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो सनी, प्रो मानवी, दीपक मित्तल भी मौजूद रहे.

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