एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय इंटरजोनल खो-खो (महिला) टूर्नामेंट का आयोजन
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत और चौधरीईश्वर सिंह कन्या महाविधालय पूंडरी ने जीते अपने-अपने मैच
कल होगा इंटर जोनल विजेता का फैसला और आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटीके लिए खिलाडियों का चयन
तंदुरुस्ती, कौशल, गति और ऊर्जा खो-खो में जीत पाने का मूलमंत्र: डॉसुशीला बेनीवाल
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में तीन दिवसीय जोनल एवं इंटर जोनल (महिला) खो-खो टूर्नामेंट के अवसरपर आज लीग आधारित इंटर जोनल मुकाबले शरू हुए जिसमे कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के चारो जोन की विजेता टीमें भाग ले रही है. आज खेले गए मैचों में चौधरी ईश्वर सिंह कन्या महाविधालय पूंडरीकी टीम ने खालसा कॉलेज यमुनानगर को 23-0 से और एसए जैन कॉलेज अम्बाला सिटी को 2-1 के अंतर से हराया. एसडी पीजी कॉलेज की टीम ने जहाँ एकतरफा मुकाबले में खालसा कॉलेज यमुनानगर को 36-4के अंतर से हराया वहीँकॉलेज की टीम काएसए जैन कॉलेज अम्बाला सिटी के साथरोमांचकमैच3-3 की बराबरी पर छूटा.कॉलेज की छात्रा खिलाडियों निकिता, रितु, अन्नू, मनीषा, सोनू, सीमा, शीतल, पूजा, मानसी और प्रीती ने बुद्धिमानी, कौशल और तेज गति के समन्वय से शानदार खेल दिखाया. इंटर जोनल टूर्नामेंट का विधिवत उदघाटन एसडी पीजी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने किया. उनके साथ प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ एस के वर्मा, डॉ राकेश गर्ग,प्रो गीता मलिक, कोच शरीफ, ग्राउंड्स मैन प्रताप और अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे. प्रधान पवन गोयल ने सभी खिलाडियों से उनका परिचय लेते हुए सभी को मेहनत के साथ खेलने के लिए प्रेरित किया. 22 फरवरी को बाकी बचे दो लीग मैच खेले जायेंगे और विजेता को घोषित किया जायेगा.मैडल समारोह का आयोजन और इस टूर्नामेंट में उत्कृष्ठ प्रदर्शन के आधार पर आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खो-खो (महिला) टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों का चयन भी कल किया जाएगा.

एसडी पीजी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय इंटरजोनल खो-खो टूर्नामेंटके आयोजन पर समस्तकॉलेज को बधाई दी और कहा किविद्यार्थी जीवन में खेलों को अपनाने से बड़े फायदे होते है.खेल हमारी संज्ञानात्मक विकास को आगे बढ़ाता है तथा यह हमारे लिए एक पालनकर्ता है.कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता भी हमें खेलों से आती है.खेल हमारी शारीरिक और क्रियात्मक विकास में वृद्धि करते है. इतने सारे फायदे यदि खेलों में है तो हमें क्यूँ नहीं इनको अपनाना चाहिए.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की खेलों द्वारा विद्यार्थी सामाजिक होना सीखते है और उनमे भावात्मक विकास संभव होता है.युवा जीवन में खेलों में भाग लेने से युवाटीम वर्क सीखते है और उनके मस्तिष्क का बेहतर विकास होता है.शारीरिक विकास के साथ-साथ मन का विकास भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है. खेल अंग विन्यास को अच्छा, हृदय को मजबूत,श्वसनतंत्र को बेहतर और हमारीइम्यूनिटी कोबढाने में सहायक होते है.प्रतियोगी भावना भी हमें खेलों से ही मिलती है. हर युवा को चाहिए की वह कम से कम एक खेल में भाग जरुर ले.
डॉ सुशीला बेनीवाल शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष ने कहा की खो-खो एक भारतीय मैदानी खेल है औरजिसमेमैदान के दोनो ओर दो खम्भो के अतिरिक्त किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं होतीहै. यह एक मनोरंजक स्वदेशी खेल है जो युवाओं में ओज और स्वस्थ संघर्षशील जोश भरता है. यह खेल पीछा करने वाले और प्रतिरक्षक दोनों से अत्यधिक तंदुरुस्ती, कौशल, गति और ऊर्जा की माँग करता है.
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो नरेंद्र कौशिक, डॉ राकेश गर्ग, प्रो अन्नू आहूजा, डॉ बलजिंदर सिंह, प्रो गीता प्रुथी, प्रो मनोज कुमार, कोच शरीफ, ग्राउंड्समैन प्रताप आदि ने सारे मैचों का भरपूर लुत्फ़ लिया.

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