महिपाल ढांडा सीएम नायब सैनी के मंत्रिमंडल में शामिल। मिला राज्य मंत्री का दर्जा। जानिए महिपाल ढांडा की राजनीतिक करियर की कहानी।
विधायक महिपाल ढांडा
विधानसभा-पानीपत ग्रामीण
शैक्षिक योग्यता: बीए
2014-2019 पानीपत ग्रामीण विधानसभा से 2 बार के विधायक
अब तक बीजेपी में मिली महिपाल ढांडा को यह जिम्मेदारियां
भाजपा किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष
स्वच्छ भारत मिशन के तहत टास्क फोर्स के अध्यक्ष
हरियाणा में 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी हाईकमान ने हरियाणा में बड़ा फेरबदल कर दिया और सीएम मनोहर लाल खट्टर को सीएम की कुर्सी से उतार कर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से सांसद नायब सिंह सैनी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया। प्रदेश का मुखिया बनने के बाद नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण के दौरान पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल कर दिया था लेकिन बाकी टीम का विस्तार होना बाकी था …जिसकी गहमागहमी लगातार बनी हुई थी …और आज शाम 4:30 बजे नायब सिंह सैनी के मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। पानीपत ग्रामीण विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विधायक महिपाल ढांडा को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। आईये जानते हैं महिपाल ढांडा के राजनीतिक करियर की कहानी।

महिपाल ढांडा पेशे से एक व्यवसायी है और आरएसएस(संघ) के पुराने सदस्य रहे हैं। महिपाल ढांडा ने 1980 के दशक में भाजपा की युवा शाखा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी… और पार्टी में लगातार काम करते हुए उन्हें कई अन्य पद भी मिले जिसमें पार्टी ने उन्हें एक बार किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया… महिपाल ढांडा ने साल 2014 में पानीपत (ग्रामीण) से अपना पहला चुनाव लड़ा।हरियाणा-यूपी सीमा पर स्थित पानीपत ग्रामीण विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पानीपत जिले के औद्योगिक शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करता है। जाटों, ब्राह्मण और जैन समुदायों के प्रभुत्व वाला, पानीपत (ग्रामीण) निर्वाचन क्षेत्र 2009 के परिसीमन में बनाया गया था। हालांकि अब पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में प्रवासी लोगों की संख्या लाखों में है जिन पर पानीपत ग्रामीण विधानसभा चुनाव काफी हद तक निर्भर रहता है जिसमें महिपाल ढांडा की अच्छी पैठ बताई जाती है…हालांकि यहां कुछ कॉलोनियों को नियमित कर दिया गया है, लेकिन कई कॉलोनियां ऐसी हैं जिनमें बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
पानीपत ग्रामीण विधान सभा का चुनावी इतिहास
2009: ओपी जैन (निर्दलीय) ने इनेलो की बिमला कादियान को 6,636 से हराया।
2014: बीजेपी के महिपाल ढांडा ने धारा सिंह (निर्दलीय) को 36,132 वोटों से हराया.
2019- बीजेपी के महिपाल ढांडा ने जेजेपी के देवेंद्र कादियान को अच्छे अंतर से हराया था
विधायक के तौर पर उनके प्रदर्शन पर एक नजर :
पहली बार विधायक बने ढांडा औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों, नालियों और उपचार संयंत्रों के निर्माण के लिए 250 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाएं लाए। उन्होंने पानीपत के बाहरी इलाके में एक आईटीआई और चार बाईपास स्थापित किए। एनजीटी द्वारा उन पर लगाई गई शर्तों के लिए उन्हें उद्योगपतियों की आलोचना का सामना करना पड़ा। ढांडा स्वच्छ भारत मिशन के तहत टास्क फोर्स के अध्यक्ष थे, लेकिन उनके निर्वाचन क्षेत्र में स्वच्छता एक गंभीर मुद्दा बनी रही।

आपको बता दें कि महिपाल ढांडा एक जाट नेता है महिपाल ढांडा 2014 चुनाव में करनाल लोकसभा सीट की टिकट मांग रहे थे… लेकिन बीजेपी ने उन्हें पानीपत ग्रामीण विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा और महिपाल ढांडा बीजेपी की उम्मीदों पर खरे उतरे…. जानकारों का कहना है भारतीय जनता पार्टी में शुरू से ही महिपाल ढांडा के विरोधियों की कमी नहीं है… विरोधियों ने पिछली बार 2019 विधानसभा चुनाव में महिपाल ढांडा की टिकट कटवाने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा लिया था..मगर केंद्रीय नेतृत्व के साथ मजबूत संबंधों के चलते महिपाल ढांडा दूसरी बार अपनी टिकट लाने में कामयाब रहे और दूसरी बार जीत भी दर्ज की ।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि विरोधी इस बार भी उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले बाहर का रास्ता दिखा थे … मगर दो बार के चुनाव का इतिहास देखें तो महिपाल ढांडा हर बार विरोधियों पर भारी पड़े हैं… आपको बता दें कि हरियाणा में कुल वोट का लगभग 25% जाट वोटर हैं वहीं बीजेपी के द्वारा महिपाल ढांडा को मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर राजनीतिक पंडित आने वाले चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर कयास लगा रहे हैं। जानकारों की माने अगर महिपाल ढांडा को मंत्रिमंडल में शामिल कर बीजेपी जाट वोट बैंक को साधने का प्रयास करेगी… क्योंकि जाट वोटर बीजेपी को कम पसंद करते हैं और जाट वोटर चाहते हैं कि हरियाणा में जाट समुदाय से मुख्यमंत्री बनाया जाए लेकिन बीजेपी ऐसा कतई नहीं करेगी जिसके चलते बीजेपी महिपाल ढांडा को मंत्रिमंडल में शामिल करके जाट वोट बैंक को साधने का प्रयास जरूर करेगी…. हालांकि भाजपा सूत्रों की मानें तो कहा जा रहा है कि महिपाल ढांडा मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं क्योंकि वह मात्र 6 महीने के लिए मंत्री नहीं बनना चाहते हैं…मगर अब उनके मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बनने के बाद कहा जा सकता है कि यह बात भी उनके विरोधियों द्वारा जानबूझ कर फैलाई गयी थी।

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