Wednesday, May 13, 2026
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जोश और जज्बे के साथ मनाया गया शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 28, 2023 Tags: , , , ,

छात्र-छात्राओं के मध्य एक क्विंटल लड्डू किये गए वितरित

उच्च विचार, अनुपम बलिदान और राष्ट्रवादी दर्शन का दूसरा नाम है शहीद भगत सिंह: डॉ राकेश गर्ग

BOL PANIPAT , 28 सितम्बर.

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस इकाइयों के कार्यकर्ताओं और अन्य विद्यार्थियों ने भारत के सच्चे सपूत शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस पूरी श्रद्धा एवं जज्बे के साथ मनाया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की और उनके साथ एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो सुषमा दाहिया, प्रो सतीश अरोड़ा, प्रो संजय चोपड़ा, शशी मोहन गुप्ता, प्रो मनोज कुमार तथा अन्य प्राध्यापक भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में विशेष तौर पर कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों ने भी शिरकत की जो पिछले 13 वर्ष से लगातार कॉलेज में आकर अपनी देशभक्ति का अहसास कराते है. एनएसएस कार्यकर्ताओं ने इन्ही पूर्व विद्यार्थीयों के साथ मिलकर एक क्विंटल (100 किलो) लड्डू का प्रबंध किया और नए विद्यार्थियो को भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा एवं व्यक्तित्व निर्माण को लेकर प्रेरित किया. हर वर्ष कि तरह आज भी कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के सभी छात्र-छात्राओ को लड्डू वितरित किये गए. कार्यक्रम का प्रारंभ स्वर कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर द्वारा गाये गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी’ से किया गया. विदित रहे कि भारत रत्न स्वर्गीय लता मंगेशकर का जन्मदिवस भी 28 सितम्बर ही है जो एक अनूठा संयोग है. एनएसएस कार्यकर्ताओं ने एनएसएस और देश भक्ति के गीत गाकर कॉलेज के माहौल को देशभक्ति पूर्ण बना दिया.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि भगत सिंह  का जन्म 1907 को हुआ और वह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. भगत सिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया वह आज के युवकों के लिए प्रेरणा का विषय है. भगत सिंह सेण्ट्रल असेम्बली में बम फेंककर भी वहां से भागे नहीं जिसके फलस्वरूप उन्हें 23 मार्च 1931 को इनके दो अन्य साथियों राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गई. सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया है और यह सिलसिला सैदव जारी रहेगा. पहले  लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान करने वाला यही वीर सपूत था. उन्होनें कहा की आज भगत सिंह को यदि हमने सच्ची श्रधान्जली देनी है तो हमें उनकी तरह अपने चरित्र निर्माण पर ध्यान देना होगा. लड़कियों की हिफाजत, बड़ो का सम्मान और राष्ट्र की समस्याओं के प्रति जागरूकता से ही हम अपनी आजादी को संजोकर रख पायेंगे. हर व्यक्ति को शहीद भगत सिंह की तरह खुद के व्यक्तित्व को निखारना होगा. आज हर व्यक्ति उनके जीवन और उपलब्धिओं के बारे में सब जानता है परन्तु बड़ी बात यह होगी कि उनपर अम्ल किया जाए. यही समय की मांग भी है और देश की जरुरत भी. भगत सिंह की कुर्बानी यह देश कभी भी नहीं भूल सकता है.

डॉ राकेश गर्ग एनएसएस अधिकारी ने कहा कि जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अन्दाजा सहज ही लगाया जा सकता है. उन्होंने भारतीय समाज में भाषा, जाति और धर्म के कारण आयी दूरियों पर दुःख व्यक्त किया था. उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग पर किसी भारतीय के प्रहार पर भी उसी सख्ती से सोचा जितना की किसी अंग्रेज के द्वारा किये गये अत्याचार पर. उनका यह भी विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और आंदोलित हो जायेगी और ऐसा उनके जिन्दा रहने से शायद ही हो पाये. इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनने के बाद भी माफ़ीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था. ऐसे वीर शहीद को शत-शत हमारा नमन. स्वतंत्रता के पश्चात आज समाज एवं राष्ट्र में अनेकों लड़ाईयां लड़ी जा रही है और उनसे लड़ने और उन पर विजयी होने के लिए हर युवा और एनएसएस कार्यकर्ता को खुद में भगत सिंह पैदा करना होगा. उच्च विचार, अनुपम बलिदान और राष्ट्रवादी दर्शन का दूसरा नाम शहीद भगत सिंह है.

      इस अवसर पर कॉलेज के पूर्व छात्र काला, आज़ाद, प्रदीप, रोहित, कुलदीप भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

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