Friday, June 5, 2026
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किसानों को रास आ रही है मशरूम की खेती.

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 3, 2022 Tags: , , ,

जिले में व्यवसाय का रूप धारण करती मशरूम की खेती।

BOL PANIPAT , 3 अक्तूबर। जिले का किसान अब जागरूक हो चुका है। वह वैज्ञानिक तरीके से बागवानी वैज्ञानिकों के सहयोग से मशरूम की खेती कर रहा है। उसकी नजऱ खेती प्रारंभ करने से पहले मार्केट की स्थिति का आंकलन करती है। उसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण परंपरागत फसलों की खेती की बजाय उन फसलों की खेती की तरफ तेजी से जा रहा है जहां मुनाफा ज्यादा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि किसानों का बागवानी के प्रति दृष्टिकोण बढ़ा है। जिले में 800 किसान मशरूम की खेती के साथ जुडकऱ वर्ष में 2 बार इसका उत्पादन करते हैं। एक प्रकार से मशरूम की खेती किसानों को रास आ रही है व अब यह खेती व्यवसाय के रूप में उभर रही है। शायद इसलिए इसकी खेती की लोकप्रियता दिन प्रति दिन बढ़ रही है।
बटन मशरूम की खेती की तरफ तेजी से बढ़ता किसानों का रूझान एक प्रकार से फसल विविधिकरण की तरफ संकेत करता है। मशरूम उत्पादन में राज्य सरकार की योजनाएं भी उनके लिए सहयोगी साबित हो रही हैं। जिले में अनेको ऐसे किसान है जो सरकारी योजनाओं से प्रभावित होकर भी मशरूम की खेती के साथ जुड़े हैं। इसी कड़ी में उझा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में सप्ताह भर का नि:शुल्क मशरूम का प्रशिक्षण किसानों को देकर उन्हे आधुनिक खेती के साथ जोड़ रहा है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि राज्य सरकार ने मशरूम उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इन योजनाएं से किसानों को सीधे तौर पर लाभ हो रहा है। अनुसूचित जाति स्कीम योजना के तहत इस श्रेणी के लोग 85 प्रतिशत की दर से 100 ट्रे पर 25500/ रुपये अनुदान राशि का लाभ ले सकते हैं। कम लागत वाली झोपड़ी में सरकार की तरफ से अनुदान का प्रावधान है। इसमें भी आवेदक 85 प्रतिशत की दर से 25500/-रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से लाभ ले सकते हैं।
         एकीकृत बागवानी विकास योजना के तहत भी मशरूम की खेती करने वाले किसान 50 प्रतिशत की दर से 150 रुपये प्रति ट्रे के लिए अधिकत 100 ट्रे तक इसका लाभ ले सकते हैं। इस योजना के तहत मशरूम की कम लागत वाली झोपड़ी में 75 प्रतिशत की दर से 22500 रुपये प्रति यूनिट अनुदान राशि निर्धारित की गई है। इन योजनाओं का लाभ  पाने के लिए किसान  वेबसाईट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
     जिला बागवानी अधिकारी अजय कहते हैं कि पानीपत ,समालखा, इसराना, मतलौडा, बापौली में कुल 96 हजार ट्रे में 800 के क रीब किसान वर्ष में 2 बार मशरूम की खेती करते हैं। ज्यादातर किसान गर्मी-सर्दी दोनों मौसमों में इसकी खेती करते हैं। गर्मी के मौसम में मशरूम के ज्यादा उत्पादन की संभावना रहती है।
    बागवानी अधिकारी अजय ने बताया कि प्रति वर्ष 24 टन मशरूम का उत्पादन यहां के किसान करते हैं। बाजार में बटन मशरूम का दाम आमतौर पर 80 से 90 रुपये प्रति किलो मिलता है तो 19 करोड़ के आस पास संभावित बिजनेश आसानी से प्राप्त हो जाता है।  
      इसी कड़ी में बहुत से किसान पूरी तरह से वातानुकूलित यूनिटों के माध्यम से मशरूम का उत्पादन करते हैं। जिले में 90 हजार ट्रे में बटन मशरूम की खेती होती है जिसका उत्पादन 225 टन हैं। जिसे अगर उन्हें 150 से 175 रुपये किलों के हिसाब से संभावित दाम मिलते हैं तो उन्हें 3 करोड़ से ज्यादा संभावित बिजनेश आसानी से मिल जाता है।
    बागवानी अधिकारी के अनुसार कुल उत्पादन का खर्च निकाल कर देखें तो यहा के किसान प्रति वर्ष 17 से 18 करोड़ का बिजनेश बटन मशरूम उत्पादन से ले लेते हैं। जिस प्रकार से किसानों की दिलचस्पी इस खेती की तरफ बढ़ रही है उसे देखते हुए इस बात का आंकलन किया जा सकता है की आने  वाले समय में किसानों का खेती में ओर बदलाव करने की स्थिति में आ सकता है।

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