Tuesday, February 10, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा जनरल बिपिन सिंह रावत की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at December 8, 2023 Tags: , , , ,

– जनरल बिपिन सिंह रावत भारत की तीनों सेनाओं के पहले (रक्षा प्रमुख) चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) रहे.

– भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में जनरल बिपिन सिंह रावत का योगदान अभूतपूर्व रहा: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 08 दिसम्बर.    एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाइयों द्वारा भारत माता के वीर सपूत जनरल बिपिन सिंह रावत की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और देश के लिए उनके द्वारा की गई सेवाओं को याद किया गया । (SD PG College Panipat paid a heartfelt tribute to General Bipin Singh Rawat on his death anniversary) कॉलेज में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो प्रवीन आर खेरडे और एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ मिलकर जनरल बिपिन रावत के चित्र पर पुष्प अर्पित किये और उन्हें नम आँखों से याद किया । इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत वीर के प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई । विदित रहे कि देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन सिंह रावत का पिछले वर्ष 8 दिसंबर को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया था । जनरल बिपिन रावत के साथ उनकी पत्नी मधुलिका और भारतीय सेना के 11 और अफसरों की भी इस भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी । देश के पहले सीडीएस के तौर पर सीमाओं की सुरक्षा के लिए जनरल बिपिन रावत द्वारा लिए गए साहसी फैसलों और सशस्त्र बलों के मनोबल को हमेशा ऊंचा रखने में उनके द्वारा दिए गए योगदान को देश हमेशा याद रखेगा ।प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि दिवंगत जनरल बिपिन रावत को उनकी पहली पुण्यतिथि पर आज पूरा देश मन, हृदय और आत्मा से नमन कर रहा है । कश्मीर में अपनी तैनाती के समय उग्रवादियों के खिलाफ उनके कड़े रवैये के लिए भी देश में उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा । देश की सेना में सेवा करने वाले बलिदानी लोगों से भरे उत्तराखंड में जनरल बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को पौड़ी में हुआ था । वह पौड़ी जिले के साइना गांव के निवासी थे । उनका पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ, जिसका भारतीय सेना में सेवा करने का एक लंबा इतिहास है । इनके पिता लक्ष्मण सिंह राजपूत लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए और उनकी माता उत्तरकाशी जिले से थीं और उत्तरकाशी विधान सभा से विधायक रह चुके किशन सिंह परमार की पुत्री थीं । वे भारत के पहले रक्षा प्रमुख या चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) रहे । इससे पहले उन्होंने भारतीय थल सेनाध्यक्ष के पद को भी सुशोभित किया ।डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि जनरल रावत की शुरुआती शिक्षा देहरादून के कैंबरीन हाई स्कूल और शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई । इसके बाद इन्होने खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश पाया । इसके बाद रावत ने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से प्रथम श्रेणी में स्नातक की उपाधि प्राप्त कि और यहाँ उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए  सोर्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया ।  रावत ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से भी स्नातक की शिक्षा ली और फ़ोर्ट लीवनवर्थ कन्सा स्थित यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज से 1997 में उपाधि ग्रहण की । बाद में रावत ने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन विषय में एम.फिल. की उपाधि एवं प्रबन्धन एवं कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया । वर्ष 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से जनरल रावत को सैन्य मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में शोध के लिए पीएचडी की मानद उपाधि दी गयी ।डॉ एस के वर्मा ने कहा कि जनरल रावत ने ग्यारहवीं गोरखा राइफल की पांचवी बटालियन से 1978 में अपने करियर की शुरुआत की । उन्होंने जनवरी 1979 में सेना में मिजोरम में प्रथम नियुक्ति पाई । नेफा  इलाके में तैनाती के दौरान उन्होंने ही अपनी बटालियन की अगुवाई की थी । वे कांगो में संयुक्त राष्ट्र की पीस-कीपिंग फोर्स में भी प्रमुख रूप से शामिल रहे । उन्होनें 01 सितंबर 2016 को सेना के उप-प्रमुख का पद संभाला और फिर 31 दिसंबर 2016 को सेना प्रमुख का पदभार । राष्ट्र के पहले रक्षा प्रमुख का पद भी जनरल रावत ने निष्ठा के साथ संभाला ।

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