बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अस्पतालों में हर जरूरी स्थान पर लगें सीसीटीवी कैमरे
गलत घटनाओं का बच्चों के मन पर लंबे समय तक रहता है असर, संवेदनशीलता से करें मामलों की सुनवाई: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
बाल श्रम, भिक्षावृत्ति और घर से बग़ैर सूचना के भागने वाले बच्चों के पुनर्वास और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
महिला मरीज के साथ अस्पताल में हर समय रहे नर्स, बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश
BOL PANIPAT , 21 अगस्त। बाल कल्याण समिति के कार्यों एवं लंबित मामलों की समीक्षा को लेकर उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला सचिवालय के कॉफ्रेंस हॉल में बैठक आयोजित की गई। बैठक में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास, शिक्षा तथा उनके अधिकारों से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने संबंधित अधिकारियों को बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण या गलत घटना का प्रभाव उनके मानसिक विकास पर लंबे समय तक रह सकता है। इसलिए ऐसे बच्चों को केवल कानूनी सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, उचित परामर्श, स्वास्थ्य,शिक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध करवाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में कार्रवाई में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर हर आवश्यक स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाना जरूरी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो और कैमरों की नियमित निगरानी भी की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि महिला मरीज के साथ आवश्यकता के अनुसार एक नर्स की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीज को किसी प्रकार की असुविधा या असुरक्षा का सामना न करना पड़े।
बैठक में बाल कल्याण समिति द्वारा अन्य प्रकरणों पर चर्चा हुई। समिति द्वारा बच्चों को उनके माता-पिता अथवा अभिभावकों को सौंपने, बाल देखभाल संस्थानों में भेजने तथा जरूरत के अनुसार पुनर्वास की कार्रवाई की गई। बैठक में बताया गया कि कुछ मामलों में बच्चों को जिला बाल संरक्षण व्यवस्था के तहत सुरक्षित स्थान उपलब्ध करवाया गया है। पॉक्सो मामलों में प्रभावित बच्चों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सहायता देने की कार्रवाई भी की गई। वहीं, अन्य जिलों से संबंधित बच्चों के मामलों को संबंधित बाल कल्याण समितियों को स्थानांतरित किया गया।
उपायुक्त ने बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों से मजदूरी करवाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों को केवल वहां से हटाकर छोडऩे के बजाय उनके परिवार, शिक्षा और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
उपायुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान होना चाहिए, ताकि जरूरतमंद बच्चे तक समय पर सहायता पहुंच सके। बैठक में अधिकारियों को पॉक्सो जागरूकता सेमिनार, जागरूकता शिविर तथा बाल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ अभिभावकों और समाज को भी बाल सुरक्षा के प्रति सजग करना जरूरी है।
जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष केदारदत्त शर्मा ने उपायुक्त को आश्वस्त किया कि बाल कल्याण पुनर्वास एवं संरक्षण को लेकर बच्चों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। केदार दत्त ने जुवेनाइल पुलिस की नियमित रूप से ट्रेनिंग और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सुझाव भी दिये जिस पर उपायुक्त ने डीएसपी नवीन संधू को इसको लेकर निर्देश भी दिए। इस अवसर पर सीईओ जिला परिषद डॉ किरण, निगम संयुक्त आयुक्त मनी त्यागी, डिप्टी डीईओ सुनीता कादयान, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष केदार दत, जिला प्रोटेक्शन अधिकारी रजनी गुप्ता, जिला संरक्षण अधिकारी निधि, जिला बाल कल्याण अधिकारी रितु और बाल कल्याण समिति सदस्य मीना कुमारी और विक्रम तथा संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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