Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने भारतीय संविधान दिवस पूज्यभाव के साथ मनाया   

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at November 25, 2023 Tags: , , , , ,

कार्यकर्ताओं ने संविधान में आस्था एवं इसके अनुरूप चलने एवं समग्र प्रयास करने की उठाई शपथ

प्रत्येक भारतीय को भारतीय संविधान एक बार अवश्य पढना चाहिए: डॉ जसबीर सिंह भारत, हिंदी विभाग सीडीएलयू सिरसा    

BOL PANIPAT , 25 नवम्बर.    

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एन.एस.एस. यूनिटस के तत्वाधान में भारतीय संविधान दिवस पूरे सम्मान और पूज्यभाव के साथ मनाया गया । कॉलेज में आयोजित सेमीनार में बतौर मुख्य वक्ता चौधरी देवीलाल विश्वविधालय सिरसा के हिंदी विभाग से डॉ जसबीर सिंह भारत अस्सिस्टेंट प्रोफेसर ने शिरकत की और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें संविधान के महत्त्व, विशेषताओं एवं इसकी उपयोगिता पर सन्देश दिया । मुख्य वक्ता का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज एन.एस.एस. प्रभारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ एसके वर्मा ने किया । सेमीनार का उद्देश्य छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को भारतीय संविधान के बारे में जानकारी देना तथा उन्हें उनके अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना था जिन्हें अकसर नागरिक याद नहीं रखते है । सेमिनार के अंत में सभी को भारतीय संविधान तथा राष्ट्रीय एकता और अखंडता की शपथ प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिलाई ।

      डॉ जसबीर सिंह भारत ने कहा कि भारतीय संविधान अपने आप में बेजौड़ एवं अद्भुत है और प्रत्येक भारतीय को इसे एक बार अवश्य पढना चाहिए । इससे न सिर्फ उन्हें अपने कर्तव्यों और अधिकारों को जानने का अवसर मिलेगा बल्कि अपने जीवन की हर समस्या का समाधान भी वे कर पायेंगे । हर व्यक्ति प्रथम और अंतिम रूप से केवल और केवल भारतीय है । संविधान निर्माता बाबा भीम राव अम्बेडकर को याद करते हुए उन्होनें कहा कि संविधान साध्य है, यह लचीला है पर साथ ही यह इतना मजबूत भी है कि देश को शान्ति और युद्ध दोनों समय जोड़ कर रख सके । उन्होनें संविधान को प्रत्येक नागरिक का मार्गदर्शक बताया । संविधान हमें बताता है कि बतौर नागरिक हमें कैसा व्यवहार एवं आचरण करना है और कैसा नहीं । संविधान में सरकार के अधिकार, उसके कर्तव्य और नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य को विस्तार से बताया गया है । संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कतिपय एकात्‍मक विशिष्‍टताओं सहित संघीय हो ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार भारत एक सम्प्रुभता सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य है । उन्होनें संविधान के निर्माण की प्रक्रिया, इसकी प्रस्तावना, इसके महत्व और संविधान में संशोधन की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होनें कहा की संविधान भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ । भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है । संविधान को पूरी तरह संशोधित करने का अधिकार संसद के पास है परन्तु किसी भी गैर-कानूनी संशोधन के आंकलन पर सर्वोच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है । विवाद की स्थिति में संविधान की प्रस्तावना में निहित भाव और गुण देश के लोकतांत्रिक ढाँचे को बचाने का काम करता है । यही हमारे संविधान की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती है । संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है और इसी कारण भारतीय संविधान की प्रस्तावना विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है । प्रस्तावना के नाम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य, उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है । प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है । इसी कारण यह हम भारत के लोग वाक्य से प्रारम्भ होता है । इस अवसर पर उन्होनें भारतीय संविधान की प्रस्तावना को छात्र-छात्राओं को पढकर सुनाया । उन्होनें कहा कि भारतीय संविधान के चार प्रमुख ध्येय हैं- न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं भ्रातृत्व ।

डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना यह बताती है कि संविधान जनता के लिए हैं तथा जनता ही अंतिम सम्प्रभु है । यह लोगों के लक्ष्यों-आकांक्षाओं को प्रकट करती है और इसका प्रयोग किसी अनुच्छेद में विद्यमान अस्पष्टता को दूर करने में किया जाता है । उन्हें भारतीय संविधान पर गर्व है ।  

      इस अवसर पर कॉलेज के समस्त स्टाफ सदस्य डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला आदि मौजूद रहे.             

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