एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स ने विश्व रक्तदाता दिवस को लोगों में जागरूकता पैदा करने के भाव के साथ मनाया
विश्व रक्तदाता दिवस 2023 का थीम है ‘रक्त दो, प्लाज्मा दो, जीवन बांटो, बार-बार बांटो’
रक्तदान वह महानतम दान है जिससे किसी को भी नया जीवन मिल सकता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 14 जून:
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस इकाइयों ने विश्व रक्तदाता दिवस को लोगों में जागरूकता पैदा करने के भाव के साथ मनाया और समाज के हर वर्ग को रक्तदान करने और लोगों में मानवता के भाव को पैदा करने के लिए उन्हें प्रेरित किया. कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत डॉ अनुपम अरोड़ा ने की. उनके साथ एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ एसके वर्मा, प्रो मनोज कुमार ने एनएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधन कर उनका हौंसला बढ़ाया. विदित रहे कि रक्तदान को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है. रक्तदान एक त्वरित और दर्द रहित क्रिया है जो अनेक जीवन बचा सकती है. विश्व रक्तदाता दिवस का लक्ष्य सभी को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि अधिक से अधिक लोगों को समय पर खून मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके. प्राचार्य ने लगभग 100 एनएसएस कार्यकर्ताओं को रक्तदान के प्रति ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने की शपथ भी दिलाई.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि विश्व रक्तदाता दिवस 2023 ‘रक्त दो, प्लाज्मा दो, जीवन बांटो, बार-बार बांटो’ के नारे के तहत मनाया जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इस वर्ष की थीम का जोर जीवन बचाने के लिए प्लाज्मा और रक्त देने के विचार का व्यापक प्रसार करना है. 2023 में विश्व रक्तदाता दिवस की थीम जीवन बचाने में आम लोगों के महत्व पर बल देती है. विश्व रक्तदाता दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल एक नई थीम जारी करता है और विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित किए जाने वाले उत्सव और कार्यक्रम उस ही विषय पर केंद्रित रहते है. युक्रेन युद्ध, बढ़ती दुर्घटनाओं और बीमारियों ने खून की मांग को बहुत बढ़ा दिया है. अब ये दायित्व युवाओं पर है कि वे अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के विधी में जागृत करें और रक्तदान से जुड़े मिथकों का निवारण करें. कॉलेज इसीलिए प्रत्येक वर्ष रक्दान शिविर का आयोजन करता है ताकि कॉलेज में पढने वालें युवा रक्तदान के महत्व को जान सकें. रक्तदान वह महानतम दान है जिससे किसी को भी नया जीवन मिल सकता है. रक्दान करने वाला व्यक्ति ईश्वर तुल्य गुणों से संपन्न हो जाता है.
डॉ राकेश गर्ग एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि दुनिया भर में जीवन बचाने में रक्तदान की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है. अधिकांश स्वास्थ्य जटिलताओं में रक्त की आवश्यकता सबसे पहले पड़ती हैं. जीवन को बचाने, रोगी की सर्जरी में मदद, कैंसर के उपचार, पुरानी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खतरों के लिए रक्दान अत्यधिक आवश्यक है. उन्होनें कहा कि साल में एक से ज्यादा बार रक्तदान करना भी सुरक्षित है. रक्त का किसी लेबोरेटरी या फैक्ट्री में निर्माण नहीं किया जा सकता है. यह केवल और केवल दाताओं से ही आ सकता है. भारत में हर 2 सेकेंड में रक्तदान की जरूरत होती है और एक यूनिट रक्त से 3 लोगों की जान बचाई जा सकती है.
डॉ एसके वर्मा ने कहा कि चिकित्सक रिचर्ड लोअर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जानवरों के बीच रक्त का सफलतापूर्वक आधान किया. बाद में कार्ल लैंडस्टीनर नामक अमेरिकी जीव-विज्ञानी, चिकित्सक और इम्यूनोलॉजिस्ट ने दाताओं को निर्धारित करने के लिए ‘एबीओ’ मानव रक्त प्रकार की प्रणाली की खोज की. जल्द ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में रक्ताधान एक सामान्य विषय बन गया. रक्त दाता दिवस पहली बार मई 2005 में 58वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में शुरू किया गया और हम आज इसे कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 14 जून को मनाते है.

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