एनएसएस स्वयंसेवक नियमित गतिविधियों और विशेष शिविरों के माध्यम से समाज को करता है सशक्त: डॉ राकेश गर्ग
एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का छठा दिन
जीवन को बोझ नहीं, बल्कि एक उत्सव बनाना ही सबसे बड़ी कला है: सुरेन्द्र गोयल
संयमित और अनुशासित जीवन शैली एड्स से बचने का कारगर उपाय: सुदेश, प्रोजेक्ट मैनेजर
BOL PANIPAT , 19 मार्च: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप के छठे दिन के पहले सत्र में सुरेन्द्र गोयल पूर्व सीनियर मैनेजर सेफ्टी नेशनल फ़र्टिलाइज़र लिमिटेड पानीपत एवं आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रशिक्षक और रविन्द्र कुमार ने ‘जीवन जीने की कला’ और डॉ राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने ‘एनएसएस के कार्य और दायित्व’’ विषयों पर जानदार ज्ञान स्वयंसेवकों को दिया । दोपहर के सत्र में सुश्री सुदेश प्रोजेक्ट मैनेजर रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने ‘एचआईवी एड्स और इससे बचाव’, गुरप्रीत कौर आउटसोर्स वर्कर और अंजू ईआईसी कौंसलर ने अपने व्याख्यानों से स्वयंसेवकों को लाभान्वित किया । इस अवसर पर छात्र-छात्राओं की एचआईवी एड्स जांचने के लिए रक्त की निशुल्क जांच की गयी । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पौधे-रोपित गमलें भेंट करके किया । दिन की विधिवत शुरुआत ध्यान और योग शिविर से शुरू हुई । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । स्वयंसेवकों ने सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ खटिक बस्ती में जाकर वहां के लोगों की समस्याएं सुनी और उनका संभव निदान किया । प्राचार्य ने सभी स्वयंसेवकों को हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 की बधाई और मंगलकामनाएं संप्रेषित की और उन्हें हिन्दू कैलंडर के महत्त्व से अवगत कराया ।
सुरेन्द्र गोयल पूर्व सीनियर मैनेजर सेफ्टी नेशनल फ़र्टिलाइज़र लिमिटेड एवं आर्ट ऑफ़ लिविंग प्रशिक्षक ने कहा कि जीवन जीने की कला अर्थात आर्ट ऑफ़ लिविंग का अर्थ है, तनावमुक्त, सकारात्मक, संतुलित और आनंदपूर्ण जीवन जीना । यह केवल सांस लेना नहीं, बल्कि हर पल का उत्सव मनाना, वर्तमान में जीना और हर विपरीत परिस्थिति में धैर्य, प्रेम व मुस्कान के साथ जीना है । जीवन जीने की कला के मुख्य स्तंभ है अतीत के पछतावे से निकलना और भविष्य की चिंता को छोड़ना । हमें आज और अभी को को पूरी सार्थकता के साथ जीना चाहिए । व्यक्ति को हर स्थिति में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए और खुद को जैसा भी हो स्वीकार करना सीखना चाहिए । आज के इंसान की इच्छाएं बहुत हो गयी है और इच्छाओं के पीछे भागने के बजाय, हमें जो हमारे पास है उसमें संतोष ढूँढना चाहिए । योग, ध्यान और सांस लेने की तकनीकों को सिखने से मन शांत रहता है । दूसरों को क्षमा करना और लोगों को वैसे ही स्वीकार करना आना जैसे वे है हमारी आंतरिक शांति की कुंजी है । हमें ईश्वर से जो मिला है उसके लिए ईश्वर और प्रकृति का आभार करना सीखे । स्वस्थ भोजन और अच्छी दिनचर्या का पालन भी जीवन जीने की कला का हिस्सा है । हमारा दिमाग हमारे शरीर का हार्डवेयर है तो मन उसका सॉफ्टवेयर जीवन को बोझ नहीं, बल्कि एक उत्सव बनाना ही सबसे बड़ी कला है ।
सुदेश प्रोजेक्ट मैनेजर रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत ने बताया कि उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (एड्स) मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (एचआईवी) संक्रमण के बाद की स्थिति है जिसमें मानव अपने प्राकृतिक प्रतिरक्षण क्षमता खो देता है । एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है पर एड्स से पीड़ित मानव शरीर संक्रामक बीमारियों जो कि जीवाणु और विषाणु आदि से होती हैं के प्रति अपनी प्राकृतिक प्रतिरोधी शक्ति खो बैठता है क्योंकि एचआईवी (वह वायरस जिससे कि एड्स होता है) रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका एवं कोशो पर आक्रमण करता है । एड्स पीड़ित के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर क्षय रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं । एच.आई.वी. संक्रमण को एड्स की स्थिति तक पहुंचने में 8 से 10 वर्ष या इससे भी अधिक समय लग सकता है । एचआईवी से ग्रस्त व्यक्ति अनेक वर्षों तक बिना किसी विशेष लक्षणों के बिना रह सकते हैं । एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है यानी कि यह एक महामारी है । एड्स के संक्रमण के तीन मुख्य कारण हैं, असुरक्षित यौन संबंधो, रक्त के आदान-प्रदान तथा माँ से शिशु में संक्रमण द्वारा । 1981 में एड्स की खोज से अब तक इससे लगभग 30 करोड़ लोग जान गंवा बैठे हैं । संयमित और अनुशासित जीवन शैली अपना कर हम इस बिमारी से बच सकते है । किसी को भी यदि एड्स से सम्बंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो वाल टोल फ्री नंबर 1097 पर कॉल कर सकता है ।
रविन्द्र कुमार ने जीवन जीने की कला को पाँच सिद्धांतों में बाँट कर समझाया पर आधारित है । उन्होनें कहा कि जीवन के विपरीत मूल्य एक दूसरे के पूरक होते हैं । लोगों और परिस्थितियों को वैसे ही स्वीकार करें जैसे वे हैं । हमें दूसरों की राय को अपना मोहरा नहीं बनाना चाहिए और दूसरों की गलतियों के पीछे छिपे इरादों को नहीं देखना चाहिए । वर्तमान में जीना सबसे अच्छी आदत है ।
गुरप्रीत कौर ने कहा कि आउटसोर्स वर्कर के तौर पर वे विविध सामाजिक और समाज हित के कार्यों को अंजाम दे रही है जिसमें वे विशिष्ट कार्यों को अनुबंधित आधार पर बाहरी एजेंसी के माध्यम से पूर्ण करते हैं । इन कार्यों में डेटा एंट्री, ग्राहक, आईटी सेवाएँ, अकाउंटिंग, मार्केटिंग, सफाई, और प्रशासनिक कार्य आदि शामिल हैं । एन एस एस स्वयंसेवकों को उनके अनुभव से अवश्य लाभ मिलेगा ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि एनएसएस में रक्तदान शिविर, साक्षरता अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मतदाता जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता, गाँवों या मलिन बस्तियों को गोद लेकर वहां स्वास्थ्य, शिक्षा, और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए श्रमदान करना आदि गतिविधियाँ शानिल है ।
डॉ राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों में सामुदायिक सेवा की भावना विकसित करना और ‘पहले आप नहीं, पहले हम’ (नॉट मी बट यू) के सिद्धांत के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है । यह पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवकों के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य करता है ।

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