एस डी (पीजी) कॉलेज पानीपत में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर ‘हमारी शक्ति-हमारा ग्रह ’ थीम – 2025 पर आयोजित किये गए विविध कार्यक्रम
–संगोष्ठी एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का किया गया आयोजन
–प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बनाई हृदयस्पर्शी पेटिंग्स
–पृथ्वी को बचाने की ताक़त हमारे अपने हाथों में ही है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 22 अप्रैल : एस डी (पीजी) कॉलेज पानीपत के लाइफ साइंस विभाग की पर्यावरण बचाओ समिति द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस – 2025 के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ एक विमर्श कार्यक्रम रखने के साथ ही पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के दौरान कॉलेज के विद्यार्थियों सहित स्टाफ के सदस्य भी उपस्थित रहे। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में कॉलेज के विज्ञान संकाय, वाणिज्य संकाय एवं कला संकाय के 100 से ज्यादा विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सर्व प्रथम उपस्थित श्रोता समूह को सम्बोधित किया।
अर्थ डे को मनाने की शुरुआत 1970 में हुई थी । सबसे पहले अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण की शिक्षा के तौर पर इस दिन की शुरुआत की क्यूंकि एक साल पहले कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव की वजह से भयंकर त्रासदी घटित हुई थी । इस हादसे में कई लोगों की जाने गई थी । तब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने का फैसला लिया गया था । नेल्सन के आह्वान पर 22 अप्रैल को लगभग दो करोड़ अमेरिकियों ने पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में हिस्सा लेकर दुनिया को यह सन्देश दिया था कि सबसे बेहतर निवेश पर्यावरण और धरती पर होना चाहिए ।
विदित रहे कि विश्व पृथ्वी दिवस – 2025 का थीम हमारी शक्ति – हमारा ग्रह है । इस थीम का मतलब है कि धरती को बचाने की ताकत हमारे ही हाथों में है। इस थीम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा को तीन गुना तक बढ़ाना है । हमारी वैश्विक बिजली खपत जल्द ही कम होने वाली नहीं है; वास्तव में, जैसे-जैसे आबादी और अर्थव्यवस्थाएं बढ़ेंगी, वैसे-वैसे हमारी ऊर्जा खपत भी बढ़ेगी। पुराने ज़माने के जीवाश्म ईंधन से मांग को पूरा करने की कोशिश न केवल अस्थाई है क्योंकि वे सीमित संसाधन हैं और अंततः समाप्त हो जाएँगे – बल्कि यह मानव और ग्रह के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद हानिकारक है। जीवाश्म ईंधन खतरनाक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्राथमिक स्रोत हैं, जो सीधे ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करते हैं और व्यापक पर्यावरणीय गिरावट का कारण बनते हैं। वे श्वसन संबंधी समस्याओं से लेकर कैंसर तक, गंभीर मानव स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़े हैं। इसके विपरीत, नवीकरणीय ऊर्जा एक गेम-चेंजर है जो सस्ती और अधिक टिकाऊ बिजली प्रदान कर सकती है, जलवायु परिवर्तन का कारण नहीं बनती है, और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
दिनेश गोयल कॉलेज प्रधान ने अपने सन्देश में कहा कि धरती पर जीवन संभव इसलिए हुआ है क्योंकि इस ग्रह पर जल उपलब्ध है । लेकिन आज के लालची मानव ने पानी के अत्यधिक दोहन से धरती के इस गुण पर सवालिया निशान लगा दिया है । पर्यावरण को नुकसान पहुँचने कि दृष्टि से अपने भारत देश का भविष्य बेहतर नजर नहीं आ रहा है। यदि हम आज भी न चेते तो विनाश निश्चित है । पर्यावरण को बचाने के उपायों को सुझाते हुए उन्होनें कहा कि हमें पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए । प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग एवं उपभोग जरुरत के हिसाब से करना चाहिए, कम प्लास्टिक खरीदनी चाहिए और लंबे समय तक चलने वाले प्रकाश बल्बों का प्रयोग करना चाहिए । ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी हमें कम करना होगा । अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाकर हम ऊर्जा बचाने, हवा को साफ करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे कार्य सरलता के साथ कर सकते है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा – इस धरती को बचाना हमारे अपने हाथों में ही है अगर हम सब मिलकर छोटी-छोटी आदतें बदल लें जैसे प्लास्टिक की जगह कपड़े के बैग इस्तेमाल करना, बिजली-पानी की बचत करना, ज्यादा पेड़ लगाना,तो धरती को काफी हद तक सुरक्षित किया जा सकता है।हम सब मिलकर एक ऐसा भविष्य बना सकते हैं जहाँ प्राकृतिक दुनिया सुरक्षित और संरक्षित हो। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हम सब एक साथ पृथ्वी की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार हैं। आइए हम सब मिलकर एक ऐसा भविष्य बनाएं जहाँ सभी जीवित प्राणियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित ग्रह हो।
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पर्यावरण बचाने की सोच को पोस्टर पर उकेरते हुए देखना एक सुखद अहसास था। विद्यार्थियों द्वारा बनाये गए पोस्टर में ये सन्देश स्पष्ट रूप से निकल कर आया कि पर्यावरण को बचाना हमारे लिए अत्यंत जरुरी है। अगर हमें इस पृथ्वी पर अपने जीवन को सुलभ बनाना है, तो हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। अगर हमारे चारों ओर का वातावरण स्वच्छ होगा तो इस पृथ्वी पर हमारा जीवन भी सुचारु रूप से चलेगा । विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेते हुए देखकर ऐसा प्रतीत हुआ और एक विश्वास भी बना कि अगर हम सभी देशवासी बच्चे, युवा एवं वृद्ध अगर कोशिश करेंगे तो अपनी जीवनदायिनी पृथ्वी माँ को बचाने में सफल हो सकते हैं
इस अवसर पर प्रोफेसर राकेश कुमार सिंगला, प्रोफेसर प्रवीण आर. खेरडे, प्रोफेसर मयंक अरोड़ा, प्रोफेसर प्रवीण कुमारी, प्रोफेसर बलजिंदर सिंह, प्रोफेसर प्रियंका चांदना, डॉ रेखा, प्रोफेसर रिया, प्रोफेसर अंशु, दीपक मित्तल इत्यादि भी उपस्थित रहे।

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