वीर बाल दिवस पर आई.बी.एल. पब्लिक स्कूल में श्री जपु जी का पाठ किया.
BOL PANIPAT : आई.बी.एल पब्लिक स्कूल में वीर बाल दिवस पर अनूठी पहल की गई। जिसमें बाबा जोध सचियार गुरु द्वारा से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप दर्शनाथ प्रतिष्ठित किया गया तथा श्री जपु जी का पाठ किया तथा गुरु गोविंद सिंह जी के शौर्य तथा उनके साहबज़ादों की शहादत का विस्तृत ब्यौरा बच्चों को बताया गया। स्कूल अध्यापिका जसविंदर कौर ने भी बच्चों को वीर बाल दिवस की महत्ता को कविता के माध्यम से बताया। स्कूल के बच्चों द्वारा शब्द कीर्तन किया गया तथा छोटे-छोटे बच्चों द्वारा शहीदों की शहादत पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। जिसे देखकर वहाँ पर बैठे सभी की ऑंखें नम हो गई । आए हुए मुख्य अतिथियों ने, गुरु ग्रंथ साहिब पर रूमाला चढ़ाया तथा गुरु गोविंद सिंह, उनकी माता तथा उनके साहबजादों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस दिवस पर शहर के जाने-माने उद्योगपति एवं समाजसेवी सरदार परमजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में, बाबा जोध सचियार गुरुद्वारा के सचिव सरदार जसपाल सिंह , स्कूल के कार्यकारिणी सदस्य एल. एन. मिगलानी, प्रबंधक युधिष्ठिर मिगलानी उपस्थित रहे। स्कूल के कार्यकारिणी सदस्य एल. एन. मिगलानी , प्रबंधक युधिष्ठिर मिगलानी , प्रधानाचार्य जय श्री गर्ग व प्रशासनिक अधिकारी गोविंद कालड़ा ने मुख्य अतिथि परमजीत सिंह तथा गुरुद्वारा सचिव जसपाल सिंह को दुशाला तथा पौधा भेंट कर धन्यवाद व्यक्त किया।
जोध सचियार गुरुद्वारा जी की तरफ से, मुख्य अतिथि परमजीत सिंह को, कार्यकारिणी सदस्य एल. एन. मिगलानी , प्रबंधक महोदय युधिष्ठिर मिगलानी , प्रधानाचार्य जयश्री गर्ग, प्रशासनिक अधिकारी गोबिंद कालड़ा, उप-प्रधानाचार्य मीना तनेजा, अध्यापिका जसविंद्र कौर व शालू छाबड़ा को गुरु घर की बख्शीश से नवाजा गया इसके बाद बच्चों और स्टाफ में प्रसाद वितरित किया गया।
प्रधानाचार्या जयश्री गर्ग ने आए हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहबज़ादा बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेहसिंह की शहादत की पुण्य स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 9 जनवरी सन 2022 को गुरु गोबिंदसिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी। यह तारीख छोटे साहबज़ादों के बलिदान को चिह्नित करने के लिए चुनी गई थी। आई. बी. एल स्कूल के इस प्रयास को सभी द्वारा सराहा गया।

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