आधुनिक जीवन में संत काव्य की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
BOL PANIPAT : स्थानीय आईबी.(पी.जी.) महाविद्यालय में हिंदी विभाग के तत्वावधान में डॉ. सुनीता ढांडा के निर्देशन में संगोष्ठी का आयोजन किया गया | इस संगोष्ठी का विषय “आधुनिक जीवन में संत काव्य की प्रासंगिकता” रहा | प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्ययुग में संतों की वाणी ने जो अलख जगाया वह आज भी उतना ही महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक है | मध्यकालीन विकृतियों, असंगतियों रूढ़ियों एवं अंधविश्वास से आज भी हमारा समाज मुक्त नहीं हो पाया है | जात-पात, छूआछूत, सांप्रदायिकता, अशिक्षा, गरीबी जैसी विषमताएं जड़ जमाए बैठी हैं | जिन मानवीय मूल्यों की स्थापना हेतु संत जीवन भर संघर्षरत रहे, उस संघर्ष की लौ को फिर से जीवित रखने की आवश्यकता आ पड़ी है | विभागाध्यक्षा डॉ. शशि प्रभा ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में जगत में भौतिक सुविधाएं, सुख-वैभव आदि में वृद्धि अवश्य हुई है, किन्तु मानव समाज में विसंगतियाँ आज भी मौजूद हैं | संतों ने अपने युग की जिन-जिन में विसंगतियों पर व्यंग्य किया था, वह आज के आधुनिक युग में उतनी ही प्रासंगिक प्रतीत होती है | कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनीता ढांडा ने अपने वक्तव्य में बताया संसार में मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठापना हेतु जिन-जिन संतों ने अपने जीवन काल में मानव हित के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनकी प्रासंगिकता प्रत्येक युग में ज्यों की त्यों बनी रहती है और तब तक बनी रहेगी जब तक मनुष्य का अस्तित्व कायम रहेगा | मानवतावाद ही एक ऐसा मुख्य साधन है जो एक ऐसे समाज का निर्माण करता है जिसमें समता, सदाचार तथा नैतिकता की नींव कायम रहती है | संगोष्ठी में प्रथम स्थान छात्रा पूजा, द्वितीय स्थान सूचिका एवं कुसुम ने एवं तृतीय स्थान छात्र शंकर ने प्राप्त किया | निर्णायक मंडल में डॉ. शशि प्रभा डॉ. अंजलि ने तटस्थ एंव निष्पक्ष भूमिका निभाई |

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