आर्य कॉलेज में शुरू हुआ शोध पत्र लेखन, प्रकाशन व आचार नीति पर दो दिवसीय फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन.
– शोध पत्र में प्लेगरिज्म 10 प्रतिशत से ज्यादा न हो- प्रो. सुमनजीत सिंह
BOL PANIPAT :- 28 जनवरी 2025, आर्य पीजी कॉलेज के रिसर्च एवं डेवलमेंट सैल व अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शोधपत्र लेखन, प्रकाशन व आचार नीति पर दो दिवसीय फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के प्रो. सुमनजीत सिंह ने शिरकत की। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता व अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सतबीर सिंह, आर एण्ड डी सेल incharge डॉ अनुराधा सिंह, आयोजक सचिव डॉ रजनी शर्मा व आर एण्ड डी सेल समन्वयक प्रो पंकज चौधरी ने मुख्य वक्ता को पौधा दे कर स्वागत किया।
आर्य कॉलेज प्रबंधक समिति के महासचिव सीए कमल किशोर ने अपने शुभ संदेश में कहा कि इस तरह के कार्यक्रम शिक्षकों के साथ-साथ भावी शोधार्थियों के लिए भी बहुत लाभदायक हैं। उन्होंने बताया कि हमारे महाविद्यालय के सभी विभाग समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं। इन कार्यक्रमों से शिक्षक भी नई-नई जानकारियों से रू-ब-रू होते हैँ।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने बताया कि इन कार्यक्रमों से शिक्षकों को शैक्षणिक और शोध कौशल को बेहतर बनाने में तो मदद मिलती ही है साथ ही शिक्षण और सीखाने की गुणवता में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को अनुसंधान करने और सेमिनार,सम्मेलन व कार्यशालाओं में भाग लेने के अवसर मिलते हैं, साथ ही फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों से संस्थानों में शैक्षणिक और बौद्धिक वातावरण बेहतर होता है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने शोध कौशल को निखारकर साक्ष्य-आधारित अनुदेशन रणनीति बना कर विद्यार्थियों में सकारात्मक व आलोचनात्मक सोच को बढावा दे सकते हैं।
वहीं, अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सतबीर सिंह ने कहा की शोध शिक्षण का हीएक मुख्य आंग बन चुका है। इसी को ध्यान मे रखते हुए व कॉलेज में शोध को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।
मुख्य वक्ता प्रो. सुमनजीत ने अपने संबोधन में बताया कि एक अच्छे रिसर्च जर्नल में अपना पेपर पब्लिश करवाने के लिए हमें किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि जब आप किसी रिसर्च जर्नल में अपना शोध पत्र भेजते हो तो वो किन कारणों से रिजेक्ट हो जाता है। उन्होंने शोध पत्र के रिजेक्ट होने वाले चार चरणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि शोध पत्र लिखते समय प्लेगरिज्म का ध्यान अवश्य रखना चाहिए उन्होंने कहा कि किसी शोध पत्र में प्लेगरिज्म 10 से 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने शोध पत्र के संक्षेप, परिचय, साहित्य समीक्षा व शोध प्रक्रियाँ के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
साथ ही आयोजक सचिव डॉ रजनी शर्मा व प्रो पंकज चौधरी ने बताया की शोध पत्र लिखना एक नए ज्ञान से रूबरू कराने का एक प्राथमिक माध्यम है । शोध पत्र लिखने से नई खोज, नई प्रक्रियाए, नवाचार व शिक्षण को नए ढंग से किस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके साथ ही शोध पत्र लिखना प्रोफेशनल विकास के लिए भी जरूरी है।
इस अवसर पर मंच संचालन डॉ. रजनी शर्मा ने किया और साथ ही धन्यवाद नोट प्रो पंकज चौधरी ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कॉलेज की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. अनिल वर्मा, डॉ. गीताजली, डॉ. मधु गाबा, डॉ. सोनिया सोनी, प्राध्यापिका आस्था गुप्ता, डॉ मनीष डुडेजा, अदिति मित्तल, प्रो. पंकज चौधरी, प्राध्यापिका रश्मि गुप्ता, वीनू भाटिया, डॉ. अंजू मलिक, डॉ. गरिमा समेत कॉलेज के अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।

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