Saturday, May 16, 2026
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पानीपत की विरासत ज्ञान की विरासत है: राजीव रंजन  

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 18, 2024 Tags: , , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला’ का दूसरा दिन

BOL PANIPAT , 18 अगस्त. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव – तृतीय पुस्तक मेला’ जो हरियाणा पुलिस की पहल, जिला प्रशासन के सानिध्य और नगर निगम पानीपत, जिला परिवहन विभाग पानीपत, महिला बाल विकास पानीपत, पंचायत विभाग पानीपत, राजभाषा अनुभाग इंडियन आयल पानीपत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा और आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित है के दूसरे दिन बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर सुरेश कुमार डीएसपी ने शिरकत की । कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन आयल के डीजीएमसी सुरेश कुमार ने की । दूसरे दिन का थीम ‘इतिहास में पानीपत और पानीपत का इतिहास’ एवं ‘साहित्य और इतिहास का अंतर्संबंध’’ रहा और इस अवसर पर भारती ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित एवं विश्वास पाटील द्वारा रचित उनके पहले उपन्यास पानीपत  पर परिचर्चा की गई । यह उपन्यास पानीपत के तृतीय युद्ध पर आधारित है जिसमें अहमद शाह अब्दाली से मराठे हार गये थे । परिचर्चा में सभी ने एकमत होकर पाटील के उपन्यास के विषय की सराहना करते हुए उनकी खूबसूरत भाषा और भव्य वर्णनात्मक शैली की जमकर प्रशंसा की । विदित रहे कि केवल दो वर्ष में ही पानीपत की 20 हज़ार से ज्यादा प्रतियाँ बेची गयीं थी । चर्चा में राजीव रंजन जन सम्पर्क अधिकारी , प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ एसके वर्मा, प्रदीप गिरी राजकीय विधालय रकसेडा, संतोष पाटिल बाबा फरीद कॉलेज भटिंडा, राजेश कुमार राजकीय विधालय समालखा, रमेश कुमार राजकीय विधालय शेरा, अनिल और दीपक त्रिपाठी राजकीय विधालय लोहारी, सचिन वत्स राजकीय विधालय किवाना आदि ने हिस्सा लिया जिन्हें राकेश बूरा जिला शिक्षा अधिकारी का सानिध्य प्राप्त रहा । इसके अलावा छात्र दीपांशु, सूरज, अजय और कपिल ने चर्चा में हिस्सा लिया ।

      दूसरे दिन का आकर्षण महोत्सव में पधारे चित्रकार और उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स रही जिनका विषय ‘जीवन की रक्षा होगी, तभी रक्षा बंधन त्यौहार होगा’ रहा । पेंटिंग कैंप में सोनी खन्ना गुरुग्राम, रविन्द्र कौर पंचकूला, अमित कुमार पंचकूला, राजपाल पानीपत, माधुरी गुरुग्राम, नताशा गुरुग्राम, खुशबू शर्मा, अभिलिप्सा सबत, स्वरूप कँवर, दीपांशु त्यागी, सोनम सागर, गुरलीन कौर, विवेक शर्मा और हर्शिखा शाह ने भाग लिया ।             

दूसरी तरफ पुस्तक मेले में देशभर से लगभग 40 प्रकाशकों ने भाग लिया जिसमे नई किताब, आधार प्रकाशन, प्रकाशन संस्थान, राजकमल प्रकाशन, साहित अकादमी, सामयिक प्रकाशन आदि अपनी हज़ारों की संख्या में पुस्तकें प्रदर्शित कर रहे है जिसे लेकर छात्र-छात्राओं और आगुन्तकों में उत्साह नज़र आया । इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की पुस्तक परिक्रमा बस भी कॉलेज प्रांगण में मौजूद रही । पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से सांय 7 बजे तक जारी रहेगा जिसमे पानीपत के प्रत्येक नागरिक का पधारने पर स्वागत है ।

सुरेश कुमार डीएसपी ने पानीपत महोत्सव में आयोजित पुस्तक मेले को बेजौड़ बताया और पानीपत के हर नागरिक को इसमें शामिल होने का आह्वान किया । पुस्तकें इंसान को ज्ञान देने के साथ-साथ मानवीय भी बनाती है । पुस्तकों से बड़ा हमारा कोई मित्र नहीं हो सकता है । हरियाणा में होने वाले विधान सभा चुनावों के मद्देनज़र उन्होनें अपील की कि सभी नारिक सौ प्रतिशत मतदान करे और लोकतंत्र को मजबूत बनाये ।   

राजीव रंजन जन सम्पर्क अधिकारी ने ‘इतिहास में पानीपत और पानीपत का इतिहास’ विषय पर बोलते हुए कहा कि पुस्तक मेला पानीपत की तीसरी लड़ाई की हार के बाद समाज के पुनर्जागरण का द्योतक है । पुस्तक मेला व्यापार का नहीं बल्कि ज्ञान का वाहक है । आधुनिक ज्ञान ने मशीनी मानव अधिक और मनुष्य कम पैदा किये है । इस प्रकार के आयोजनों से समाज में मानवता और मानवीय गुणों का संचार होता है । हरियाणा प्रदेश की यदि अपनी कुछ समस्यायें है तो बहुत सी समस्याओं का निदान भी इसी प्रदेश से निकला है जिसमें मानव निर्मित आद्र भूमि का निर्माण उल्लेखनीय है । भाषा के महत्व पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि अंग्रेजी भाषा हमें विश्व नागरिक बनाती है हालांकि सृजन मात्रभाषा में ही संभव है । राजनितिक भूलों का सुधार करना भी साहित्य हमें सिखाता है । खवाजा अल्ताफ हुसैन हाली के जीवन, चिंतन और सृजन को याद करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि हाली अपने युग के सच्चे राष्ट्र प्रेमी, समाज सुधारक, महान कवि, खरे आलोचक, शिक्षाविद, चिन्तक एवं ज्ञानी थे जिन्होनें समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके लिए राष्ट्र उनका सदैव ऋणी रहेगा । हाली की कविताओं का वैश्वीकरण जरुरी है । आने वाली सदी ज्ञान की सदी होगी । जीवन में पैसा कमाना सब कुछ नहीं होता है बल्कि स्वच्छ हवा और पानी इंसान के अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए । पानीपत की विरासत ज्ञान की विरासत है जिसका परिचायक यह पुस्तक मेला है । इस अवसर पर उन्होनें प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और उर्दू लेखक ख़्वाजा अहमद अब्बास  को भी याद किया ।   

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि कथाकारों के लिए इतिहास का सर्जनात्मक इस्तेमाल हमेशा एक चुनौती रहा है । सन् 1761 का पानीपत का तीसरा युद्ध तो लेखकों के साथ ही इतिहास प्रेमियों के लिए भी कौतूहल का विषय रहा है । यह प्रीतिकर संयोग है कि मराठी के अग्रणी उपन्यासकार विश्वास पाटील ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कलात्मक समग्रता और प्रतीकात्मकता के साथ ‘पानीपत’ उपन्यास की सर्जना की । पानीपत ऐतिहासिक उपन्यास है जिसका लेखन प्रकाशन भारतीय साहित्य की एक ऐतिहासिक महत्त्व की घटना है । नवम्बर 1988 में प्रकाशित होते ही इस उपन्यास को पाठक-समाज में अद्भुत यश और लोकप्रियता मिली और विश्वास पाटील भी मराठी साहित्य-जगत् में शिखर पर प्रतिष्ठित हो गये । कहा जा सकता है कि भारतीय ऐतिहासिक उपन्यास लेखन में पानीपत हर दृष्टि से एक जीवन्त प्रतिमान है । पानीपत का विषय व्यक्ति प्रधान न होकर राष्ट्र के जीवन की एक बहुत बड़ी युद्ध-घटना है जिसमें एक विशिष्ट कालखण्ड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक अर्थबोध का समन्वय है । इन सबको उपन्यास का मर्मस्पर्शी रूप देते हुए विश्वास पाटील ने यह बराबर ध्यान रखा है कि ऐतिहासिक सत्य और तथ्य की मर्यादा की क्षति न हो और अपनी विशिष्टता के साथ उसकी अनुगूँज भी बनी रहे । पानीपत के इतिहास और खवाजा अल्ताफ हुसैन हाली के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हाली एक अच्छे शायर, चिन्तक और विचारक थे और समय की नब्ज और उसकी गति पर उनकी सैदव दृष्टि थी । धर्म और इंसानियत की बरीकियों को वे अच्छी तरह समझते थे तथा सामान्य शिक्षित वर्ग में जागरूकता फूंकने के पक्षधर थे ।

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