Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय खेलों इंडिया सीनियर महिला चैंपियनशिप में वुशू और पेंनकैक सिलाट में झटके स्वर्ण सहित चार पदक 

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 2, 2023 Tags: , , , ,

तीनों खिलाड़ी नार्थ ज़ोन टूर्नामेंट में हरियाणा राज्य का करेंगे प्रतिनिधित्व

BOL PANIPAT : 02 सितम्बर, 

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की तीन होनहार खिलाड़ियों ने हिसार में आयोजित राज्य स्तरीय खेलों इंडिया सीनियर महिला चैंपियनशिप में वुशू और पेंनकैक सिलाट में चार पदक झटक कर कॉलेज और प्रदेश का नाम रोशन किया. वुशू की गनशु कटेगरी में नेहा ने स्वर्ण पदक जीत कर कॉलेज का नाम रोशन किया. नेहा ने तुन्गाल प्रतिस्पर्धा में भी कांस्य पदक पर अपना कब्ज़ा जमाया. पेंनकैक सिलाट में शिवानी ने 60 किलोग्राम भारवर्ग और किरण ने 75 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक हासिल किये. शानदार प्रदर्शन करने पर तीनों खिलाड़ियों का चयन नार्थ जोन टूर्नामेंट के लिए हो गया है जिसमे नेहा, शिवानी और किरण अपनी-अपनी केटेगरी में हरियाणा राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी. विदित रहे कि तीनों खिलाड़ी प्रतिदिन नियमित घंटों वुशु का अभ्यास करती रही है और विश्वविधालय और राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक हासिल कर चुकी है. कॉलेज के खिलाड़ियों का प्रत्येक मैच में पूरा दबदबा रहा और खिलाडियों का समन्वय और जोश देखते ही बनता था. कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रजनी, कोच अंकुश, ग्राउंडसमैन प्रताप और अन्य स्टाफ सदस्यों ने तीनों खिलाड़ियों के कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर उन्हें बधाई दी और उनकी उपलब्धि को अद्भुत बताया.  

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने नेहा, शिवानी और किरण के खेल और मेहनत की तारीफ़ करते हुए उन्हें नार्थ जोन टूर्नामेंट में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने पर बधाई दी. एक ही कॉलेज की तीन छात्राओं के चयन से कॉलेज में जश्न का माहौल है. उन्होनें कहा कि जो छात्र-छात्राएं खेलों में भाग लेते है वे जीवन में ऊँचाइयों को छूते है. सामाजिक कौशल, आत्मविश्वास, टीम वर्क, झूझारुपन का विकास भी खेलों में भाग लेने से होता है. खेल-कूद शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क के विकास में भी सहायक है. 

डॉ सुशीला बेनीवाल शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष ने वुशु के खेल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वुशु एक पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट खेल है. इस खेल को ताओलू और संसौ नामक दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ताओलू पूर्व निर्धारित एक्रोबेटिक आंदोलनों से संबंधित है जिसमे प्रतियोगी द्वारा काल्पनिक हमलावरों के खिलाफ उनकी तकनीकियों पर महारथ हासिल की जाती है. दूसरी तरफ संसौ एक पूर्ण संपर्क खेल है. यह प्राचीन प्रथाओं और आधुनिक खेल सिद्धांतों का संयोजन है जो कुश्ती या किक-मुक्केबाजी जैसा दिखता है. पेंनकैक सिलाट शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से इंडोनेशिया में किया जाता है. पेंनकैक सिलाट को चालीस के दशक में इंडोनेशियाई युद्ध शैलियों के लिए एक एकीकृत शब्द के रूप में चुना गया था. यह इंडोनेशिया में मार्शल आर्ट के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले दो शब्दों का एक संयोजन है. 

इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग भी मौजूद रहे. 

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