एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के खिलाड़ियों ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय इंटर कॉलेज कराटे चैंपियनशिप में झटके मेडल्स
–दो खिलाड़ियों का हुआ आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कराटे चैंपियनशिप के लिए चयन
–नारी सशक्तिकरण व आत्म रक्षा में कारगर है कराटे का प्रशिक्षण: दिनेश गोयल
BOL PANIPAT , 29 जनवरी. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के तीन खिलाड़ियों ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय में आयोजित इंटर कॉलेज कराटे चैंपियनशिप में तीन मैडल जीतकर कॉलेज और जिले का मान बढाया । कराटे की व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धाओं में 60 किलोग्राम भारवर्ग में जतिन ने स्वर्ण, 50 किलोग्राम भारवर्ग में प्रीती जागलान ने रजत और 68 किलोग्राम भारवर्ग में किरण ने कांस्य पदक पर कब्ज़ा किया । टूर्नामेंट का आयोजन 14 जनवरी को कुरुक्षेत्र विश्वविधालय में हुआ । विजेता छात्राओं का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, कोच अंकुश मलिक, ग्राउंड्समैन प्रताप और अन्य प्राध्यापकों ने किया । सबसे अधिक हर्ष का विषय यह रहा कि इनमें से जतिन और प्रीती जागलान का चयन आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कराटे टूर्नामेंट कैंप के लिए हो गया है । जतिन और प्रीती वैसे भी कराटे में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद का लोहा मनवा चुके है । छात्रा प्रीती जागलान इससे पहले भी आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कराटे चैंपियनशिप और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज मैडल जीत चुकी है ।
प्रधान दिनेश गोयल ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जतिन, प्रीती जागलान और किरण ने जो उपलब्धि हासिल की है वह हर विद्यार्थी के लिए गौरव और हर्ष का विषय है । इस जीत के पीछे इन सबकी लगन और कड़ी मेहनत का हाथ है । खेल सभी के जीवन में, विशेष रुप से विद्यार्थियों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । खेल गतिविधियों में शामिल होना हर व्यक्ति के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है । खेल न केवल शारीरिक ताकत प्रदान करते है बल्कि इनसे हम मानसिक रूप से भी शक्तिशाली और मजबूत बनते है । अब तो खेल हमें अपने पैरो पर भी खड़ा होने में मदद करने लगे है । विश्वविधालय और राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेना और फिर स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में गौरवपूर्ण उपलब्धि है । इन खिलाडियों ने यही संदेश और प्रेरणा हम सभी को दी है । कॉलेज अपनी बेटियों को हर तरह से प्रोत्साहित करता है और भविष्य में भी उन्हें इसी प्रकार से प्रेरित करता रहेगा ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को कराटे का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए । इस प्रकार के प्रशिक्षण के हम महिला सुरक्षा एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को और कारगर ढंग से लागू कर सकते है । कराटे प्रशिक्षण और कराटे चैंपियनशिप के माध्यम से बेटियों और महिलाओं के आत्मबल वृद्धि होती है । उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में महिलाओं को आत्म सुरक्षा के लिए स्वावलंबी बनाना काफी आवश्यक है । महिला सशक्तिकरण के दौर में छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ कराटे की शिक्षा भी दी जानी चाहिए । कराटे के शिक्षण के माध्यम से छात्राओं और महिलाओं की शारीरिक और मानसिक ताकत बढती है । आत्म-सुरक्षा के लिए इसे न सिर्फ खेल के रूप में बल्कि अपने रोजमर्रा के जीवन में भी महिलाओं को अपनाना चाहिए । तीनों खिलाड़ियों की तारीफ़ करते हुए उन्होनें कहा कि समयबद्धता, धैर्य, अनुशासन और लगन के कारण ही जतिन, प्रीती जागलान और किरण ने इस मुकाम को हासिल किया है । यूनिवर्सिटी स्तर पर पदक जीतना हर एक खिलाड़ी का स्वप्न होता है । एसडी पीजी कॉलेज ने खेलों को हमेशा बढ़ावा दिया है और यहाँ के खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर कॉलेज का भरपूर नाम रोशन किया है । कॉलेज को अपनी छात्राओं पर नाज है और इन्हें आगे बढ़ने के और भी अवसरदिए जायेंगे ।
डॉ सुशीला बेनीवाल शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष ने तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बारे में बोलते हुए कहा कि ऐसे खिलाडी बहुत कम होते है जो इतनी कम उम्र में बड़े कारनामे कर जाते है । इन सभी खिलाड़ियों की कामयाबी का सफ़र बहुत लम्बा है और यह अभी और बड़ा मुकाम हासिल करेंगे ।
जतिन, प्रीती जागलान और किरण ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय उनके माता-पिता, एसडी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, उनके कोच अंकुश और कॉलेज प्रशासन को जाता है । उनके माता-पिता सदा उनके साथ खड़े रहे है और कॉलेज से भी उन्हे भरपूर मदद और हौंसला मिला है । अब वे अंतर्राष्टीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ना चाहते है और इसके लिए वे निरंतर अभ्यास में जुटे हुए है ।
इस अवसर पर कॉलेज स्टाफ सदस्य डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो सुशीला बेनीवाल, प्रो रेखा, दीपक मितल, चिराग सिंगला मौजूद रहे ।

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