युवाओं की तकदीर बदल सकते है स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार: धर्मेन्द्र प्रांत संगठक विवेकानंद केंद्र
–एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की पानीपत शाखा द्वारा उत्कृष्ट भारत उपक्रम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला और प्रतियोगिता का आयोजन
BOL PANIPAT , 12 अक्टूबर.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की पानीपत शाखा द्वारा उत्कृष्ट भारत उपक्रम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला और प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे कॉलेज के विभिन्न संकायों के 90 विद्यार्थियों ने भाग लिया । कार्यक्रम में विशिष्ट मेहमान के तौर पर कार्यपद्धति प्रमुख अमित, विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता प्रांत संगठक धर्मेन्द्र, नगर प्रमुख सुशील चहल, पानीपत विभाग प्रमुख रजनी शर्मा और संस्कारवर्ग सदस्या प्रीती ने शिरकत की । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रभारी डॉ संगीता गुप्ता और प्रो किरण मलिक ने किया । कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कार्यपद्धति प्रमुख अमित द्वारा गाये गीत के माध्यम से की गई । विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता प्रांत संगठक धर्मेन्द्र ने विद्यार्थियों को विवेकानंद के पदचिन्हों पर चलने के लिए आह्वान किया । नगर प्रमुख सुशील चहल और संस्कारवर्ग सदस्या प्रीती ने प्रतियोगिताओं और कार्यशाला को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया ।
विद्यार्थियों को पानीपत विभाग प्रमुख रजनी शर्मा ने प्रतियोगिता के महत्त्व से अवगत कराया । आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के पांच गण बनाए गए और उनके नाम विवेकानंद, शारदा, शिवाजी, निवेदिता और लक्ष्मीबाई रखे गए । विद्यार्थियों ने कार्यशाला में किला बानाओ, केंद्र चलो, हाथी-घोड़ा पालकी जैसे पारंपरिक खेलों का भरपूर आनंद लिया । चर्चा और मंथन के विषयों जैसे हमारे समक्ष चुनौतियां एवं समाधान, संगठित कार्य की आवश्यकता, हमारे प्रेरणा श्रौत स्वामी विवेकानंद, भारत का स्वरूप 2047 में, राष्ट्र के प्रति युवाओं के कर्तव्य आदि के माध्यम से विद्यार्थियों की बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित किया गया । कार्यशाला में एक विडियो डाक्यूमेंट्री के माध्यम से विवेकानंद केंद्र के कार्यों से अवगत कराया गया ।
विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता प्रांत संगठक धर्मेन्द्र ने कहा कि हमें कभी भूलना नहीं चाहिए कि देश की आज़ादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व बलिदान कर लोगों में क्रांति का बीजारोपण करने वाले अधिकांश युवा स्वामी जी को ही अपना आदर्श मानते थे । स्वामी विवेकानंद ने देश की आन, बान और शान के लिए अपने निजी जीवन के समस्त सुखों का त्याग कर दिया था और अपना समस्त जीवन देश के लिए न्यौछावर कर दिया था । स्वामीजी के अनमोल विचार किसी भी युवा की तकदीर को बदल सकते है ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि युवा पीढ़ी किसी भी देश के विकास की रीढ़ होती है । रीढ़ अगर खराब हो जाए तो शरीर का सीधे खड़े रहना मुमकिन नहीं होता । ठीक इसी प्रकार देश के विकास के लिए युवा वर्ग की मानसिकता का स्वस्थ रहना है बेहद जरूरी है । हमारे मानसिक स्वास्थ्य को स्वामी विवेकानंद के विचार ही मजबूत बना सकते है और वही हर युवा के मार्गदर्शक होने चाहिए । विवेकानंद ने ही देश की युवा शक्ति को जागृत कर उसे देश के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराया और उन्हें सही दिशा में प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया। उनके विचार पहले भी प्रासंगिक थे, आज भी है और भविष्य में भी रहेंगे ।

डॉ संगीता गुप्ता ने कहा कि ऐसी कार्यशाला और प्रतियोगिताओं को नियमित रूप से आयोजित करने से युवाओं को अत्यधिक लाभ मिलता है । स्वामी विवेकानंद सही मायनों में युवाओं के प्रेरणास्रोत और आदर्श व्यक्तित्व के धनी है । उन्हें उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण भी जाना जाता है । विवेकानंद सदैव कहा करते थे कि उनकी आशाएं देश के युवा वर्ग पर ही टिकी हुई हैं । वे आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि थे और खासकर भारतीय युवाओं के लिए उनसे बढ़कर भारतीय नवजागरण का अग्रदूत अन्य कोई नेता नहीं हो सकता है ।

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