Saturday, April 18, 2026
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संस्कृत की अनिवार्यता का लिया संकल्प

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at January 5, 2025 Tags: , , , , ,

-पट्टी कल्याणा के सेवा साधना ग्राम विकास केंद्र में संस्कृत भारती के दो दिवसीय प्रांत सम्मेलन की शुरुआत

-कार्यकर्ता वाणी में मधुरता, पैरों में गति, मस्तिष्क में शीतलता के साथ संगठन में करें भागीदारी: हुल्लास चंद

-पानीपत के पट्टी कल्याणा में दो दिवसीय संस्कृत भारती के प्रांत सम्मेलन में पहुंचे संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख

-संस्कृत में शपथ लेने वाले रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण यादव, करनाल के विधायक जगमोहन आनंद, इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप का किया सम्मान।

    BOL PANIPAT ,5 जनवरी, प्रदेश के स्कूलों में कक्षा छठी से दसवीं तक संस्कृत की अनिवार्यता के संकल्प के उद्घोष के साथ रविवार को पट्टी कल्याणा के सेवा साधना ग्राम विकास केंद्र में संस्कृत भारती के दो दिवसीय प्रांत सम्मेलन की शुरुआत हुई। सम्मेलन में संगठन विस्तार में कार्यकर्ताओं की भूमिका के साथ-साथ आगामी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
    उद्घाटन सत्र में विधानसभा में संस्कृत में शपथ लेने वाले रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण यादव, करनाल के विधायक जगमोहन आनंद, इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप का भी सम्मान किया गया। तीनों विधायकों ने विधानसभा में संस्कृत के प्रत्येक कार्य की समर्पण भाव से आवाज उठाने की बात कही। दो दिवसीय सम्मलेन में विभिन्न प्रकार के सत्र के तहत कार्यकर्ताओं की भागीदारी रहेगी।
    रविवार को पट्टी कल्याणा के सेवा साधना आश्रम में संस्कृत भारती द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रांत सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख हुल्लास चंद ने कहा है कि कार्यकर्ता के हृदय में अग्नि, पैरों में गति, मुख में मधुरता और मस्तिष्क में शीतलता का होना जरूरी है। जब तक ऊर्जा नहीं होगी, कार्य की शुरुआत हो ही नहीं हो पाएगी, मधुर वाणी से शत्रु को भी अपना बनाया जा सकता है। मस्तिष्क शीतल होगा तो रास्ता सही अपनाया जाएगा। रास्ता सही अपनाया तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं हो पाएगा।
    मुख्यातिथि के रूप में महामंडलेश्वर स्वामी राघवदेव जी महाराज ने कहा कि संस्कृत है तो संस्कृति है। भारत की संस्कृति विश्व प्रसिद्ध है। इसे बनाए रखना हम सब का दायित्व है। समय अनुकूल हो तो सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। रामलला मंदिर निर्माण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रति आज समय और माहौल दोनों अनुकूल है।

    संस्कृत की अनिवार्यता पर एकमत दिखे सभी विधायक

    सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण यादव ने कहा कि यदि अपनी सभ्यता संस्कृति और इतिहास को जानना है तो संस्कृत को न केवल पढ़ना होगा अपितु इसे आत्मसात भी करना होगा।
    करनाल के विधायक जगमोहन आनंद ने कहा कि मेरे लिए संस्कृत में शपथ लेना किसी गौरव के पल से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपनी संस्कृति को बचाए रखना है तो संस्कृत का व्यापक रूप से प्रचार प्रसार करना होगा।
    इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत को कक्षा छठी से दसवीं तक अनिवार्य करना आवश्यक है। इस बारे में मुख्यमंत्री तक संस्कृत भारती की बात को प्रमुखता से पहुंचाएंगे। संस्कृत कठिन भाषा नहीं है। यह सबसे सरल है। जो सरलता संस्कृत में है, वो किसी अन्य भाषा में नहीं है।

    ये रहे मौजूद

    उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष डॉ.सोमेश्वर दत्त ने की। इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री जयप्रकाश, उत्तर क्षेत्र अध्यक्ष प्रो.यशवीर , उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री नरेंद्र कुमार, संपर्क प्रमुख डॉ.जोगेंद्र, प्रांत मंत्री प्रमोद शास्त्री, प्रांत सह मंत्री भूपेंद्र, ईशम सिंह, न्यास अध्यक्ष डॉ.रामनिवास, हरिदेव शास्त्री, प्रचार प्रमुख सतेंद्र कुमार, कोष प्रमुख डॉ. सुरेश कुमार, पुष्पेंद्र, डॉ. नवीन शर्मा, प्रवेश कौशिक, डॉ.शैलेंद्र, डॉ. राजबीर, अशोक बुचौली, जयपाल शास्त्री, रामदेव सिरसा, विनय गोपाल त्रिपाठी, गिरीश चंद्र, बलजिंद्र, सुशील शास्त्री, डॉ.सुनील, कपीश, डॉ.संजीव,नीरज आदि भी उपस्थित रहे।

    दो दिन होगा संस्कृतमय वातावरण

    प्रचार प्रमुख सतेंद्र कुमार ने बताया दो दिन तक चलने वाले इस आयोजन में संस्कृत भारती के कार्यकर्ता प्रदेश भर से पहुंचें हुए है। इस दौरान कार्यकर्ता संस्कृत में ही संवाद करेंगे। संस्कृत प्रदर्शनी और संस्कृत साहित्य स्टाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। प्रदेश के सौ से अधिक कार्यकर्ताओं की सम्मेलन में व्यवस्था के तौर पर जिम्मेदारी लगाई गई है। प्रांत स्तर पर संस्कृत भारती का प्रदेश में प्रत्येक तीन वर्ष में होने वाला सम्मेलन है।

    सम्मेलन की झलकियां

    
    1.प्रदेशभर से संस्कृत कार्यकर्ता शनिवार शाम से ही पट्टी कल्याणा पहुंचना शुरू हो गए थे।

    2.महिला कार्यकर्ता भी सम्मेलन में काफी संख्या में पहुंची।

    1. एक हजार से अधिक कार्यकर्ता प्रदेशभर में शामिल होने यहां पहुंचे है।
    2. संस्कृत प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र बन रही है।

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