पराली प्रबंधन को लेकर विशेष पहल. किसानों को जागरूक किया गया.
-किसानों से पराली को पशु चारा, बायो पैलेट और ऑर्गेनिक खाद में बदलने की अपील
BOL PANIPAT , 13 अक्टूबर। डीसी डाक्टर वीरेंद्र कुमार दहिया के निर्देशानुसार उप कृषि निदेशक आत्मा राम गोदारा के नेतृत्व में जिले में इस वर्ष एक भी धान के खेत में पराली जलाने से बचने का संकल्प हर गांव की ग्राम पंचायत ने लिया है। इस दिशा में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा पराली प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया गया है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि किसान भाईयों को पराली के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कठिनाई न आए।
पराली प्रोटेक्शन फोर्स कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा पराली के प्रबंधन को लेकर चलाई गई स्कीम जैसे कि इन सीटू और एक्स सीटू प्रबन्धन पर प्रति किला 1200/-रु0 की प्रोत्साहन राशि, पराली प्रबंधन के कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान, मेरा पानी मेरी विरासत स्कीम के अंतर्गत धान फसल को बदलकर किसी अन्य फसल बोने पर 8000/-रु0 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशी इत्यादि के बारे में गांवों में जाकर कैंप लगाकर जानकारी प्रदान कर रहें है। साथ ही गांवो में मुनादी भी करवाई जा रही है कि पराली जलाने को लेकर प्रशासन बहुत सख्त है। जुर्माने के साथ-साथ एफ.आई.आर के भी आदेश है। यदि किसान अपनी फसल मेरी फसल, मेरा ब्यौरा में रेड एंट्री कराते हैं, तो 2 साल तक एमएसपी पर फसल भी नहीं बेच सकते।
उप निदेशक आत्मा राम गोदारा ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग के हवाले न करें बल्कि इसे आय के साधन के रूप में प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि पराली को पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बायो पैलेट बनाकर उद्योगों में बेचा जा सकता है, और खेत में गलाकर ऑर्गेनिक खाद बनाया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और भविष्य की फसलों के लिए लाभकारी साबित होती है।

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