अनुसूचित जाति की महिलाओं 3 दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण सम्पन्न.
शिविर में कृषि वैज्ञानिकों ने महिलाओं को पशु पालन और किचन गार्डनिंग के महत्व को बताया
प्रशिक्षण के अंतिम दिन 90 महिला किसानों ने क्या केंद्र का भ्रमण
BOL PANIPAT , 4 मार्च। ऊझा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में 3 दिवसीय डेयरी फार्मिंग पर व्यवसायिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन अनुसूचित जाति की महिलाओं को जानकारी देते हुए केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ राजवीर गर्ग ने कहा कि डेयरी प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एससीएसपी प्लान के तहत अनुसूचित जाति की महिला किसानों को डेयरी फार्मिंग में आत्म निर्भर व सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि आज समय की जरूरत है कि हम स्वयं सहायता समूह बनाकर समूह के माध्यम से डेयरी फार्मिंग व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि गर्भधान से नसों में सुधार संभव है । वे कृत्रिम गर्भधान द्वारा अपने पशुओं की नस्ल में सुधार कर सकती है। वे उनसे अधिक से अधिक अच्छी गुणवत्ता वाला दूध ले सकती हैं।
प्रशिक्षण शिविर में जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉक्टर सतपाल ने महिलाओं विभिन्न सरकारी स्कूलों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विभिन्न स्कीमों के साथ जोड़कर लाभ ले सकती हैं। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की।
मृदा वैज्ञानिक डॉ देशराज ने शिविर में जानकारी देते हुए कहा कि मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा निम्न स्तर में है पोषक तत्वों की विक्रमी देखने में आई है जिससे मर्दा का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है मृदा की भौतिक रासायनिक और जैविक गुणवत्ता में भी काफी गिरावट आ रही है जैविक खाद का प्रयोग करके उसे बचा जा सकता है उन्होंने इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन वह गोबर का खाद खेतों में यूज करने की महिलाओं को सलाह दी।
इस मौके पर डॉ राजेश ने किचन गार्डनिंग के बारे में महिलाओं को जानकारी देते हुए कहा कि महिलाएं किचन गार्डनिंग से अपने आप को जोड़कर अपने स्वास्थ्य व परिवार के स्वास्थ्य को स्वस्थ रख सकती हैं ।
इस दौरान प्रशिक्षण शिविर में आई महिलाओं को कृषि वैज्ञानिकों ने केंद्र का भ्रमण भी कराया।

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