एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस जोश और जज्बे के साथ मनाया गया
भगत सिंह युवा ग्रुप द्वारा एक क्विंटल लड्डू किये गए वितरित
आदर्शविचार, अतुल्य बलिदान और राष्ट्रवादी दर्शन का दूसरा नाम है शहीद भगत सिंह: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : भारत के सच्चे सपूत शहीद भगत सिंह का जन्म दिवस एसडी पीजी कॉलेज पानीपतमें पूरी श्रद्धाएवं जज्बे के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की तथा उन्होनें विद्यार्थियोको संबोधितकिया. यह कार्यक्रम कॉलेज के उन विद्यार्थियो द्वारा पिछले लगातार 12वर्ष से मनाया जा रहा है जो अब इस कॉलेज के भूतपूर्वविद्यार्थी है. पूर्व विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष नियमित भगत सिंह के जन्म दिवस पर कॉलेज में एकत्रित होते है, एक क्विंटल (100 किलो) लड्डू का प्रबंध करते है, और नए विद्यार्थियो को भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा एवं चरित्र व व्यक्तित्व निर्माण को लेकर प्रेरित करते है. हर वर्ष कि तरह आज भी कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के सभी छात्र-छात्राओ को लडू वितरित किये गए. इस बार आकर्षण की बात यह रही की कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में भरपूर सहयोग दिया और बढ़-चढ़ कर भाग लिया.कार्यक्रम का प्रारंभ स्वर कोकिला लता मंगेशकर द्वारा गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो क़ुरबानी’ से किया गया. विदित रहे की भारत रत्न स्वर्गीयलता मंगेशकर का जन्मदिवस भी 28 सितम्बर हीहै.
एसडी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अन्दाजा सहज ही लगाया जा सकता है. उन्होंने भारतीय समाज में भाषा, जाति और धर्म के कारण आयी दूरियों पर दुःख व्यक्त किया था. उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग पर किसी भारतीय के प्रहार पर भी उसी सख्ती से सोचा जितना कि किसी अंग्रेज के द्वारा किये गये अत्याचार को. उनका यह भी विश्वास था कि उनकी शहादत से भारतीय जनता और उद्विग्न हो जायेगी और ऐसा उनके जिन्दा रहने से शायद ही हो पाये. इसी कारण उन्होंने मौत की सजा सुनने के बाद भी माफ़ीनामा लिखने से साफ मना कर दिया था. ऐसे वीर शहीद कोशत-शत हमारा नमन.स्वतंत्रता के पश्चात आज समाज एवं राष्ट्र में अनेकों लड़ाईयां लड़ी जा रही है और उनसे लड़ने और उन पर विजयी होने के लिए हर युवा को खुद में भगत सिंह पैदा करना होगा.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा की आदर्शविचार, अतुल्य बलिदान और राष्ट्रवादीदर्शन कादूसरा नाम है शहीद भगत सिंह है.भगत सिंह का जन्म 1907 को हुआ और वह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला कियावह आज के युवकों के लिए प्रेरणा का विषय है. भगत सिंह सेण्ट्रल असेम्बली में बम फेंककर भी वहां से भागे नहीं जिसके फलस्वरूप उन्हें 23मार्च1931कोइनके दो अन्य साथियों राजगुरु तथा सुखदेवके साथ फाँसी देदी गई. सारे देश ने उनके बलिदान को बड़ी गम्भीरता से याद किया है और यह सिलसिला सैदव जारी रहेगा. पहले लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान करने वाला यही वीर सपूत था. इन सभी बम धमाको के लिए उन्होंने वीर सावरकर के क्रांतिदल अभिनव भारत कीभी सहायता ली और इसी दल से बम बनाने के गुर सीखे. उन्होनेंकहा कीआज भगत सिंह को यदि हमने सच्ची श्रधान्जली देनी है तो हमें उनकी तरह अपने चरित्र निर्माण पर ध्यान देना होगा. लड़कियों की हिफाजत, बड़ो का सम्मान और राष्ट्र कीसमस्याओं के प्रति जागरूकता से ही हम अपनी आजादी को संजो कर रख पायेंगे. हर व्यक्ति को शहीद भगत सिंह कि तरह खुद के व्यक्तित्व को निखारना ही होगा. आज हर व्यक्ति उनके जीवन और उपलब्धिओं के बारे में सब जानता है परन्तु बड़ी बात यह होगी के उन पर अब अम्ल किया जाए. यही समय कि मांग भी है और देश कि जरुरत भी. भगत सिंह की कुर्बानी यह देश कभी भी नहीं भूल पायेगा.
इस अवसर पर प्रो नरेंद्र कौशिक,डॉ एस के वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो प्रवीण खेरडे आदि भी कार्यक्रम में उपस्थित थे.

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