गुरू का अपमान शिव स्वीकार नहीं करते भले ही गुरू इसे क्षमा कर दे : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले)
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2083 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में चार दिवसीय संत समागम कार्यक्रम के अंतिम दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि कई लोग गुरू से इसलिए जुड़ते हैं कि गुरू का संपर्क बड़े अधिकारियों और नेताओं से है जिससे प्रभावित होकर वह गुरू से जुड़ते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। कभी गुरू से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। कभी गुरू का अपमान नहीं करना चाहिए। गुरू का हमेशा सम्मान करना चाहिए। जो क्रोध से रहित हो, जो मोह, अहंकार से रहित हो वहीं संत है और वहीं गुरू बनने लायक है। गुरू कृपालु होते हैं। गुरू का अपमान शिव स्वीकार नहीं करते भले ही गुरू इसे क्षमा कर दे।
उन्होंने आगे कथा करते हुए कहा कि एक बार लड़के के माता पिता उनसे मिलने आए उन्होंने कहा कि जहां लड़का शादी करना चाहता है वहां लड़की की कुण्डली मिलाने पर ज्योतिषी ने कहा है कि यदि यहां शादी हुई तो 8 माह में लड़के की मृत्यु हो जाएगी। तब मैंने कहा कि शादी के बाद बांके बिहारी के पास पत्नी सहित जाकर लड़का प्रार्थना करे तो 8 साल की जिम्मेवारी मेरी है। अब उस शादी को 16 साल हो चुके हैं और दोनों आनन्दपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां भगवान स्वयं आशीर्वाद दे देते हैं वहां ग्रह कुछ अनिष्ट नहीं कर सकते। इससे पूर्व गुरविन्द्र सिंह शाह साहिब व पुन्नू राम बांगा ने प्रभु भक्ति भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। महाराज श्री ने नवसम्वत 2083 की सबको बधाई देते हुए कहा कि नव सम्वंत का नाम रौद्र है। सम्वत का राजा गुरू तथा मंत्री मंगल है। सम्वत का वास माली के घर है एवं सम्वत का वाहन चातक है। इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, पवन चुघ, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, अमन रामदेव, धर्मवीर नन्दवानी, ओमी चुघ, किशन चुघ, राघव चुघ, मोहन लाल जुनेजा, कर्म सिंह रामदेव, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, हरनारायण जुनेजा, अमर सपड़ा, श्याम लाल सपड़ा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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