Saturday, May 16, 2026
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भारत की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है सोमनाथ: उपायुक्त डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at May 15, 2026 Tags: , , , , ,

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व प्रदर्शनी बनी जिला सचिवालय में आकर्षण का केंद्र

सोमनाथ की गौरवगाथा, शिव तत्व और सांस्कृतिक विरासत को जानने उमड़ रहे लोग

नई पीढ़ी को इतिहास, संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ रही प्रदर्शनी: डॉ. सुनील बसताडा

BOL PANIPAT , 15 मई। जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, हरियाणा द्वारा जिला सचिवालय के ग्राउंड फ्लोर पर लगाई गई सोमनाथ स्वाभिमान पर्व प्रदर्शनी इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रोजाना एक दर्जन से ज्यादा नागरिक , विभिन्न स्कूलों के बच्चे उत्साह पूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन रहे हैं।

प्रदर्शनी में भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों के आध्यात्मिक एवं दार्शनिक अर्थ, सोमनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास, मंदिर के बार-बार हुए पुनर्निर्माण, वीर योद्धाओं के बलिदान, भारत की सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा तथा राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को आकर्षक चित्रों और विस्तृत जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। अब तक 500 के करीब अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और आमजन प्रदर्शनी का अवलोकन कर चुके हैं तथा प्रदर्शित सामग्री को गहरी रुचि और श्रद्धा के साथ देख रहे हैं।

प्रदर्शनी में भगवान शिव से जुड़े प्रतीकों जैसे भस्म, त्रिशूल, डमरू, नंदी, अर्धचंद्र, गंगा, जटा, त्रिनेत्र, नाग और रुद्राक्ष के आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से दर्शाया गया है। इसके साथ ही सोमनाथ मंदिर को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रस्तुत करते हुए उसके ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है। प्रदर्शनी में बताया गया है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अटूट आस्था, संघर्ष, पुनर्जागरण और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रतीक है। प्रदर्शनी में सोमनाथ मंदिर के इतिहास से जुड़े विभिन्न कालखंडों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें मंदिर पर हुए आक्रमणों, पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा, भीमदेव सोलंकी, राजा भोज, सिद्धराज जयसिंह, अहिल्याबाई होल्कर तथा सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इसके अतिरिक्त वीर हमीर जी गोहिल, कान्हड़ देव तथा उन अनसुने ब्राह्मणों के योगदान को भी दर्शाया गया है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सोमनाथ की पूजा परंपरा को जीवित रखा।

  उपायुक्त डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि सोमनाथ भारत की आत्मा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का शाश्वत प्रतीक है। यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संघर्ष, पुनर्निर्माण और अटूट स्वाभिमान की प्रेरक गाथा है। प्रदर्शनी में प्रस्तुत प्रत्येक चित्र और जानकारी लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोडऩे का कार्य कर रही है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए यह प्रदर्शनी अत्यंत प्रेरणादायक है, क्योंकि इससे उन्हें अपने गौरवशाली इतिहास, आध्यात्मिक परंपराओं और राष्ट्र निर्माण में संस्कृति की भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा।

    प्रदर्शनी में यह दर्शाया गया है कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास यह सिद्ध करता है कि भारत की संस्कृति और आस्था को कितनी भी चुनौतियों का सामना करना पड़े, उसकी जड़ें सदैव मजबूत और अमर रहती हैं। यह प्रदर्शनी समाज में अपनी संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र के प्रति सम्मान और गर्व की भावना को और अधिक मजबूत करने का कार्य कर रही है। प्रदर्शनी देखने पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता रंजीता कौशिक ने बताया कि प्रदर्शनी में स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की गौरवगाथा को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसमें सरदार पटेल द्वारा वर्ष 1947 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा, जनसहयोग से हुए निर्माण कार्य, मंदिर ट्रस्ट के गठन तथा वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा संपन्न प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। सचिवालय में किसी कार्य से आई सुमन बाला और  सतीश ने बताया की प्रदर्शनी में यह भी दर्शाया गया है कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय गौरव, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जन आस्था का प्रतीक बना।

    जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुनील बसताडा ने बताया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व प्रदर्शनी का उद्देश्य आमजन को भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व से अवगत करवाना है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में भगवान शिव के प्रतीकों के दार्शनिक अर्थों से लेकर सोमनाथ मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण, स्थापत्य कला, धार्मिक महत्व, ऐतिहासिक संघर्षों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक की विस्तृत जानकारी को सरल एवं आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित सामग्री लोगों को केवल धार्मिक और ऐतिहासिक जानकारी ही नहीं दे रही, बल्कि यह राष्ट्र गौरव, स्वाभिमान, सांस्कृतिक एकता और भारतीय सभ्यता की निरंतरता का संदेश भी दे रही है।

    विदित रहे कि बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे हैं और विशेष रुचि के साथ ऐतिहासिक तथ्यों तथा दुर्लभ चित्रों को देख रहे हैं। उन्होंने आमजन से भी इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने की अपील की, ताकि वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सोमनाथ की गौरवगाथा को निकट से जान सकें।

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