अनुसंधान अधिकारियों को एआई टूल्स का विशेष प्रशिक्षण, जिला पानीपत के 15 अनुसंधान अधिकारी हुए शामिल, आधुनिक तकनीक से सशक्त होगी पुलिस जांच प्रणाली : आईजी अशोक कुमार भा. पु. से.
BOL PANIPAT , 03 जुलाई: जिला पुलिस के अनुसंधान अधिकारियों को आधुनिक तकनीक के प्रयोग के प्रति दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत करनाल मंडल कार्यालय में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण अशोक कुमार, पुलिस महानिरीक्षक, करनाल मंडल, करनाल के निर्देशानुसार आयोजित किया गया, जिसमें करनाल मंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों के पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। उक्त प्रशिक्षण स्तर में जिला पानीपत से 15 अनुसंधान अधिकारियों ने इसमें सहभागिता की।
करनाल मंडल के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 6 प्रबंधक थाना तथा 45 अनुसंधान अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित आधुनिक डिजिटल टूल्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को नई तकनीक से जोड़ते हुए साइबर अपराध, अनुसंधान, डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण तथा सूचना संकलन जैसे कार्यों में अधिक सक्षम बनाना था।
प्रशिक्षण के दौरान Google Gemini, NotebookLM, Bhashini और ChatGPT जैसे एआई टूल्स के उपयोग, उनकी कार्यप्रणाली तथा पुलिस कार्यों में उनके व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि इन टूल्स की सहायता से पुलिस अनुसंधान कार्य को अधिक तेज, सटीक और प्रभावी बनाया जा सकता है। इस अवसर पर पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। इनमें डॉ. दीपक सिंगला, सहायक प्राध्यापक, AIML विभाग, डॉ. शक्ति अरोड़ा, विभागाध्यक्ष, साइबर सिक्योरिटी विभाग तथा श्री विकास नैन, सहायक प्राध्यापक, MBA विभाग शामिल रहे। विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को एआई टूल्स के माध्यम से साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल दस्तावेजों के विश्लेषण, ऑनलाइन डाटा की छंटनी, सोशल मीडिया गतिविधियों के अध्ययन तथा सूचना प्रबंधन के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया।
आईजी अशोक कुमार भा.पु.से ने कहा कि एआई आधारित डिजिटल टूल्स के माध्यम से बड़ी मात्रा में सोशल मीडिया डाटा का विश्लेषण कर अपराध से जुड़े सुराग, जन-भावनाओं की दिशा तथा संभावित खतरों की पहचान की जा सकती है। इससे पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग, खुफिया तंत्र, साइबर जांच और जनसंवाद प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा। पुलिस के लिए यह प्रशिक्षण भविष्य में अनुसंधान कार्यों को अधिक वैज्ञानिक, तकनीक-आधारित और परिणाममुखी बनाने की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा। आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग से पुलिस न केवल साइबर अपराधों की जांच में तेजी ला सकेगी, बल्कि डिजिटल युग की चुनौतियों का भी अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर पाएगी।

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