संघर्ष हमें अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों के प्रति बनाता सजग: उपायुक्त डॉ वीरेन्द्र कुमार दहिया
-डॉ. भीम राव अंबेडकर के 70 वें महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें किया गया याद
-उनका जीवन संघर्ष, साहस और शिक्षा की शक्ति का सजीव उदाहरण है
-डॉ भीम राव अम्बेडकर के आदर्शों को न केवल याद रखें, बल्कि अपने जीवन में उतारें
BOL PANIPAT, 6 दिसंबर। उपायुक्त डॉ वीरेन्द्र कुमार दहिया ने संविधान निर्माता और विश्व के प्रतिष्ठित विचारकों में शामिल डॉ. भीम राव अंबेडकर के 70 वें महापरिनिर्वाण दिवस पर नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, साहस और शिक्षा की शक्ति का सजीव उदाहरण है।
डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने यह सिद्ध किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, निष्ठा अडिग हो और कार्य के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। डॉ. अंबेडकर सदैव कहते थे कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को प्रगति और समता की ओर ले जाने वाला सुनहरा सूत्र है।
उपायुक्त ने बताया कि डॉ अम्बेडकर के विचार थे कि शिक्षा हमें विचारों में स्वतंत्रता देती है, संगठन हमें सामूहिक शक्ति प्रदान करता है, और संघर्ष हमें अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों के प्रति सजग बनाता है।
उपायुक्त ने कहा कि आज हम सभी का कर्तव्य है कि हम उनके आदर्शों को न केवल याद रखें, बल्कि अपने जीवन में उतारें। समाज का विकास तभी संभव है जब हर व्यक्ति अपने भीतर समानता, सम्मान और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को जीवित रखे। हर नागरिक को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सामाजिक भेदभाव को जड़ से मिटाएंगे, कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करेंगे और नयी पीढ़ी को शिक्षा एवं संस्कारों से सशक्त बनाएंगे।
उपायुक्त ने कहा कि आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि परिवर्तन किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जागरूक बनने से आता है। हम सब मिलकर ऐसा समाज बनाने का संकल्प लें जहाँ अवसर सबके लिए समान हों, न्याय सबको मिले और विकास के मार्ग में कोई पीछे न रह जाए।
डॉ. अंबेडकर के विचार हमारे मार्गदर्शक बने रहें, और हम उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए एक उज्जवल, सशक्त और समतामूलक राष्ट्र का निर्माण करें।

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