एसडीपीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का सारगर्भित समापन
पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में राधिका और कुकिंग में निधि ने मारी बाजी
बेहतर स्वास्थ्य का देश के विकास, उत्पादकता तथा आर्थिक उन्नति पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडीपीजी कॉलेज पानीपत में एक सप्ताह चले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का सारगर्भित समापन 7 सितम्बर को हो गया. इस अवसर पर कॉलेज के गृह विज्ञान विभाग द्वारा पोस्टर मेकिंग और कुकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. प्रो गीता प्रुथी और प्रो तन्नु मेहता की अगुआई में आयोजित विविध कार्यक्रमों में छात्राओं ने पोषक भोजन खाने और पकाने बारे विस्तृत ज्ञान लिया और समाज को जंक फ़ूड से बचने के लिए प्रेरित किया. विजेताओं को प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पुरस्कृत किया. कुकिंग प्रतियोगिता में छात्राओं ने स्वादिष्ट केक, कुकीज, बिस्कुट, सलाद, सैंडविच, लौकी की बर्फी, लौकी का हलवा, खीर, ड्रिंक स्मूदिज और ब्राउनिज तैयार किये जिसमे प्रथम स्थान निधि ने, दूसरास्थानपूजा ने और तीसरा स्थान गरिमा एवं प्रीती ने प्राप्त किया. पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में राधिका ने पहला, काजल ने दूसरा और प्रीती एवं अंजू ने तीसरा स्थान प्राप्त किया. विदित रहे की इस वर्ष के राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का थीम ‘सेलिब्रेट वर्ल्ड ऑफ फ्लेवर’रहा.इस थीम के साथ लोगों को स्वस्थ रहने के लिए पोषक तत्वों को नए स्वाद के तौर पर सेवन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ और तंदुरस्त बन सके.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि खानपान में लापरवाही बरतने से हमारे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते है जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. स्वास्थ्य और खानपान को लेकर जागरुक करने के उद्देश्य से भारत सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष 1 से 7 सितंबर के बीच राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है. पोषण सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य बेहत्तर स्वास्थ्य के लिए पोषण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना है जिसका विकास, उत्पादकता, आर्थिक विकास और अंततः राष्ट्रीय विकास पर प्रभाव पड़ता है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य की रक्षा हेतु उचित पोषण के महत्त्व के विषय में जन जागरूकता पैदा करना है. आज के स्वस्थ बच्चे कल का स्वस्थ भारत है. इनके बेहतर स्वास्थ्य का देश के विकास, उत्पादकता तथा आर्थिक उन्नति पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है.
प्रो गीता प्रूथी विभागाध्यक्ष गृह विज्ञान ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत अमेरिकन डायटेटिक एसोसिएशन (एडीए) ने मार्च 1975 में की थी. एडीए को अब ‘न्यूट्रिशन और डाइट साइंस अकैडमी’ के नाम से जाना जाता है. इसका मकसद लोगों को उनके खानपान और सेहत के लिए जागरुक करना था. 80 के दशक तक आते-आते इस अभियान को लेकर लोगों का इतना जबरदस्त समर्थन मिला कि इसे एक सप्ताह के बजाय पूरे महीने मनाया गया. इसके बाद 1982 में भारत सरकार ने भी लोगों को पोषण के प्रति जागरुक करने और तंदुरस्त जीवन शैली के लिए प्रेरित करने के मकसद से राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत की.
प्रो तन्नु मेहता ने कहा की आज के समय में स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है. यही बात समझाने के लिए भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय का खाद्य और पोषण बोर्ड हर साल राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का आयोजन करता है. इस दौरान लोगों को अपने खानपान में उन चीजों को शामिल करने के लिए जागरुक किया जाता हैजिनके जरिए उनके शरीर को पोषण मिल सके,इम्युनिटी मजबूत हो सके और शरीर लंबे समय तक सेहतमंद रह सके.
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में प्रो गीता प्रुथी, डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो कविता, प्रो अंजलि, प्रो इंदु पुनिया,प्रो तनू मेहता, दीपक मित्तल आदि उपस्थित रहे.

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