Thursday, April 30, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन भारत सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का सारगर्भित समापन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 1, 2022 Tags: , , , ,

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार नई दिल्ली की उत्प्रेरणा और इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन कुरुक्षेत्र के संयोजन से हुआ आयोजन

उद्देश्य के ज्ञान के बिना शिक्षक दिशाहीन नाविक और शिक्षार्थी पतवारहीन नौका समान है: डॉ अनुपम अरोड़ा

“प्रदर्शन के माध्यम से विज्ञान की शिक्षा को और अधिक जागरूक एवं प्रभावी बनाना” रहा कार्यशाला का उद्देश्य  

      BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार हेतु राष्ट्रीय परिषद (एनसीएसटीसी) भारत सरकार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार नई दिल्ली की उत्प्रेरणा में तथा इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र के संयोजन से दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन इरादा एनजीओ के जनरल सेक्रेटरी राज पाल पांचाल, भिवानी से आये रिसोर्स पर्सन रण सिंह और कार्यकर्ता प्रतीक सैनी एवं पंकज कुमार ने विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं को कक्षा में विज्ञान विषय को रोचक बनाने के तरीकों का व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रशिक्षण दिया. माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो राकेश सिंगला ने किया. उनके साथ डॉ रवि रघुवंशी, डॉ राहुल जैन, डॉ रेखा रानी, डॉ एसके वर्मा, प्रो मयंक अरोड़ा, डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ चेतना नरूला और दीपक मित्तल भी मौजूद थे. इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र वर्षों से कबाड़ से जुगाड़ बनाकर विज्ञान के ऐसे मॉडल विकसित कर रहा है जिनका इस्तेमाल स्कूल-कालेज के छात्र-छात्राओं को विज्ञान विषय को सिखाने में किया जाता है. ये मॉडल न सिर्फ बहुत ही सस्ते है बल्कि इनसे विद्यार्थियों को विज्ञान सरलता के साथ समझ आ जाता है. अंतिम दिन भी रंगों के सिद्धांत, घर्षण के सिद्धांत, साइफन की विधि, टोर्क, वेग के सिद्धांत इत्यादि छात्र-छात्राओं को आसान तरीकों से सिखाये गए. मनोरंजक और सजीव कार्यशाला में रण सिंह की गुदगुदाती शैली ने भी सोने पे सुहागे का काम किया. अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए.

     रण सिंह रिसोर्स पर्सन ने कहा की यह कार्यशाला लक्ष्याधारित प्रशिक्षण माडयूल पर आधारित रही जिससे विद्यार्थियों को विज्ञान को समझने और रोचक बनाने में बहुत मदद मिलेगी. उन्होनें कहा कि इस प्रकार के क्रियाशील मॉडल्स बहुत ही कम लागत पर या फिर शून्य लागत पर तैयार किये जा सकते है. किसी कबाड़ी की दुकान पर जाकर हम कबाड़ से जुगाड़ बना सकते है जिसकी मदद से विज्ञान को समझना आसान हो जाता है. अपने हाथ से किये गए प्रयोग को हम कभी नहीं भूल सकते है. प्रतिभावान विद्यार्थीयों को विज्ञान में कैरियर चुनने हेतू प्रोत्साहित करने के लिए ही विभिन्न प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से सम्बंधित कार्यो के बारे में उन्हें संवेदनशील एवं जागरूक बनाया जा रहा है.

     प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए उसके उद्देश्यों पर विचार करना अति आवश्यक है. उद्देश्यों के ज्ञान के अभाव में शिक्षण कार्य उचित रूप से नहीं हो सकता है. उद्देश्य के ज्ञान के बिना शिक्षक उस नाविक के समान है जिसे अपने लक्ष्य का ज्ञान नहीं है तथा उसके शिक्षार्थी उस पतवारहीन नौका के समान है जो समुद्र की लहरों के थपेड़े खाकर तट की ओर बहती है. अगर अध्यापकों को यह ज्ञात नहीं है कि वे शिक्षा किस उद्देश्य से दे रहे हैं और छात्रों को भी यह ज्ञात नहीं है कि वे किस उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तो ऐसी दशा में विज्ञान शिक्षण के उद्देश्यों को निश्चित करना परम आवश्यक हो जाता है.  उद्देश्यों के निर्धारित हो जाने पर अध्यापक तथा छात्र दोनों लाभान्वित होते हैं तथा शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलता है. विषय के प्रति तन्मयता की भावना का जन्म उद्देश्यों के निश्चित हो जाने पर ही होता है. उद्देश्यों का निर्धारण हो जाने पर अध्यापक का कार्य सरल हो जाता है तथा छात्रों में आत्म बल एवं दृढ़ता आती है. उन्हें ज्ञात हो जाता है कि वह जो कार्य कर रहे हैं वह सार्थक तथा उद्देश्य पूर्वक है. इसी उद्देश्य की पूर्ति इस कार्यशाला ने की है जिससे प्राध्यापक और विद्यार्थी दोनों के ही उत्साह में वृद्धि हुई है.

राज पाल पांचाल जनरल सेक्रेटरी इरादा ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थीयों में विज्ञान के प्रति लगाव और जीवन में कैरियर को चुनने में जागरूकता एवं रूचि का निर्माण करना है. चूँकि यह कार्यशाला इंटरैक्टिव रही है इसलिए इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिला है. उन्होनें प्राध्यापकों से कहा कि वे भी अपनी कक्षाओं में रोचकता बढ़ाने हेतु ऐसे ही क्रियाशील मॉडल्स विकसित करे.

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