सत्संग मिलता है तो प्रभु कृपा से : श्री हित शरण अतुल कृष्ण शास्त्री जी
BOL PANIPAT : श्री प्रेम मंदिर पानीपत में श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में दूसरे दिन की कथा प्रारम्भ करते हुए पावन वृंदावन से पधारे कथा व्यास श्रद्धेय श्री हित शरण अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि कलिकाल में चाहे सभी भौतिक सम्पदा सुलभ हो जाये लेकिन तत्व वेता सदगुरुदेव का तथा सत्संग का मिलना दुर्लभ है। यदि मिलता है तो प्रभु कृपा से। कर्म योग, ज्ञान योग तथा भक्ति मार्ग में से किसी भी मार्ग पर चलने से से जीव अपना कल्याण कर सकता है लेकिन भक्ति मार्ग जो प्रेम का मार्ग भी है पर चलने से भक्त ईश्वर प्राप्ति कर सकता है। इतिहास में ऐसे अनेकों दृष्टांत मिलते हैं जिस प्रेमा भक्ति मार्ग पर चलकर अपने अपने सदगुरुदेव के सान्निध्य में भक्तों ने ईश्वर प्राप्ति की है।

परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज व परमाध्यक्षा प्रेम मंदिर पानीपत की अध्यक्षता में श्री प्रेम मंदिर पानीपत में पावन दिव्य श्री मद्भागवत कथा प्रारम्भ हुई। यह प्रेम भक्ति मार्ग जीव और भगवान का परस्पर मिलन है। इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। जगत में रहकर भी परस्पर प्रेम का व्यवहार होने से शांति बनी रह सकती है। प्रेम का संदेश काल सीमा और धर्म की परिधि से परे है। यूं कहें कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए है। हर तरह की हिंसा यदि नियंत्रण में होनी है तो एक मात्र परस्पर प्रेम ही इसका विकल्प है।
परमाध्यक्षा ने भी अपने उपदेश संदेश में बताया कि पावन कथा श्रवण करने व अनुसरण करने से ही परस्पर प्रेम का संचार और विश्व में शांति सम्भव है।
पावन कथा का 7 दिसम्बर से प्रारम्भ होकर 13 दिसम्बर के दिन विश्राम को प्राप्त होगी। समय सायंकाल 3 बजे से 7 बजे तक रहेगा। 13 दिसम्बर शुक्रवार को समय प्रातः 10 बजे से लेकर प्रभु इच्छा तक रहेगा।
सत्संग के दौरान श्री रमेश असीजा, चरनजीत रतरा, किशन लाल धींगड़ा, शशी असीजा, सुनिल मिगलानी, हरीश बजाज, जीत रेवड़ी, गोपाल बजाज, सुरेश अरोड़ा के अलावा बहुत संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

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