Friday, April 17, 2026
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आर्य कॉलेज में गूँजी सत्य की थाप: पद्मश्री डॉ. महावीर गुड्डू ने सराहा, ‘राजा हरिश्चंद्र’ के सांग ने जीता दिल

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 20, 2026 Tags: , , , , ,

-रत्नावली युवा सांग महोत्सव का दूसरा दिन: लोक-कला और सत्य की विजय का संगम
-मुख्य अतिथि डॉ. महावीर गुड्डू बोले— “सांग हरियाणा की आत्मा, इसे सहेजना हर युवा का धर्म”

BOL PANIPAT – शुक्रवार 20 मार्च 2026: आर्य पीजी कॉलेज के ओ.पी. शिंगला सभागार में आयोजित 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव के दूसरे दिन हरियाणा की लोक-संस्कृति के अनूठे रंग देखने को मिले। महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में ‘हरियाणा के गौरव’ और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध लोक कलाकार डॉ. महावीर गुड्डू ने शिरकत की। वहीं, विशिष्ट अतिथि के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की विदुषी प्रो. कमला कौशिक उपस्थित रहीं।
कॉलेज की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रभारी डॉ. रामनिवास ने मुख्य अतिथि डॉ. महावीर गुड्डू और विशिष्ट अतिथि प्रो. कमला कौशिक को पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

‘सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र’ के सांग ने जीता दिल:

दूसरे दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुति में एस.डी. कॉलेज (पानीपत) की टीम ने कालजयी सांग ‘राजा हरिश्चंद्र’ का जीवंत मंचन किया। कलाकारों ने राजा हरिश्चंद्र के सत्य के प्रति अटूट विश्वास, उनके त्याग और काशी के श्मशान में उनके संघर्ष की मार्मिक कहानी को इतने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया कि दर्शकों की आँखें नम हो गईं। ढोलक की गूँज और सारंगी की तान पर थिरकते कलाकारों ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. महावीर गुड्डू ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “सांग हमारी धरोहर है। आर्य कॉलेज ने इस महोत्सव के जरिए जो लौ जलाई है, वह पूरे हरियाणा के सांस्कृतिक आकाश को रोशन कर रही है। युवा कलाकारों का जोश देखकर विश्वास होता है कि हमारी लोक-कला कभी नहीं मिटेगी।”
उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रत्नावली महोत्सव का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लुप्त होती लोक-कलाओं को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने विशेष रूप से युवा कलाकारों के अभिनय की सराहना की और कहा कि सांग जैसे पारंपरिक मंचों से युवाओं में आत्मविश्वास और अपनी भाषा के प्रति गर्व की भावना जागृत होती है।”
विशिष्ट अतिथि प्रो. कमला कौशिक ने कहा, “सांग विधा में साहित्य, संगीत और नाट्य का अनूठा मिश्रण है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में भी आज हरियाणवी लोक-साहित्य पर शोध हो रहे हैं, जो इसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।”
सांस्कृतिक प्रभारी डॉ. रामनिवास ने बताया कि युवा पीढ़ी का सांग के प्रति उत्साह देखते ही बनता है। इस चार दिवसीय महोत्सव के माध्यम से हम न केवल मनोरंजन कर रहे हैं, बल्कि नैतिक मूल्यों का प्रसार भी कर रहे हैं। महोत्सव के आगामी दिनों में प्रदेश की अन्य नामी टीमें अपनी प्रस्तुति देंगी।
इस अवसर पर डॉ.विजय सिंह, कला प्रेमी वीरेंद्र शर्मा का समस्त स्टाफ, सांस्कृतिक समिति के सदस्य और भारी संख्या में स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।

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