11 अक्टूबर 2026 को होगा श्री जिनवाणी वेदी एवं श्री जिनवाणी विराजमान प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन
BOL PANIPAT : कायस्थान स्ट्रीट स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दुन्दीवालान मे एक दिवसीय श्री जिनवाणी वेदी एवं श्री जिनवाणी विराजमान प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन रविवार 11 अक्टूबर 2026 को संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से संपन्न होने जा रहा है
इस अवसर पर सर्वप्रथम प्रातः की बेला में श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न होगी
तत्पश्चात घटयात्रा, ध्वजारोहण, वेदी शुद्धि की मांगलिक क्रियाएं, मांगलिक पूजा आदि प्रारंभ होगी नित्य नियम पूजन, वास्तु पूजन और श्री जिनवाणी विधान का भव्य आयोजन होगा
उसके पश्चात भव्य रूप से मां जिनवाणी को नवीन वेदी में विराजमान किया जाएग
सभी मांगलिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य श्री अशोक जैन शास्त्री धीरज दिल्ली जी के पावन निर्देशन में संपन्न होगा
मंदिर में बन रही बन रहे निर्वाण भूमि तीर्थ क्षेत्र के चित्रों का भी अवलोकन किया जाएगा
इस मंदिर में विशेष रूप से पहले से ही श्री सम्मेद शिखर जी, श्री गिरनार जी, श्री गोमटेश बाहुबली जी तीर्थ क्षेत्र के स्वर्ण चित्र बने हुए थे अब श्री चंपापुरी जी, अष्टापद कैलाश पर्वत और श्री पावापुरी जी के अद्भुत दर्शन भी सभी को होंगे
श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर दुन्दीवालान के जो कि कायस्थान मोहल्ला में स्थित है
मंदिर अति प्राचीन है और बेहद शांत प्रिय वातावरण में बना हुआ है
मंदिर का निर्माण सेठ दुंदीमल जैन ने ढाई सौ वर्ष पूर्व कराया था
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह मंदिर अति प्राचीन हैं मंदिर में 12वीं एवं 14वीं शताब्दी की प्रतिमाएं विराजमान है, यह मंदिर 280 वर्ग गज जगह में निर्मित है साथ ही इसमें संत निवास का भी निर्माण किया गया है सेठ दुंदीमल जैन परिवार विद्वानों का परिवार रहा है
प्रबंधक मुकेश जैन ने बताया कि पंडित कबूल सिंह जैन, बाबू रतनलाल जैन एडवोकेट, पंडित सुमित प्रसाद जैन,पंडित जियालाल जैन लाल, लाला शांति प्रसाद जैन, मशहूर शायर पदम सैन गौहर, लाला बसंत लाल जैन, लाला सैन सिंह जैन, और पंडित रमेश चंद जैन पूजा आराधना किया करते थे
बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि जब पुराने समय में पंडित कबूल सिंह जैन बाजार में निकलते थे तो हर जाति के लोग यह कहकर अपना हुक्का छुपा लेते थे कि पंडित जी आ रहे हैं
मंदिर में हर वर्ष दसलक्षण पर्व मे धूप दशमी के पावन अवसर पर श्री दिगंबर जैन मंदिर जैन मोहल्ला से सैकड़ो वर्षों से महा आरती (जोत) नगर भ्रमण करते हुए स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर दुन्दीवालान में आती है और वहां पहुंचकर सभी लोग भगवान की भक्ति करते हैं धूमधाम से भक्ति नृत्य करते हुए जिनेंद्र प्रभु की आराधना करते हैं
अनन्त चौदस के अवसर पर जैन मोहल्ला बड़ा मंदिर से जल यात्रा का आयोजन होता है वह जल यात्रा भी इस मंदिर में सैकड़ो वर्ष से आती है और यहां पर पहुंचने पर प्रभु का भव्य अभिषेक होता है
सेठ दुंदीमल जैन परिवार एक वटवृक्ष के समान है परिवारों के बहुत सदस्य पानीपत से बाहर स्थापित हो चुके हैं पर जब भी पानीपत आते हैं तो अपने पूर्वजों के द्वारा निर्मित मंदिर में दर्शनाथ अवश्य आते हैं मंदिर में समय समय पर अतिशय लोगों ने अनुभव किए हैं
परिवार के सदस्य युवा समाजसेवी मेहुल जैन एडवोकेट ने बताया कि इस मंदिर की व्यवस्था बहुत समय तक उनके दादा जी लाला शांति प्रसाद जैन किया करते थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में इसका भव्य जीर्णोद्धार भी कराया था
उनके पश्चात इस व्यवस्था को मुकेश जैन पूर्व पार्षद देख रहे हैं सन् 2004 से 2006 मे आचार्य श्री सौरभ सागर जी की प्ररेणा से मंदिर भव्य नवीनीकरण कराया गया और भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न हुआ
मंदिर पुण: नए तरीके से बनाया गया
जब मंदिर को नवीनीकरण हो रहा था तो उसे समय खुदाई में मंदिर की वेदी के नीचे एक मंदिर निकला और एक प्राचीन कुआं भी निकला था इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मंदिर कितना प्राचीन है
मंदिर की मूल वेदी पर भगवान पार्श्वनाथ कमल आसन पर विराजमान है
आजादी की समय हिंदू मुस्लिम विवाद होने पर भी मंदिर और स्थानीय मोहल्ले में किसी तरह का भी कोई अपराधिक घटना नहीं हुई उसका कारण इस मंदिर का अतिशय था
मंदिर में जैन धर्म के सबसे पावन 24 तीर्थंकरो को पांचों मोक्ष भूमि श्री कैलाश पर्वत, श्री सम्मेद शिखरजी, श्री गिरनार जी, श्री चम्पापुरी जी, श्री पावापुरी जी एंव दक्षिण में महातीर्थ गोमटेश बाहुबली जी की भाव पेंटिंग स्वर्ण चित्रकारी के माध्यम से की गई है
मंदिर का गर्भ ग्रह इस तरीके से बनाया गया है की अशुद्ध वस्त्र धारण किए हुए व्यक्ति उसे गर्भ ग्रह में प्रवेश नहीं कर सकता

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