21 लाख 50 हजार रू के चैक बाउंस का आरोपी को कोर्ट ने किया बरी।
– 6 साल 11 महीने कोर्ट में चली सुनवाई में आया केस का फैसला
BOL PANIPAT : समालखा। 6 जून, समालखा कोर्ट के माननीय ज्युडीसियल जज अशोक कुमार की कोर्ट ने चैक बाउंस के केस में फैसला सुनाते हुए 21 लाख 50 हजार रू के चैक बाउंस आरोपी को बरी करने के आदेश फैसला सुनाया है। माननीय कोर्ट ने करीब 7 साल पुराने केस में सुनवाई करते हुए अपना फैसला किया है।
आरोपी पक्ष के वकील संजय त्यागी ने जानकारी देते हुए बताया कि केस के तथ्यों के अनुसार वर्ष 2015 में जुन माह में समालखा के गांव पावटी निवासी अमित पुत्र जय भगवान ने कोर्ट में अपने वकील विनय मलिक के माध्यम से शशिपाल पुत्र जय नारायण के खिलाफ चैक बाउंस के एन आई एक्ट की धारा 138 के तहत एक आपराधिक शिकायत दायर करते हुए आरोप लगाया था कि आरोपी शशिपाल ने शिकायतकर्ता अमित से एक जमीन का एग्रीमेंट करने की एवज में दिनांक 04.04.2014 को 26 लाख रू जमीन की ब्याना राशी तौर पर लिए है। इसके बाद शिकायतकर्ता अमित ने शशिपाल पर आरोप लगाया कि उसने यह राशी धोखाधडी व फर्जी ब्याना तैयार करके ली है। जिसका पता लगने पर अमित ने आरोपी के घर पर एक पंचायत दिनांक 15.12.2014 आयोजित की ।
पंचायत में आरोपी शशिपाल द्वारा शिकायतकर्ता अमित को ली गई 26 लाख रू की राशी को वापस करने की बात का समझौता करने का दावा कोर्ट केस में किया गया और पंचायती समझौते के तहत आरेापी शशीपाल ने शिकायतकर्ता अमित को 26 लाख 50 हजार रू वापस देने की एवज ली गई धन राशी के लिए 3 चैक देने का दावा अपने कोर्ट केस में किया गया। कोर्ट में दावे के अनुसार आरोपी द्वारा दिए गए चैको में एक चैक 10 लाख रू, की रारशी का व दूसरा चैक 11 लाख 50 हजार रू व तीसरा चैक 5 लाख रू की राशी का देना बताया गया था।
शिकायतकर्ता अमित ने अपनी शिकायत में कोर्ट का यह भी कहा कि आरोपी का 5 लाख रू की राशी का चैक शिकायतकर्ता के दोस्त विजय जो कि शिकायतकर्ता के गांव का ही उसको दे दिया क्योकि जमीन के ब्याने में अमित ने 5 लाख रू विजय से लिए थे और 21 लाख 50 हजार रू के चैंक उसने अपने पास रख लिए थे।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी द्वारा दिए गए चैको को उसने वर्ष 2015 में अपने खाते में पेश किया । जब उसने चैको को खाते में लगाया तो आरोपी के बैंक ने खाता बंद होने की बात बोल कर उसके चैक वापस कर दिए और आरोपी द्वारा दिए गए चैक बाउंस हो गए। चैक बाउंस हाने के बाद शिकायकर्ता ने आरोपी को अपने वकील के द्वारा कानूनी नोटिस दिया और चैक की पेमेंट देने को बोला लेकिन आरोपी ने उस पर कोई पेमेंट शिकायकर्ता को वापस नही दी । जिस पर अमित ने आरोपी पर कोर्ट में चैक बाउंस एक्ट एन. आई. की धारा 138 के तहत शिकायत दायर करते हुए 21 लाख 50 हजार रू आरोपी से चैक राशी वापस दिलवाने व आरोपी को सजा देने की मांग की गई।
शिकायकर्ता अमित की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए माननीय कोर्ट ने आरोपी को कोर्ट में समन करते हुए तलब किया जिस पर आरोपी शशिपाल कोर्ट में पेश हुआ और दोनो पक्षो द्वारा कोर्ट के सामने अपने- अपने सबूत पेश किए । कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायकर्ता अमित के क्रास एगजामिन के दौरान उसके द्वारा शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित नही हो पाए और जो सबूत उसने कोर्ट में पेश किए व भी कोर्ट ने शिकायत को साबित करने के लिए पर्याप्त नही माने । शिकायत कर्ता द्वारा अपने दोस्त विजय से 5 लाख रू लोन पर लेने की बात को भी वह साबित नही कर पाया वहीं आरोपी के वकील संजय त्यागी ने अपनी गवाही में जो सबूत माननीस कोर्ट के सामने पेश किए उनमें शिकायतकर्ता का एग्रीमेंट किये जाने की बात साबित नही हो पाई क्योंकि एग्रीमेंट शिकायतकर्ता ने अपने नाम पर लिखया हुआ था ना कि आरोपी के नाम पर होना पाया गया। वहीं कोर्ट के सामने शिकायकर्ता अपनी आर्थिक मजबुती को भी पूर्ण रूप साबित नही कर पाया।
माननीय कोर्ट ने दोनो पक्षो की और से पेश किए गए सबुतो व वकीलो की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी शशीपाल को सभी आरोपो से बरी करते हुए शिकायतकर्ता की शिकायत को खारिज करने का फैसला सुनाया। अदालत में केस की सुनवाई 6 वर्ष 11 महीने व 18 दिन तक चली।

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