कल पानीपत पहुंचेगी शहीद मेजर आशीष धौंचक की पार्थिव देह.

BOL PANIPAT : जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के कोकरनाग इलाके में बुधवार को सेना और चरमपंथियों के बीच हुई मुठभेड़ में कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोंचक और डीएसपी हुमायूं मुज़म्मिल भट्ट शहीद हो गए. हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली है जिसे पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा का यह प्रॉक्सी संगठन माना जाता है.

हमले के बाद से सेना का सर्च अभियान जारी है और हमलावर चरमपंथियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है. बीते कुछ सालों में कश्मीर में हुआ ये बड़ा चरमपंथी हमला बताया जा रहा है.

मुठभेड़ में शहीद हुए 36 वर्षीय मेजर आशीष धोंचक 15वीं सिख लाइट इन्फेंट्री में शामिल थे. मेजर आशीष ने केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाई की। 12वीं के बाद उन्होंने बरवाला के कॉलेज से बीटेक इलेक्ट्रोनिक किया। जिसके बाद वह एमटेक कर रहे थे। एमटेक का एक साल पूरा हुआ था कि 25 साल की उम्र में 2012 में भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट भर्ती हुए थे। इसके बाद वह बठिंडा, बारामूला और मेरठ में तैनात रहे। 2018 में पदोन्नति पाकर वे मेजर बन गए। ढाई साल पहले उन्हें मेरठ से राजौरी में पोस्टिंग मिली। जिसके बाद वह परिवार को साथ नहीं ले गए। उन्होंने पानीपत के सेक्टर 7 में मकान किराये पर लिया और उन्हें यहां छोड़ दिया।
मेजर आशीष को इसी साल 15 अगस्त को उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल दिया गया था। 15 अगस्त, 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ये मेडल दिया था।
पानीपत के बिंझौल गांव के रहने वाले मेजर आशीष जल्द ही छुट्टियों पर घर आने वाले थे.
उन्होंने अपनी माँ से वादा किया था कि वह अगले महीने 23 अक्तूबर को अपने घर के गृह प्रवेश के मौके पर घर आएंगे.संयोग से इसी दिन उनका जन्मदिन भी था.
फिलहाल आशीष की पत्नी ज्योति अपनी दो वर्षीय बेटी वामिनी व सास-ससुर के साथ पानीपत के सेक्टर 7 में एक किराये के मकान में रहती हैं.

मेजर आशीष के पिता लालचंद नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) से रिटायर होने के बाद आशीष की पत्नी के साथ ही रह रहे हैं.
मेजर आशीष के परिवार को उनके नहीं रहने की खबर बुधवार को टीवी चैनलों के माध्यम से मिली. इससे पहले उन्हें सेना मुख्यालय से फोन आया था जिसमें उन्हें आशीष के घायल होने की सूचना मिली थी.
मेजर आशीष के चाचा महावीर की तीन दिन पहले ही उनके साथ टेलीफोन से बातचीत हुई थी. उन्होंने बताया कि मेजर आशीष 23 अक्टूबर को होने जा रहे गृह प्रवेश के कार्यक्रम को लेकर काफ़ी उत्साहित थे. मेजर आशीष का परिवार 23 अक्टूबर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था क्योंकि इस दिन गृह प्रवेश के साथ-साथ उसका जन्मदिन भी था और गृह प्रवेश होना उसका सपना पूरा होने जैसा था. उन्होंने TDI सिटी में अपना नया घर बनवाया था।

वहीं, आशीष की मां कमला अपने बेटे को खोने के ग़म में रो-रोकर बेहाल हैं.
वह कहती हैं, “ मैंने एक शेर बेटे को जन्म दिया था। मेरा बेटा देश के लिए शहीद हो गया। मैं अपने बेटे को सैल्यूट करूंगी। बेटे का स्वागत करूंगी। उसे अपनी झोली में लूंगी, मैं रोऊंगी नहीं। .”
मेजर आशीष अपने माता-पिता का अकेला बेटा था. 3 बहनें का इकलौता भाई था .
मेजर आशीष अपने चचेरे भाई विकास को देखकर सेना में शामिल हुआ था. सेना के शीर्ष अधिकारी मेजर आशीष के परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे .

मेजर आशीष धौंचक (36) की पार्थिव देह कल पानीपत पहुंचेगी। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव बिंझौल में किया जाएगा। उनके शव काे उनके TDI सिटी स्थित नए घर में भी ले जाया जाएगा, जिसे उन्होंने बनवाया था।
प्रशासन के मुताबिक मिलिट्री हवाई जहाज से उनकी पार्थिव देह अंबाला तक लायी जाएगी । इसके बाद सड़क उनके घर लाई जाएगी। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में ही किया जाएगा।

शहीद आशीष का पार्थिव शरीर कल पानीपत पहुंचेगा।
विधायक प्रमोद विज ने मेजर आशीष धौंचक के घर जाकर शोक संवेदना व्यक्त की एवं परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि शहीद मेजर का ये अमर बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। दुःख की इस कठोर घड़ी में हम सभी पानीपतवासी परिजनों के साथ है।

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