टीबी जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में स्वच्छता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण: उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया
टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी
टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 56 पंचायतों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज से नवाजा
स्वच्छता, जागरूकता और जनभागीदारी से ही बनेगा टीबी मुक्त देश
जिला स्तरीय टीबी मुक्त पंचायत समारोह आयोजित
BOL PANIPAT , 7 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जिला सचिवालय सभागार में टीबी मुक्त पंचायत सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने की। उपायुक्त ने समारोह में जिले की पंचायतों द्वारा टीबी उन्मूलन की दिशा में किए गए सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली पंचायतों में 6 ग्राम पंचायतों को ‘गोल्ड’, 10 पंचायतों को ‘सिल्वर’ और 40 पंचायतों को ‘ब्रॉन्ज’ श्रेणी में सम्मानित किया गया।
उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने सभी सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। गांव स्तर पर जागरूकता, समय पर जांच और उपचार के साथ-साथ साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है। स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ समाज की नींव रखता है और टीबी जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में स्वच्छता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उपायुक्त ने सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने-अपने गांवों को न केवल टीबी मुक्त बनाएं, बल्कि उन्हें खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए भी निरंतर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों के विकास के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना पंचायतों की जिम्मेदारी है। डॉ. दहिया ने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ टीबी को खत्म करना नहीं, बल्कि हर गांव को स्वस्थ, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाना है। जब गांव मजबूत होंगे, तभी देश सशक्त बनेगा। पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और लोगों की जागरूकता से हम निश्चित रूप से टीबी मुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन अभियान में जनभागीदारी सबसे अहम कड़ी है। यदि हर व्यक्ति अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखे, पोषण पर ध्यान दे और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करे, तो इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। समारोह में उपस्थित सभी सरपंचों को प्रेरित करते हुए उपायुक्त ने गांवों के समग्र विकास, स्वच्छता अभियान को गति देने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष फोकस करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त पंचायतें अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बनेंगी और जिले को एक नई पहचान देंगी। कार्यक्रेम में सभी उपस्थित जनों ने टीबी उन्मूलन और स्वच्छ, स्वस्थ गांव बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
गोल्ड मेडल पाने वाली पंचायतों में खलीला माजरा, कैथ, डुमियाना, भैंसवाल, निजामपुर, मोहाली रहे। इसी प्रकार सिल्वर मेडल प्राप्त करने वाली पंचायतों में ताहरपुर, पलरी, पुठर, अलूपुर, बेगमपुर, ओसारी, न्यू बोहली, चिडया, नवादा पार, रामरा आर रहे। ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त करने वाली पंचायतों में अधमी, मिर्जापुर, जलमाना, रसलापुर, गोयला खेड़ा, संजोली, गढ़ी भल्लोर, ढेराजोगियां, अहर, कुराना, भाऊ पुर, कुराड़, छिछडऩा, नौल्था, ब्राह्मण माजरा, महराना, माण्डी, बलाना, ग्वालड़ा, बुआना लाखु, बिजावा, शाहपुर, जोंदन खुर्द, नारा, दरियापुर, सिंहपुरा, शेरा, धर्मगढ़, खंडरा, भादर, रिसालू, जाटल, बसेरा, कारकौली, करहस, नमुंडा, डिकाडला, जौरासी खास, नंगला पार, तमसाबाद के नाम है।

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