गर्मी की लहर से अपने मवेशियों को बचाने के लिए पशुपालकों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानियां: उपायुक्त डॉक्टर विरेन्द्र कुमार दहिया
-पशुओं को ज्यादातर समय छाया में रखें, कम से कम तीन बार शुद्ध पानी जरूर पिलाएं
-बीमार होने की स्थिति में खुद इलाज न करके पशु चिकित्सा के पास ले जाए
-जरूरत पडऩे पर टोल फ्री नंबर 1962 की भी ले सकते हैं मदद
BOL PANIPAT, 21 मई। बढ़ते पारे ने आमजन के साथ साथ मवेशियों को बुरी तरह से प्रभावित करना प्रारंभ कर दिया है। आने वाले दिनों में गर्म लहर के और बढऩे के संकेत हैं। ऐसे मैं पशु पालकों को अपने मवेशियों के साथ छोटे बच्चों को भी गर्मी से राहत प्रदान करने के लिए कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता है।
उपायुक्त डॉक्टर विरेन्द्र कुमार दहिया ने बताया कि जैसे जैसे पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की परेशानियां के साथ पशुओ की परेशानी में भी बढ़ोतरी होना लाज़मी है। बीमार होने की स्थिति में अपने मवेशियों को पशु चिकित्सा के पास ले जाए व उपचार कराए। बढ़ती गर्मी न केवल इंसानों के लिए परेशानी का सबब बनती है, बल्कि बढ़ते तापमान का असर मवेशियों पर भी पड़ रहा है। इसको लेकर विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। उपायुक्त ने बताया कि पशु पालक गर्मी की में अपने पशुओं के खान-पान व पानी का विशेष ध्यान रखें। टोल फ्री नंबर, 1962 पर भी पशु पालक सहायता ले सकते हैं।
पशु चिकित्सक डॉक्टर अशोक लोहान ने बताया कि गर्मी की लहर के कारण दुधारू पशुओं में दूध की मात्रा के प्रतिशत में कमी आती है। पशुओं में तेज बुखार भी होने की संभावना बढ़ जाती है। पशु चिकित्सक ने बताया कि बीमार होने पर पशुओं का तुरंत प्रभाव से पशु चिकित्सक से उपचार करवाना चाहिए।
पशु चिकित्सक ने बताया कि पशु पालक अपने पशुओं को गर्मी की मार से बचाने के लिए विशेष सावधानियां बरते। पशु चिकित्सक ने बताया कि कई बार पशुओ में डी हाईड्रेशन की कमी हो जा जाती है। कई बार पशु की खाल में झूरिया दिखाई देती है। पशु की खाल भी सूख जाती है। पशु हॉफना भी शुरू कर देता है। तापमान बढऩे से इसका असर नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है, पशु चक्कर खाकर गिर भी सकता है। ऐसे में पशुओं के बचाने के लिए पशुपालकों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। उन्हें तुरंत प्रभाव से पशु चिकित्सालय में लाना चाहिए व स्वयं उपचार ने करके डॉक्टर की सलाह लेकर आगे बढऩा चाहिए।
पशु चिकित्सक ने बताया कि ने बताया कि धूप निकलने से पहले व देर रात पशु को नहलाए, दिन में 3-4 बार पानी पिलाए, पशुओं के लिए कूलर का प्रबंध करें, खेतों में रहने वाले पशुओं को अगर पेड़ के नीचे बांघते है तो आसपास सुबह उठते ही ठंडे पानी का छिडक़ाव करे, पशुओं को तूड़ा कम व हरा चारा अधिक दे।
पशु चिकित्सक ने बताया कि हरे चारे का भी ध्यान रखें। पशु को हर रोज 50-50 ग्राम खनिज मिश्रण अवश्य खिलाएं। नमक की भी विशेष व्यवस्था रखें। हॉफने वाले पशु को नहर में नहलाना फायदेमंद रहते है। भांग के पौधों का भी इस मौसम में पशुओं के लिए उपयोग लाभदायक है।
उन्होंने बताया कि उन्हें अपने पशु सुबह-शाम एक घंटा सूर्योदय से पहले व सूर्यास्त के बाद जोहड़ में रखना है जिससे तीन-चार दिन में बुखार खत्म हो जाएगा। उन्होंने बताया कि पशु चिकित्सक अपने मवेशियों को छाया में बांधे। जिले में ग़ल घोटू और मुंह खोल के टीके लगाने का कार्य पूरा हो चुका है अभी यह दोबारा अगस्त में फिर से प्रारंभ होगा।

Comments