कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए मानव समाज को नयी आचार संहिता बनानी होगी- डा. हरदीप सिंह
–पराली प्रबन्धन एवं कम से कम कार्बन उत्सर्जन हेतु लोगों के जागरूक करने के लिए नाटक एक सशक्त माध्यम-डा. अनुपम अरोड़ा
–धरती की सेहत तथा पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त रखना है तो पराली जलाने से बचे किसान समाज- आदित्य डबास
–कृषि एवं कल्याण विभाग द्वारा संचालित एच ए एम ई टी के मार्गदर्शन में शुरूआत समिति के रंगकर्मियों द्वारा नाटक ‘‘बसुन्धरा बोली’’ नाटक का मंचन किया गया।
BOL PANIPAT : 7 नवम्बर ,
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित एच ए एम ई टी आई जींद के संहयोग से डा. हरदीप सिंह, आई ए एस रिटायर्ट, महानिदेशक एच ए एम ई टी जींद के मार्गदर्शन में संचालित शुरूआत समिति के रंगकर्मियों द्वारा नाटक ‘‘बसुन्धरा बोली’’ नाटक का प्रथम मंचन आज एस डी पी जी कालेज पानीपत के परिसर में आयोजित की गयी वही क्रमशः दूसरी प्रस्तुति सरदार पटेल पुस्तकालय शिवा एवं तीसरी सरदार पटेल पुस्तकालय भोडवाल माजरी में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर डा. हरदीप सिंह, आई ए एस रिटायर्ट, महानिदेशक एच ए एम ई टी जींद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के समय में बढ़ते तापमान को कम करने के लिए मानव समाज को नई आचार संहिता निर्मित करनी होगी जिसमें आधुनिक जीवन शैली में पर्यावरण मित्र व्यवहार करके कैसे कार्बन उत्सर्जन को कम से कम किया जाय। उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान देश के खाद्यान भंडारण में अपने श्रम से ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा है इसलिए किसान समाज के हित को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार द्वारा पराली प्रबन्धन को प्राथमिकता दिया जा रहा है इस उददेश्य को जन-जन तक प्रचारित-प्रसारित करने के लिए नाटक को नवजागरण का माध्यम बनाया जा रहा है ताकि किसान भाई अपने हित के साथ ही धरती तथा पर्यावरण के हित को भी प्राथमिकता दें।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एस डी पी जी कालेज के प्राचार्य डा. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि दीपावली से पहले कलाकारों द्वारा नाटक के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण के प्रति जागरूक करना एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कलाकारों ने आम जन से पराली न जलाने तथा प्रदूषणमुक्त दीवाली मनाने की अपील की। यह वास्तव में सराहनीय है।
इस अवसर पर उप कृषि निदेशक आदित्य डबास ने कहा कि धरती तथा पर्यावरण के सेहत को ठीक रखने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढी को यदि स्वस्थ रखना है सभी को पर्यावरण मित्र का व्यवहार करना होगा।
नाटक के अंत में शुरूआत समिति के रंगकर्मियों ने लोगों को धरती को प्रदूषण मुक्त बनाने हेतुु शपथ दिलाया।
‘‘हम शपथ लेते हैं कि धरती को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए पर्यावरण मित्र व्यवहार करेंगे। हम शपथ लेते हैं कि हम ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं करेंगे जिससे धरती पर निवास करने वाले किसी भी जीव का जीवन संकट में आये। हम शपथ लेते हैं कि हम अपने किसान भाइयों को जागरूक करेंगे कि वे खेतों में पराली न जलाये तथा स्वयं जागरूक नागरिक बनकर आतिशवाजी मुक्त दिवाली मनायेंगे तथा प्रकृति संरक्षण के सच्चे प्रहरी बनेंगे’’

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