Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय एकता दिवस हर्षौल्लास के साथ मनाया गया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 31, 2022 Tags: , , , ,

राष्ट्रीय सेवा योजना और युवा रेड क्रॉस के संयुक्त तत्वाधान में कार्यकर्ताओं ने ली एकता और अखंडता की शपथ. निकाली जागरूकता रैली

अखंड भारत के बाद पटेल आज होते तो अखंड पर्यावरण वाले भारत का निर्माण करते: डॉ अनुपम अरोड़ा       

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के साथ-साथ अखंड पर्यावरण दिवस के रूप में संकल्प और राष्ट्र भक्ति के भाव के साथ मनाया गया. कॉलेज एनएसएस यूनिट और युवा रेड क्रॉस द्वारा विशेष तौर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता एसडी पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की. इस अवसर पर एवं प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और एनएसएस एवं वाईआरसी प्रभारी डॉ राकेश गर्ग ने उपस्थित स्टाफ सदस्यों और कॉलेज के छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई और जागरूकता रैली निकल कर समाज और आमजन को देश की एकता और अखंडता को बनाये रखने का आह्वान किया. ‘सरदार पटेल अमर रहे’, ‘भारत माता जी जय’ के नारों से पूरा कॉलेज प्रांगण देश भक्ति के बाव से लबरेज हो गया. इस मौके पर डॉ एसके वर्मा, प्रो नरेंद्र कौशिक, डॉ मुकेश पुनिया और श्री दीपक मित्तल भी मौजूद रहे. इस अवसर पर सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन, दर्शन और उपलब्धियों पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 80 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया.

  कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर इस शपथ को हृदय से उठाया

“मैं सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूँ कि मैं राष्ट्र कि एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाये रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूँगा और अपने देशवासियो के बीच यह सन्देश फैलाने का भी भरसक प्रयत्न करूँगा. मैं यह शपथ अपने देश कि एकता की भावना से ले रहा हूँ जिसे स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यों द्वारा संभव बनाया जा सका. मैं अपने देश कि आतंरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान करने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प करता हूँ”.

पवन गोयल प्रधान ने अपने सन्देश में कहा  कि भारतीय नागरिक सेवाओं का भारतीयकरण कर इसे भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में परिवर्तित करना सरदार पटेल की ही देन है. यदि सरदार पटेल को कुछ समय और मिलता तो संभवत: नौकरशाही का पूरी तरह से कायाकल्प हो जाता. उनके मन में किसानों एवं मजदूरों के लिये असीम प्रेम था तथा किसानों एवं मजदूरों के बारे में उन्होनें कहा था की दुनिया की सम्पूर्ण जिम्मेदारी किसानो और मजदूरो के कन्धों पर हैं. वल्लभ भाई पटेल भारत के राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम में अक्षम शक्ति स्तम्भ थे. आत्म-त्याग, अनवरत सेवा तथा दूसरों को दिव्य-शक्ति की चेतना देने वाला उनका जीवन सदैव प्रकाश-स्तम्भ की अमर ज्योति बना है. सरदार पटेल मितभाषी, अनुशासनप्रिय और कर्मठ व्यक्ति थे और उनके व्यक्तित्व में संगठन कुशलता, राजनीतिक दूरदर्शिता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा थी. अपने अदम्य उत्साह, असीम शक्ति एवं मानवीय समस्याओं के प्रति व्यवहारिक दृष्टिकोण से उन्होंने निर्भीक तरीके से स्वतंत्र राष्ट्र की प्रारम्भिक कठिनाइयों का समाधान अद्भुत सफलता से किया. राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं योगदान के कारण ही आज विश्व के श्रेष्ठ राजनीतिज्ञों की श्रेणी में सरदार पटेल को भी याद किया जाता है. सरदार पटेल मन, वचन तथा कर्म से सच्चे देशभक्त थे. वे वर्ण-भेद तथा वर्ग-भेद के कट्टर विरोघी थे. अपूर्व संगठन-शक्ति एवं शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले सरदार पटेल, आज भी युवा पीढी के लिये प्रेरणा स्रोत हैं. कर्म और संघर्ष को वे जीवन का ही एक रूप समझते थे. भारत रत्न से सम्मानित सरदार वल्लभ भाई पटेल को हमेशा याद किया जायेगा तथा युवा पीढ़ी उनके बताये मार्ग पर चलकर यश और मान प्राप्त कर सकती है.

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की सरदार वल्लभ भाई पटेल अखंड भारत के निर्माण के लिए सर्वाधिक उत्तरदायी है और यदि आज वे जीवित होते तो वे अवश्य भारत के अखंड पर्यावरण के बारे में कार्यरत रहते. इंसान ने अपने स्वार्थ और मतलब के कारण पर्यावरण को खंडित-खंडित कर दिया है. जिस व्यक्ति ने देश को अखंड बनाया वो आज पर्यावरण को भी एक रूप में जोड़ते. उनकी अनुपस्थिति में यह कार्य आज देश के हर युवा को करना है. उन्होनें ने कहा कि स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल बाहर से जितने सौम्य और शांत थे भीतर से उतने ही दृढ़निश्चयी और दूरदर्शी थे. भारत देश कि मजबूत परिकल्पना के कारण ही उन्हे भारत का लौह पुरूष’ कहा जाता है. उनके योगदानो को याद करते हुए प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बडा योगदान खेड़ा संघर्ष में दिखा जहाँ से वे एक बड़े नेता के रूप में उभरे. सरदार पटेल ने इस आन्दोलन में किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप अंग्रेज सरकार झुकी और किसानो को करों में राहत दी गयी. यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी और इसी बात ने निर्धारित कर दिया की आने वाले वर्षो में इस महान व्यक्तित्व ने देश के लिए क्या कुछ करना है.

डॉ राकेश गर्ग एनएसएस प्रभारी ने कहा की देसी रियासतों को भारत में मिलाने का साहसिक कार्य सरदार पटेल के प्रयासों से ही संभव हुआ. 1947 में जब भारत आज़ाद  हुआ तो उस समय देश में लगभग 562 रियासतें थीं और सरदार पटेल द्वारा इन सभी रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का सबसे बड़ा आश्चर्य साबित हुआ क्योंकि भारत में यह रक्तहीन क्रांति थी.  ऐसा व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणा और उर्जा का श्रोत है. उनके आदर्शो पर चल कर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धान्जली दे सकते है.

निबंध प्रतियोगिता का परिणाम यह रहा –

प्रथम                सौरभ                    बीकॉम-तृतीय सेमेस्टर  

द्वितीय          सूरज                बीए-पंचम सेमेस्टर   तृतीय          ख़ुशी                बीकॉम-पंचम सेमेस्टर   

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